'आशा भोसले का निधन: संगीत जगत में शोक की लहर', कुणाल गांजावाला और मधुश्री ने दी श्रद्धांजलि
सारांश
Key Takeaways
- आशा भोसले ने भारतीय संगीत को नई पहचान दी।
- उनकी आवाज में अद्वितीयता और ऊर्जा थी।
- कुणाल गांजावाला और मधुश्री ने उन्हें अपनी प्रेरणा बताया।
- आशा जी का निधन एक बड़ा नुकसान है।
- उनकी यादें हमेशा हमारे दिलों में रहेंगी।
मुंबई, 12 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी समेत विभिन्न भाषाओं में अपनी आवाज से करोड़ों लोगों के दिलों में बसे आशा भोसले के निधन से हर कोई दुखी है।
प्लेबैक सिंगर कुणाल गांजावाला, गायिका मधुश्री और संगीतकार शमीर टंडन ने अपनी भावनाएं व्यक्त की हैं।
कुणाल गांजावाला ने कहा, "आशा भोसले को कार्डियक अरेस्ट के बाद अस्पताल में भर्ती किया गया था। उस समय मैंने भगवान से प्रार्थना की थी कि मां (आशा जी) जल्दी ठीक हो जाएं, क्योंकि वह सिर्फ एक सिंगर नहीं, बल्कि भारत का रत्न हैं और वे करोड़ों में एक थीं। उनके बारे में कहने के लिए शब्द भी कम पड़ रहे हैं।"
सिंगर ने बताया, "हमने साथ में दो महीने का टूर किया था और उस दौरान हम हमेशा शो के बाद एक साथ खाना खाते थे। उनसे मैंने बहुत कुछ सीखा है। वे पूरे भारतवासियों के दिलों में हमेशा जीवित रहेंगी।"
कैलाश खेर ने एक मार्मिक वीडियो के जरिए दुख व्यक्त किया है। उनका कहना है कि जैसे किसी के आने का जश्न मनाया जाता है, वैसे ही उनके जाने का भी जश्न मनाना चाहिए। आशा भोसले जैसी शख्सियत ने संगीत को अमर किया है। उन्हें विदाई खुशी के साथ मिलनी चाहिए।
गायिका मधुश्री ने आशा ताई को याद करते हुए कहा, "वे पहली सिंगर थीं, जिनकी आवाज में रोमांटिक और पॉप गाने गाते समय कोई बदलाव नहीं आता था। आमतौर पर अलग-अलग शैलियों के लिए सिंगर अपनी आवाज को बदलते हैं, लेकिन आशा जी के साथ ऐसा नहीं था। हमारे संगीत उद्योग के लिए उनका जाना एक बड़ा नुकसान है क्योंकि वे हमारी प्रेरणा थीं।"
उन्होंने आगे कहा, "आशा जी हम सभी सिंगर्स के लिए एक मिसाल थीं क्योंकि उनमें वह ऊर्जा थी जो हर गाने में जान डाल देती थी।"
संगीतकार शमीर टंडन ने कहा कि आशा जी के लिए उम्र मायने नहीं रखती थी। वे इस उम्र में भी लगातार गा रही थीं और काम कर रही थीं। इस उम्र में लोग कई शारीरिक परेशानियों का सामना करते हैं, लेकिन आशा जी इससे परे थीं। उन्होंने आलिया भट्ट के लिए गाने की इच्छा जताई क्योंकि उन्हें लगता था कि आलिया के चेहरे पर उनकी आवाज फिट बैठेगी। आशा जी हमेशा कहती थीं कि उनकी मृत्यु के बाद रोने के बजाय मुस्कुराना चाहिए। वह एक बहुत उत्साही महिला थीं और 92 वर्ष