14 जुलाई 2026
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क्या अयोध्या में रामपथ पर गूंजा मानस और भक्तिरस का संगम?

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क्या अयोध्या में रामपथ पर गूंजा मानस और भक्तिरस का संगम?

मुख्य बातें

अयोध्या का धार्मिक महत्व रामचरितमानस का पाठ भक्ति और श्रद्धा का संगम संगीतमय प्रस्तुति का आयोजन प्रतिष्ठा द्वादशी का महत्व

अयोध्या, २ जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र द्वारा आयोजित द्वितीय प्रतिष्ठा द्वादशी महोत्सव के पांचवे दिन अयोध्या पूरी तरह से राममय हो गई। श्रीरामचरितमानस के उत्तरकाण्ड का सस्वर, संगीतमय पाठ जैसे-जैसे आगे बढ़ा, वैसे-वैसे रामपथ पर भक्ति, उल्लास और श्रद्धा की अविरल धारा बहती रही।

महोत्सव के पांचवे दिन श्रीरामचरितमानस के उत्तरकाण्ड के आठवें विश्राम के बाद “अवधपुरी अति रुचिर बनाई…” से आगे के प्रसंग का भावपूर्ण पाठ आरंभ हुआ। मानस की चौपाइयों की गूंज ध्वनि विस्तारक यंत्रों से पूरे रामपथ पर फैलती रही, जिसमें उपस्थित मानस प्रेमी श्रोता भी गायक दल के साथ सस्वर सहभागी बने। श्री श्री मां आनंदमयी मानस परिवार, कानपुर द्वारा “सीता राम चरण रति मोरे, अनुदिन बढ़उं अनुग्रह तोरे” संपुट के साथ उत्तरकाण्ड का पाठ किया गया।

कानपुर से आए व्यास योगेश भसीन ने आठवें विश्राम के बाद मानस पाठ का सजीव व भावमय वाचन किया। यजमान और श्रद्धालु पूर्ण भक्तिभाव में डूबकर पाठ में तल्लीन रहे। कार्यक्रम के दौरान मानस का अंतिम श्लोक—“पुण्यं पापहरं सदाशिवकरं विज्ञान भक्तिप्रदमं…”—तक सस्वर परायण ने वातावरण को भाव-विभोर कर दिया। 23 सदस्यों की टीम ने क्रमबद्ध एवं संगीतमय प्रस्तुति दी।

मानस पाठ के उपरांत हनुमान चालीसा का पाठ हुआ, तत्पश्चात श्रीराम लला की आरती “श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन…” तथा अंत में मानस आरतीआरती श्रीरामायण जी की…” सम्पन्न हुई। समापन अवसर पर ट्रस्ट के महासचिव चम्पतराय ने प्रतिष्ठा द्वादशी के महत्व पर प्रकाश डालते हुए श्री श्री मां आनंदमयी मानस परिवार, कानपुर का परायण हेतु आभार प्रकट किया।

इस अवसर पर चम्पतराय एवं गोपाल राव ने मानस परिवार के सदस्यों को सम्मानित किया। कार्यक्रम में मानस प्रेमी श्रोता भी गायक टीम के साथ रामचरितमानस का पाठ करते रहे। ध्वनि विस्तारक यंत्रों से राम पथ पर मानस की चौपाइयाँ गूंजती रहीं। संगीतमय श्री रामचरितमानस पाठ 23 सदस्यों द्वारा क्रमशः प्रस्तुत किया गया। मानस पाठ के बाद हनुमानचालीसा पाठ, श्रीराम लला की आरती "श्रीरामचंद्र कृपालु भजमन हरण भवभय दारुणम," और मानस की आरती "आरती श्रीरामायण जी की…" के बाद विश्राम लिया गया।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ श्रद्धा और भक्ति का संगम होता है। अयोध्या की यह पवित्र भूमि हमेशा से ही आस्था का केंद्र रही है और यहाँ का माहौल भक्तों के लिए विशेष महत्व रखता है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

अयोध्या में प्रतिष्ठा द्वादशी महोत्सव का महत्व क्या है?
प्रतिष्ठा द्वादशी महोत्सव अयोध्या में धार्मिक आस्था और भक्ति का प्रतीक है, जहाँ भक्तजन एकत्र होकर रामचरितमानस का पाठ करते हैं।
इस महोत्सव में कौन-कौन से कार्यक्रम आयोजित होते हैं?
इस महोत्सव में मानस पाठ , हनुमान चालीसा का पाठ, और आरती का आयोजन होता है।
कौन लोग इस कार्यक्रम में शामिल होते हैं?
इस कार्यक्रम में श्रद्धालु, भक्त और विशेष अतिथि शामिल होते हैं।
क्या इस महोत्सव का कोई विशेष संदेश है?
इस महोत्सव का संदेश है भक्ति, एकता, और धार्मिकता का पालन करना।
अयोध्या में और कौन-कौन से धार्मिक कार्यक्रम होते हैं?
अयोध्या में कई धार्मिक कार्यक्रम होते हैं, जैसे रामनवमी , दीपावली , और माघ मेला ।
राष्ट्र प्रेस
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