11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

क्या पीएम मोदी के प्रयासों से असम का बागुरुंबा नृत्य बना वैश्विक पहचान?

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
क्या पीएम मोदी के प्रयासों से असम का बागुरुंबा नृत्य बना वैश्विक पहचान?

सारांश

असम का बागुरुंबा नृत्य अब वैश्विक पहचान बना है। पीएम मोदी के समर्थन से इस नृत्य की गूगल पर खोजें अपने चरम पर पहुँच गई हैं। जानें कैसे यह नृत्य आज अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुंचा है।

मुख्य बातें

बागुरुंबा नृत्य ने वैश्विक पहचान प्राप्त की है।
पीएम मोदी के प्रयासों से इसे सांस्कृतिक मंच मिला है।
गूगल पर सर्च इंटरेस्ट अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है।
10,000 कलाकारों ने इस नृत्य को प्रस्तुत किया।
यह भारत की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर का प्रतीक बन रहा है।

नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लगातार प्रयासों और समर्थन से असम का पारंपरिक 'बागुरुंबा' नृत्य आज एक वैश्विक पहचान की ओर अग्रसर हो चुका है। पिछले दो दशकों में पहली बार, बागुरुंबा नृत्य के लिए गूगल पर वैश्विक सर्च इंटरेस्ट अपने उच्चतम स्तर पर पहुँच गया है। इसके अलावा, इस नृत्य से जुड़े वीडियो को पीएम मोदी के सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर 200 मिलियन (20 करोड़) से अधिक दर्शकों ने देखा है, जो इसे अंतरराष्ट्रीय दर्शकों तक पहुँचाने का एक बड़ा संकेत है।

हाल ही में असम के दौरे के दौरान, पीएम मोदी ने गुवाहाटी के सरुसजाई स्टेडियम में आयोजित बागुरुंबा ढोउ कार्यक्रम में भाग लिया। इस ऐतिहासिक सांस्कृतिक आयोजन में उन्होंने बोडो समुदाय की समृद्ध परंपराओं और विरासत को करीब से देखा और अनुभव किया। उन्होंने कहा कि असम की संस्कृति को देखने और बोडो समाज की परंपराओं को समझने का उन्हें सौभाग्य प्राप्त हुआ है।

पीएम मोदी ने यह भी कहा कि किसी अन्य प्रधानमंत्री की तुलना में, उन्होंने असम का सबसे अधिक दौरा किया है, क्योंकि उनकी हमेशा यह इच्छा रही है कि असम की कला और संस्कृति को राष्ट्रीय और वैश्विक स्तर पर पहचान मिले। उन्होंने कहा कि इसी सोच के तहत भव्य बिहू उत्सव, झुमोइर बिनंदिनी, डेढ़ साल पहले नई दिल्ली में आयोजित भव्य बोडो महोत्सव जैसे सांस्कृतिक कार्यक्रमों को बड़े मंच पर प्रस्तुत किया गया।

प्रधानमंत्री ने कहा कि असम की कला और संस्कृति का आनंद अद्वितीय है और उन्होंने बागुरुंबा ढोउ को बोडो पहचान का जीवंत उत्सव बताते हुए कहा कि यह केवल एक पर्व नहीं, बल्कि महान बोडो परंपरा को सम्मान देने और समाज के महान विभूतियों को स्मरण करने का एक माध्यम है।

बता दें कि बागुरुंबा, जिसे ‘तितली नृत्य’ भी कहा जाता है, असम के सबसे सुंदर और महत्वपूर्ण लोकनृत्यों में से एक है। यह नृत्य प्रकृति के साथ सामंजस्य, शांति, उर्वरता, और आनंद का प्रतीक है और मुख्य रूप से बोडो नववर्ष ब्विसागु पर्व से जुड़ा है। बांसुरीनुमा सिफुंग, खाम ढोल, और सेरजा जैसे पारंपरिक वाद्य इसकी आत्मा हैं।

असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के अनुसार, बागुरुंबा को करीब 10,000 कलाकारों ने एक साथ प्रस्तुत किया था। सांस्कृतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसे आयोजन पारंपरिक कलाओं के संरक्षण, प्रचार, और नई पीढ़ी तक हस्तांतरण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

प्रधानमंत्री मोदी की भागीदारी और समर्थन के कारण बागुरुंबा ढोउ न केवल असम या बोडो समाज तक सीमित रहा है, बल्कि आज यह भारत की सांस्कृतिक सॉफ्ट पावर का प्रतीक बनकर दुनिया भर में पहचान बना रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह भारतीय संस्कृति को भी वैश्विक मंच पर लाने का एक महत्वपूर्ण कदम है।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बागुरुंबा नृत्य क्या है?
बागुरुंबा, जिसे 'तितली नृत्य' भी कहा जाता है, असम का एक पारंपरिक लोकनृत्य है जो बोडो नववर्ष ब्विसागु पर्व से जुड़ा है।
पीएम मोदी ने बागुरुंबा कार्यक्रम में क्या कहा?
पीएम मोदी ने बागुरुंबा ढोउ को बोडो पहचान का जीवंत उत्सव बताया और इसे महान बोडो परंपरा को सम्मान देने का माध्यम बताया।
बागुरुंबा नृत्य के लिए गूगल पर सर्च इंटरेस्ट क्यों बढ़ा?
पीएम मोदी के प्रयासों और बागुरुंबा नृत्य के वीडियो को 200 मिलियन से अधिक दर्शकों ने देखा है, जिससे इसका वैश्विक पहचान में योगदान मिला है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 महीने पहले
  2. 4 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 6 महीने पहले
  6. 7 महीने पहले
  7. 7 महीने पहले
  8. 1 साल पहले