क्या डाक चैनल के माध्यम से निर्यात करने पर एमएसएमई को एक्सपोर्ट बेनिफिट्स मिलेंगे?
सारांश
Key Takeaways
- डाक चैनल से निर्यात पर लाभ मिलेगा।
- 15 जनवरी, 2025 से लाभ लागू होंगे।
- एमएसएमई को प्रतिस्पर्धात्मकता में बढ़ावा मिलेगा।
- डाक घर निर्यात केंद्रों के माध्यम से सुविधा मिलेगी।
- सरकार की पहल से व्यापार को सहारा मिलेगा।
नई दिल्ली, 20 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। डाक के माध्यम से निर्यात करने वाले एमएसएमई उद्योगों के लिए एक महत्वपूर्ण सूचना आई है। सरकार ने डाक चैनल के माध्यम से निर्यात पर निर्यात लाभों को लागू कर दिया है। यह जानकारी संचार मंत्रालय ने मंगलवार को साझा की।
इससे उन छोटे उद्योगों को लाभ मिलेगा, जो डाक चैनलों का उपयोग कर निर्यात करते हैं।
संचार मंत्रालय ने कहा, "डाक विभाग (डीओपी) ने केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर और सीमा शुल्क बोर्ड (सीबीआईसी) की अधिसूचनाओं के अनुसार डाक चैनल के माध्यम से किए गए निर्यातों के लिए शुल्क वापसी, निर्यात उत्पादों पर शुल्क और करों में छूट (आरओडीटीईपी) तथा राज्य और केंद्रीय करों एवं शुल्कों पर छूट (आरओएससीटीएल) जैसे निर्यात लाभों को 15 जनवरी, 2025 से लागू कर दिया है।"
सरकार के अनुसार, यह पहल निर्यात तक पहुंच को सरल और व्यापक बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है, खासकर सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यमों (एमएसएमई), कारीगरों, स्टार्टअप और छोटे निर्यातकों के लिए जो कम और मध्यम मूल्य के अंतरराष्ट्रीय शिपमेंट के लिए डाक नेटवर्क पर निर्भर हैं। स्वचालित आईजीएसटी रिफंड के चलते, डाक चैनल के माध्यम से निर्यात प्रोत्साहन की उपलब्धता लागत को और कम करती है, तरलता में सुधार करती है और भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाती है।
मंत्रालय ने बताया कि डाक चैनल के माध्यम से निर्यात को डाक विभाग और सीबीईसी की एक संयुक्त पहल डाक घर निर्यात केंद्र (डीएनके) के माध्यम से सुगम बनाया जाता है, जो एक ही छत के नीचे शुरू से अंत तक निर्यात सुविधा प्रदान करते हैं। वर्तमान में, देश भर में 1,013 डीएनके संचालित हैं, जो दूरदराज और वंचित क्षेत्रों से निर्यातकों को बुकिंग, डिजिटल दस्तावेजीकरण और निर्बाध सीमा शुल्क निकासी के माध्यम से वैश्विक बाजारों तक पहुंच प्रदान करते हैं।