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क्या बंगाल एसआईआर पर बीएलए को शामिल करने की मांग खारिज करना सही है?

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क्या बंगाल एसआईआर पर बीएलए को शामिल करने की मांग खारिज करना सही है?

सारांश

क्या तृणमूल कांग्रेस की बीएलए को सुनवाई में शामिल करने की मांग को ईसीआई द्वारा खारिज करना उचित था? जानें इस विवाद का विस्तार और इसके चुनावी प्रभाव।

मुख्य बातें

सुनवाई में बीएलए को शामिल करने की मांग खारिज हुई।
ईसीआई ने व्यावहारिकता को प्राथमिकता दी।
राजनीतिक दलों के लिए समान अवसर आवश्यक है।
मतदाता सूची का प्रकाशन महत्वपूर्ण है।
चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता होनी चाहिए।

कोलकाता, 2 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के मसौदे पर दावों और आपत्तियों से संबंधित सुनवाई में तृणमूल कांग्रेस की बूथ-स्तरीय एजेंटों (बीएलए) को शामिल करने की मांग को खारिज करने पर भारत निर्वाचन आयोग (ईसीआई) ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। जानकारी के अनुसार, यह सुनवाई सत्र राज्य में तीन चरणों वाले स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (एसआईआर) के दूसरे चरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

मुख्य चुनाव अधिकारी (सीईओ) कार्यालय के एक सूत्र ने बताया कि यदि सुनवाई सत्र में बीएलए को शामिल करने की तृणमूल कांग्रेस की मांग स्वीकार कर ली जाती है, तो ईसीआई को राज्य की अन्य रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टियों, छह राष्ट्रीय पार्टियों और दो राज्य पार्टियों की ऐसी ही मांगों को भी स्वीकार करना पड़ेगा। इस स्थिति में हर सुनवाई में कुल 11 व्यक्ति उपस्थित रहेंगे, जिसमें एक इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ईआरओ), एक असिस्टेंट इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (एईआरओ), एक माइक्रो-ऑब्जर्वर और राजनीतिक पार्टियों के आठ बीएलओ शामिल होंगे।

सीईओ कार्यालय के सूत्र ने स्पष्ट किया, "यदि इतनी बड़ी संख्या में लोग एक ही सुनवाई में मौजूद रहने की अनुमति दी जाती है, तो चुनाव अधिकारियों के लिए इस प्रक्रिया को संचालित करना लगभग असंभव हो जाएगा। इसलिए, सभी व्यावहारिक कारणों से बीएलए को उपस्थित रहने की अनुमति देना संभव नहीं है।"

तृणमूल कांग्रेस और ऑल इंडिया फॉरवर्ड ब्लॉक पश्चिम बंगाल की उन दो राज्य पार्टियों में हैं, जो ईसीआई में रजिस्टर्ड हैं, जबकि छह राष्ट्रीय पार्टियों में भाजपा, कांग्रेस, सीपीआईएम, आम आदमी पार्टी, बहुजन समाज पार्टी और नेशनल पीपल्स पार्टी शामिल हैं।

हालांकि, तृणमूल कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि ईसीआई ने जानबूझकर उनकी याचिका को खारिज किया है, क्योंकि उसे पता है कि राज्य की अन्य रजिस्टर्ड राजनीतिक पार्टियों, विशेषकर भाजपा के पास सभी सुनवाई में बीएलए उतारने की क्षमता नहीं है।

सीईओ कार्यालय के सूत्रों का कहना है कि ईसीआई को विभिन्न पार्टियों के बीएलए की संख्या के मामले में संभावनाओं का अनुमान नहीं लगाना चाहिए। सूत्रों ने कहा, "आयोग को सभी राजनीतिक पार्टियों के लिए समान नियम लागू करने थे, और ये नियम व्यावहारिकता के आधार पर बनाए गए हैं। इसलिए, सुनवाई सत्र में बीएलए को अनुमित न देने का एक जैसा नियम सभी पर लागू होता है।"

ड्राफ्ट मतदाता सूची 16 दिसंबर को प्रकाशित की गई थी। अंतिम मतदाता सूची 14 फरवरी को जारी की जाएगी। इसके तुरंत बाद, ईसीआई इस वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों की मतदान तिथियों की घोषणा करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन राजनीतिक दलों के लिए इसे चुनौतीपूर्ण बना सकता है। सभी रजिस्टर्ड पार्टियों को समान अवसर मिलना चाहिए, लेकिन बीएलए जैसे मुद्दे चुनावी प्रक्रिया को जटिल बना सकते हैं।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

क्या बीएलए को सुनवाई में शामिल करने की मांग खारिज करना सही है?
यह निर्णय चुनाव प्रक्रिया की व्यावहारिकता को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
क्या ईसीआई ने जानबूझकर तृणमूल कांग्रेस की मांग को खारिज किया?
तृणमूल कांग्रेस का दावा है कि ईसीआई ने जानबूझकर उनकी मांग को खारिज किया है।
राष्ट्र प्रेस
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