पश्चिम मेदिनीपुर के बेल्डा में रेलवे लाइन-हाईवे के बीच अज्ञात शव, हत्या की आशंका — पुलिस जांच जारी
सारांश
मुख्य बातें
पश्चिम बंगाल के पश्चिम मेदिनीपुर जिले के बेल्डा थाना क्षेत्र के रानीसराई इलाके में बुधवार, 26 अगस्त को रेलवे लाइन और नेशनल हाईवे के बीच एक अज्ञात व्यक्ति का शव मिलने से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। पुलिस और स्थानीय निवासियों को कथित तौर पर संदेह है कि हत्या करने के बाद शव को यहाँ फेंका गया है।
मुख्य घटनाक्रम
सूचना मिलते ही रेलवे पुलिस और बेल्डा पुलिस स्टेशन की टीमें तत्काल मौके पर पहुँचीं। जिस स्थान पर शव मिला, उसे चिह्नित कर घेर लिया गया है। खड़गपुर के एसडीपीओ (आईपीएस) सिद्धार्थ सिंह डांगी भी घटनास्थल पर पहुँचे और जांच की निगरानी की। अधिकारियों के अनुसार, मृतक की पहचान अभी तक स्थापित नहीं हो पाई है और पुलिस इस दिशा में प्रयासरत है।
फोरेंसिक जांच और साक्ष्य संग्रह
फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल पर पहुँचकर आवश्यक नमूने एकत्र किए। पुलिस डॉग स्क्वॉड की मदद से भी साक्ष्य तलाशे जा रहे हैं। स्थानीय निवासियों से पूछताछ कर संभावित सुराग जुटाने की कोशिश जारी है। गौरतलब है कि शव की अवस्था और उसके मिलने का स्थान — रेलवे लाइन और राजमार्ग के बीच — मामले को संदिग्ध बनाता है।
झारखंड में भी हत्या की घटना
इसी दिन झारखंड के हजारीबाग जिले के कटकमसांडी थाना क्षेत्र के लुपुंग गाँव से एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई। पारिवारिक विवाद के दौरान आरोपी आकाश कुमार ने अपने छह माह के बेटे अंश कुमार को घर के पीछे बने कुएं के पास पक्के फर्श पर पटक दिया। पुलिस के अनुसार, सास-बहू के झगड़े से उत्तेजित होकर आकाश ने यह कृत्य किया।
सिर पर गंभीर चोट लगने से बच्चा लहूलुहान हो गया। आरोप है कि आरोपी ने बच्चे की माँ निराली कुमारी की अस्पताल ले जाने की गुहार को भी नकार दिया। माँ स्वयं बच्चे को हजारीबाग स्थित शेख भिखारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल ले गई, जहाँ से डॉक्टरों ने गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे रिम्स, रांची रेफर कर दिया। दुर्भाग्यवश, रांची ले जाने के दौरान रास्ते में ही मासूम ने दम तोड़ दिया। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए आरोपी पिता को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया।
आगे की जांच
बेल्डा मामले में पुलिस शव की पहचान, मौत का कारण और संभावित संदिग्धों की तलाश में जुटी है। फोरेंसिक रिपोर्ट आने के बाद मामले की दिशा स्पष्ट होने की उम्मीद है। यह ऐसे समय में आया है जब पश्चिम बंगाल में कानून-व्यवस्था की स्थिति पहले से ही राजनीतिक बहस का विषय बनी हुई है।