क्या मुंबई ने साहित्यकार भगवती चरण वर्मा को रोक लिया था? जानिए पूरी कहानी

Click to start listening
क्या मुंबई ने साहित्यकार भगवती चरण वर्मा को रोक लिया था? जानिए पूरी कहानी

सारांश

भगवती चरण वर्मा, हिंदी साहित्य के महान रचनाकार, के जीवन में एक महत्वपूर्ण मोड़ आया जब मुंबई ने उन्हें अपने पास रोक लिया। जानिए कैसे उनका साहित्य, समाज और सिनेमा से गहरा संबंध बना।

Key Takeaways

  • भगवती चरण वर्मा का जीवन साहित्य, समाज और सिनेमा का संगम है।
  • उन्हें कई महत्वपूर्ण पुरस्कार मिले हैं, जैसे कि साहित्य अकादमी पुरस्कार
  • उनके उपन्यासों में सामाजिक मुद्दों का चित्रण मिलता है।
  • मुंबई ने उनके जीवन में एक नया मोड़ लाया।
  • उनका योगदान हिंदी साहित्य में अमिट है।

नई दिल्ली, 29 अगस्त (राष्ट्र प्रेस)। हिंदी साहित्य के महान रचनाकार भगवती चरण वर्मा को हम उपन्यासों, कहानियों और कविताओं के लिए जानते हैं, लेकिन उनका जीवन केवल साहित्य तक सीमित नहीं रहा। उनके जीवन में कई ऐसे मोड़ आए, जब वे साहित्य, समाज और सिनेमा की गलियों में घूमते नजर आए। इनमें से एक महत्वपूर्ण परिवर्तन उनके जीवन में सपनों की नगरी मुंबई ने किया।

भगवती चरण वर्मा एक समय के प्रसिद्ध कवि थे। इसके अलावा, उपन्यासकार और कहानीकार के रूप में भी उन्हें पहचान मिली। उनके उपन्यासों में समाज का सजीव चित्रण देखने को मिलता है। साहित्य में कई कलाकार आते हैं, जिनमें से कुछ समय के साथ भुला दिए जाते हैं। लेकिन कुछ व्यक्तित्व ऐसे होते हैं, जिनकी प्रतिभा का प्रकाश पूरे साहित्य जगत को आलोकित कर देता है। बहुमुखी प्रतिभा के धनी, सहज कवि और उपन्यासकार भगवती चरण वर्मा का व्यक्तित्व ऐसा ही था।

1903 का हिंदुस्तान अंग्रेजों की गुलामी में जकड़ा हुआ था। उसी समय, 30 अगस्त को उत्तर प्रदेश के उन्नाव में बाबू देवीचरण वर्मा के घर भगवती चरण वर्मा का जन्म हुआ। छोटी उम्र से ही उन्हें कविता लिखने का शौक था। स्कूली शिक्षा के दौरान उनके लेख कुछ पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगे। 15 साल की उम्र में वे कानपुर के एक विशिष्ट साहित्यिक समूह के सदस्य बने, जहां कुछ कहानीकारों और कवियों से उनके संपर्क बने।

1926 में इलाहाबाद से एलएलबी की डिग्री ली और वकालत को चुना, लेकिन करियर सफल नहीं रहा। हालांकि, वकालत के समय ही, उन्हें लेखन की ओर एक नई राह मिली। उन्होंने कवि के रूप में साहित्यिक जीवन का आरंभ किया, फिर भी वे कवि की तुलना में कहानीकार और उपन्यासकार के रूप में अधिक प्रसिद्ध हुए।

'हम तो जहां पहुंचते हैं, बैठ जाते हैं', भगवती चरण वर्मा इन्हीं शब्दों को अपने जीवन में उतारकर आगे बढ़े और फिल्मों की ओर रुझान बढ़ाया। उनके बेहद चर्चित उपन्यास 'चित्रलेखा' पर फिल्में बनीं। फिल्म जगत में अपने जीवन की शुरुआत के बारे में भगवती चरण वर्मा ने प्रसार भारती को दिए एक इंटरव्यू में विस्तार से जानकारी दी थी।

एक मित्र के माध्यम से भगवती चरण वर्मा को बॉम्बे टॉकीज का एक निमंत्रण मिला, जो नौकरी की गारंटी देता था। इस निमंत्रण के चलते वे वहां गए। हालांकि, उस समय कोलकाता में एक घटना हुई, जिससे स्थिति बिगड़ गई। इसके कारण भगवती चरण वर्मा ने मुंबई में बसने का निर्णय लिया।

मुंबई में रहने के लिए उन्हें काम की आवश्यकता थी। उन्होंने एक स्थान पर पहुंचकर काम शुरू किया और सफलता भी प्राप्त की। इस बारे में भी उन्होंने इंटरव्यू में जानकारी दी।

कहा जाता है कि भगवती चरण वर्मा ही थे, जिन्होंने यूसुफ खान को दिलीप कुमार नाम दिया था। उनकी पहली फिल्म 'ज्वार भाटा' थी, जिसमें उन्होंने पटकथा लिखी थी। उसी फिल्म में नायक की भूमिका में दिलीप कुमार थे।

उपन्यासकार के रूप में भगवती चरण वर्मा ने कई सशक्त और चर्चित उपन्यासों की रचना की। इनमें 'चित्रलेखा' के अलावा 'टेढ़े-मेढ़े रास्ते', 'आखिरी दांव', 'अपने खिलौने' और 'भूले-बिसरे चित्र' शामिल हैं, जिन्हें हिंदी उपन्यास परंपरा में सम्मानित किया गया है।

उपन्यास 'भूले-बिसरे चित्र' के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार प्रदान किया गया, जो भारतीय साहित्य का एक महत्वपूर्ण सम्मान है। भारत सरकार ने भी उन्हें पद्म भूषण से सम्मानित किया था।

Point of View

NationPress
30/08/2025

Frequently Asked Questions

भगवती चरण वर्मा का जन्म कब और कहाँ हुआ?
भगवती चरण वर्मा का जन्म 30 अगस्त, 1903 को उत्तर प्रदेश के उन्नाव में हुआ।
भगवती चरण वर्मा के प्रमुख उपन्यास कौन से हैं?
उनके प्रमुख उपन्यासों में 'चित्रलेखा', 'टेढ़े-मेढ़े रास्ते', 'आखिरी दांव', 'अपने खिलौने', और 'भूले-बिसरे चित्र' शामिल हैं।
भगवती चरण वर्मा को कौन-कौन से पुरस्कार मिले?
उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार और भारतीय सरकार द्वारा पद्म भूषण से सम्मानित किया गया।
भगवती चरण वर्मा का फिल्म इंडस्ट्री में योगदान क्या था?
उन्होंने 'ज्वार भाटा' फिल्म की पटकथा लिखी और दिलीप कुमार को एक नया नाम दिया।
मुंबई में रहने का निर्णय क्यों लिया?
कोलकाता में एक घटना के बाद उन्होंने मुंबई में बसने का निर्णय लिया।