क्या इंडिया-ईयू ट्रेड डील भारत के वैश्विक व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है?

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क्या इंडिया-ईयू ट्रेड डील भारत के वैश्विक व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है?

सारांश

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते की घोषणा ने भारतीय व्यापार को नया आयाम दिया है। यह समझौता न केवल आर्थिक विकास के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि भारत की वैश्विक व्यापार नीति में एक नया मोड़ भी लाएगा। जानिए इस ऐतिहासिक समझौते की सभी महत्वपूर्ण जानकारियाँ और इसके प्रभाव।

Key Takeaways

  • भारत-यूरोपीय संघ एफटीए एक ऐतिहासिक उपलब्धि है।
  • यह समझौता आत्मनिर्भर भारत के मिशन को मजबूत करेगा।
  • भारत और यूरोपीय संघ के बीच व्यापार में वृद्धि होगी।
  • यह समझौता आर्थिक स्थिरता को बढ़ावा देगा।
  • भारत और यूरोपीय संघ के बीच सहयोग को बढ़ाएगा।

नई दिल्ली, 27 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने यूरोपीय नेताओं की भारत यात्रा के दौरान आयोजित 16वें भारत-यूरोपीय संघ सम्मेलन में संयुक्त रूप से भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते (भारत-यूरोपीय संघ एफटीए) को संपन्न करने की घोषणा की है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए प्रधानमंत्री मोदी को धन्यवाद और भारत की जनता को बधाई दी है।

केंद्रीय मंत्री अमित शाह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा कि भारत-यूरोपीय व्यापार समझौता भारत के वैश्विक व्यापार संबंधों में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक उपलब्धि है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की वैश्विक मंच पर दूरदर्शी कूटनीति का उदाहरण प्रस्तुत करते हुए, यह समझौता पारस्परिक लाभ और संतुलित साझेदारी को सुनिश्चित करते हुए, सभी पक्षों के लिए लाभकारी समझौतों के माध्यम से भारत के 'आत्मनिर्भर भारत' के मिशन को और मजबूत करता है।

इस ऐतिहासिक उपलब्धि के लिए मोदी जी को हार्दिक धन्यवाद और भारत की जनता को बधाई।

बता दें कि यह मुक्त व्यापार समझौता भारत और यूरोपीय संघ को खुले बाजारों, पूर्वानुमान पर आधारित और समावेशी विकास के लिए प्रतिबद्ध विश्वसनीय भागीदारों के रूप में स्थापित करता है।

यह मुक्त व्यापार समझौता 2022 में वार्ता को पुनः शुरू किए जाने के बाद से हुई गहन चर्चा के परिणामस्वरूप संपन्न हुआ है। एफटीए की घोषणा आज भारत और यूरोपीय संघ के बीच वर्षों की निरंतर बातचीत और सहयोग की परिणति का प्रतीक है जो एक संतुलित, आधुनिक और नियम-आधारित आर्थिक और व्यापार साझेदारी प्रदान करने के लिए राजनीतिक इच्छाशक्ति और साझा दृष्टिकोण को प्रदर्शित करती है।

यूरोपीय संघ भारत के सबसे बड़े व्यापारिक भागीदारों में से एक है, जिसमें वस्तुओं और सेवाओं में द्विपक्षीय व्यापार पिछले कुछ वर्षों में लगातार बढ़ रहा है। 2024-25 में यूरोपीय संघ के साथ वस्तुओं में भारत का द्विपक्षीय व्यापार 11.5 लाख करोड़ रुपए (136.54 बिलियन अमेरिकी डॉलर) था, जिसमें 6.4 लाख करोड़ रुपए (75.85 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का निर्यात और 5.1 लाख करोड़ रुपए (60.68 बिलियन अमेरिकी डॉलर) का आयात किया जा रहा था। सेवा क्षेत्र में भारत-यूरोपीय संघ का व्यापार 2024 में 7.2 लाख करोड़ रुपए (83.10 बिलियन अमेरिकी डॉलर) तक पहुंच गया।

भारत और यूरोपीय संघ चौथी और दूसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाएं हैं, जो वैश्विक सकल घरेलू उत्पाद के 25 प्रतिशत के बराबर हैं और वैश्विक व्यापार का एक तिहाई हिस्सा हैं। इस प्रकार, दो बड़ी, विविध और एक-दूसरे की संपूरक अर्थव्यवस्थाओं के एक साथ जुड़ने से व्यापार और निवेश के अभूतपूर्व अवसर पैदा होंगे।

Point of View

यह समझना आवश्यक है कि भारत-यूरोपीय संघ का यह समझौता सिर्फ आर्थिक पहलू पर ही नहीं, बल्कि राजनीतिक और रणनीतिक दृष्टिकोण से भी महत्वपूर्ण है। यह भारत के लिए एक बड़ा अवसर है, जिससे देश की आर्थिक स्थिति को मजबूत करने में मदद मिलेगी। हमें इस समझौते का समर्थन करना चाहिए, क्योंकि यह भारत की वैश्विक स्थिति को और मजबूत करेगा।
NationPress
09/02/2026

Frequently Asked Questions

भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते का क्या महत्व है?
यह समझौता भारत को वैश्विक व्यापार में अपने पैर जमाने का मजबूत आधार प्रदान करेगा और आर्थिक संबंधों को और मजबूत करेगा।
यह समझौता कब संपन्न हुआ?
यह समझौता 27 जनवरी 2024 को संपन्न हुआ।
इस समझौते से भारत को क्या लाभ होगा?
यह समझौता भारत के निर्यात को बढ़ाने, नए बाजारों में प्रवेश करने और विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद करेगा।
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