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क्या भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र वित्त वर्ष 2026 तक 535 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा?

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क्या भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र वित्त वर्ष 2026 तक 535 अरब डॉलर तक पहुंच जाएगा?

सारांश

भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र तेजी से बढ़ रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार, 535 अरब डॉलर तक पहुँचने की संभावना है। जानें कैसे सरकारी पहलें और तकनीकी प्रगति इस क्षेत्र को आगे बढ़ा रही हैं।

मुख्य बातें

भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र 535 अरब डॉलर तक पहुँचने की संभावना है।
सरकारी पहलें जैसे मेक इन इंडिया इस क्षेत्र को बढ़ावा दे रही हैं।
जैविक खाद्य बाजार 2033 तक 10.8 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
यह क्षेत्र 70 लाख से ज़्यादा रोज़गार प्रदान करता है।
नवाचार को बढ़ावा देने के लिए 'भारती' पहल की घोषणा की गई है।

नई दिल्ली, 6 सितंबर (राष्ट्र प्रेस)। भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र वित्त वर्ष 2026 तक 535 अरब डॉलर तक पहुँचने की संभावना है, जो मुख्यतः बढ़ती खपत और बढ़े हुए निर्यात के कारण है।

इंफॉर्मा मार्केट्स द्वारा आयोजित कार्यक्रम में उद्योग विशेषज्ञों ने कहा कि 'मेक इन इंडिया' जैसी सरकारी पहलों का समर्थन और एआई-संचालित स्वचालन तथा स्मार्ट पैकेजिंग में तकनीकी प्रगति इस उद्योग की वृद्धि के प्रमुख कारक हैं।

भारत का जैविक खाद्य बाजार - जिसका वर्तमान मूल्य 1.9 अरब डॉलर है - 2033 तक 20.13 प्रतिशत की चक्रवृद्धि वार्षिक वृद्धि दर (सीएजीआर) से बढ़कर 10.8 अरब डॉलर तक पहुंचने का अनुमान है। इस बीच, खाद्य सामग्री खंड सालाना 7-8 प्रतिशत की दर से बढ़ रहा है।

विशेषज्ञों का कहना है कि ये रुझान भारत को खाद्य और पैकेजिंग सामग्री का वैश्विक केंद्र बनने की दिशा में अग्रसर करते हैं।

वैज्ञानिक एवं औद्योगिक अनुसंधान परिषद (सीएसआईआर) की मुख्य वैज्ञानिक डॉ. मीनाक्षी सिंह ने कहा कि 'खाद्य सामग्री खाद्य क्षेत्र की रीढ़ हैं, और पैकेजिंग सुरक्षा और गुणवत्ता सुनिश्चित करने में समान रूप से महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।'

इस तीन दिवसीय कार्यक्रम में भारत और विदेश से 350 से अधिक प्रदर्शकों ने भाग लिया और 50 देशों के 15,000 से अधिक पेशेवरों ने हिस्सा लिया।

इंफॉर्मा मार्केट्स इन इंडिया के प्रबंध निदेशक योगेश मुद्रास ने कहा, 'भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र एक परिवर्तनकारी दौर से गुजर रहा है, जो स्वास्थ्य के प्रति बढ़ती जागरूकता, जैविक और पादप-आधारित खाद्य पदार्थों के प्रति बढ़ती रुचि और आहार संबंधी पैटर्न में उल्लेखनीय बदलाव के कारण प्रेरित है।'

उन्होंने आगे कहा कि 2025 तक जैविक खाद्य बाजार 75,000 करोड़ रुपये तक पहुँचने का अनुमान है, क्योंकि उपभोक्ता स्वास्थ्यवर्धक विकल्पों के लिए अधिक भुगतान करने की बढ़ती इच्छा दिखा रहे हैं।

भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र विनिर्माण उत्पादन में 7.7 प्रतिशत का योगदान देता है और 70 लाख से ज़्यादा रोज़गार प्रदान करता है।

कार्यक्रम में विशेषज्ञों ने कहा कि एफएसएसएआई 2025 में सख्त लेबलिंग, जैविक खाद्य मानकों और उपभोक्ता जागरूकता पर जोर देगा, जिससे उद्योग की कार्यप्रणाली में बदलाव आएगा।

सरकार ने 100 कृषि-खाद्य स्टार्टअप्स को सशक्त बनाने, नवाचार को बढ़ावा देने और 2030 तक 50 अरब डॉलर के लक्ष्य की ओर निर्यात को बढ़ावा देने के लिए 'भारती' नामक एक नई पहल की घोषणा की है।

संपादकीय दृष्टिकोण

मेरा मानना है कि भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र न केवल आर्थिक विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है, बल्कि यह रोजगार के अवसर भी पैदा कर रहा है। यह क्षेत्र वैश्विक मानकों के अनुरूप उभर रहा है, जिसके चलते हमें इसे और मजबूत करने की आवश्यकता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र कब तक बढ़ेगा?
भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र वित्त वर्ष 2026 तक 535 अरब डॉलर तक पहुँचने की आशा है।
इस क्षेत्र में तकनीकी प्रगति का क्या महत्व है?
तकनीकी प्रगति जैसे एआई-संचालित स्वचालन और स्मार्ट पैकेजिंग खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र की वृद्धि में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
जैविक खाद्य बाजार का भविष्य क्या है?
जैविक खाद्य बाजार 2033 तक 10.8 अरब डॉलर तक पहुँचने का अनुमान है।
सरकार की नई पहल 'भारती' का उद्देश्य क्या है?
'भारती' पहल का उद्देश्य 100 कृषि-खाद्य स्टार्टअप्स को सशक्त बनाना और 2030 तक 50 अरब डॉलर के निर्यात को बढ़ावा देना है।
इस क्षेत्र में रोजगार का कितना योगदान है?
भारत का खाद्य प्रसंस्करण क्षेत्र 70 लाख से ज़्यादा रोज़गार प्रदान करता है।
राष्ट्र प्रेस
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