16 सितंबर 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

भारत टैक्सी का विस्तार: योगी सरकार लखनऊ-कानपुर मॉडल को UP के सभी 75 जिलों और गाँवों तक पहुँचाएगी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
भारत टैक्सी का विस्तार: योगी सरकार लखनऊ-कानपुर मॉडल को UP के सभी 75 जिलों और गाँवों तक पहुँचाएगी

सारांश

लखनऊ और कानपुर में चल रहा 'भारत टैक्सी' मॉडल अब UP के सभी 75 जिलों और PACS के जरिये गाँवों तक पहुँचेगा। जीरो कमीशन और नो-सर्ज किराये का यह सहकारी मॉडल यात्रियों को राहत और चालकों को कारोबार में हिस्सेदारी देने का वादा करता है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर 'भारत टैक्सी' सहकारी परिवहन मॉडल को उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों तक विस्तारित करने की योजना है।
अभी यह सेवा लखनऊ और कानपुर में सक्रिय है; इसमें बाइक, ऑटो और कैब तीनों श्रेणियाँ उपलब्ध हैं।
यात्रियों के लिए जीरो कमीशन और नो-सर्ज प्राइसिंग — यानी पीक आवर्स में भी किराया स्थिर रहेगा।
टैक्सी चालकों को सहकारी व्यवस्था के तहत कारोबार में हिस्सेदार बनाया जाएगा, न कि केवल सेवा-प्रदाता।
प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के नेटवर्क से सेवा को ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाने और स्थानीय स्वरोजगार के अवसर विकसित करने की योजना है।

उत्तर प्रदेश सरकार ने लखनऊ और कानपुर में सफलतापूर्वक संचालित 'भारत टैक्सी' सहकारी परिवहन मॉडल को प्रदेश के सभी 75 जिलों तक विस्तारित करने की योजना बनाई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर तैयार इस पहल का लक्ष्य यात्रियों को जीरो कमीशन और नो-सर्ज प्राइसिंग का विकल्प देना है, साथ ही टैक्सी चालकों को कारोबार में हिस्सेदार बनाना है। प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के नेटवर्क के माध्यम से इस सेवा को शहरों से ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँचाने की भी रणनीति तैयार की गई है।

भारत टैक्सी मॉडल क्या है

'भारत टैक्सी' एक सहकारी आधारित परिवहन सेवा है जो अभी लखनऊ और कानपुर में सक्रिय है। इस मॉडल में यात्रियों के लिए बाइक, ऑटो और कैब तीनों श्रेणियों में सेवाएँ उपलब्ध हैं। निजी राइड-हेलिंग प्लेटफार्मों के विपरीत, इस मॉडल में प्रति-यात्रा कमीशन काटने की व्यवस्था नहीं है और पीक डिमांड पर किराये में अचानक वृद्धि भी नहीं होती।

अधिकारियों के अनुसार, जीरो कमीशन ढाँचे में चालक सीधे सहकारी व्यवस्था से जुड़ता है और उसे व्यवसाय में हिस्सेदार बनाया जाता है — केवल सेवा-प्रदाता नहीं। यह अवधारणा चालकों की आय स्थिरता और दीर्घकालिक जुड़ाव के लिहाज से महत्वपूर्ण है।

75 जिलों तक विस्तार की योजना

योगी सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि लखनऊ से शुरू हुए इस मॉडल को अब प्रदेश के सभी 75 जिलों तक पहुँचाने की तैयारी है। इसका सीधा अर्थ है कि टैक्सी सेवा राजधानी या बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि जिला मुख्यालयों और उससे भी आगे पहुँचेगी। छोटे शहरों में रहने वाले नागरिकों को संगठित टैक्सी सेवा का एक अतिरिक्त और किफायती विकल्प मिलेगा।

यह पहल ऐसे समय में महत्वपूर्ण मानी जा रही है जब रेलवे स्टेशन, बस अड्डे, हवाई अड्डे, अस्पताल और बाजार तक पहुँचने के लिए जिला स्तर पर स्थानीय परिवहन विकल्पों की भारी कमी है।

नो-सर्ज प्राइसिंग: आम यात्री के लिए राहत

इस मॉडल का सबसे चर्चित पहलू नो-सर्ज प्राइसिंग है। निजी प्लेटफार्मों पर पीक आवर्स में किराया कई गुना बढ़ जाता है, जिससे यात्रियों के बजट पर सीधा असर पड़ता है। भारत टैक्सी में ऐसी कोई व्यवस्था नहीं होगी — यानी भीड़-भाड़ के समय भी किराया स्थिर रहेगा।

यह विशेष रूप से उन यात्रियों के लिए उपयोगी होगा जिन्हें जरूरी काम — जैसे अस्पताल या रेलवे स्टेशन — के लिए पीक समय में यात्रा करनी पड़ती है।

PACS के जरिये ग्रामीण क्षेत्रों तक पहुँच

प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के नेटवर्क को माध्यम बनाकर इस परिवहन मॉडल को गाँवों तक पहुँचाने की योजना है। ग्रामीण इलाकों में जहाँ कैब और टैक्सी के विकल्प अत्यंत सीमित हैं, वहाँ यह व्यवस्था स्थानीय परिवहन का नया ज़रिया बन सकती है।

इसके साथ ही, ग्रामीण स्तर पर वाहन संचालन से जुड़े स्वरोजगार के अवसर भी उत्पन्न होंगे। सहकारी संस्थाओं के व्यापक नेटवर्क से परिवहन सेवा को जोड़कर सरकार ग्रामीण कनेक्टिविटी और आजीविका दोनों को साधना चाहती है।

आगे क्या होगा

अधिकारियों के अनुसार, योगी सरकार जल्द ही इस विस्तार की औपचारिक घोषणा करेगी। राजधानी लखनऊ से लेकर छोटे जिलों और ग्रामीण क्षेत्रों तक सेवा का दायरा बढ़ाने की समयसीमा अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। यह मॉडल यदि प्रदेश-व्यापी पैमाने पर सफल रहा, तो यह राज्य में सहकारी परिवहन की एक नई मिसाल बन सकता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

वे परिवहन संचालन की जटिलताओं को कितनी कुशलता से संभाल पाएँगी, यह देखना होगा। गौरतलब है कि देश में इससे पहले भी कई राज्यों ने सरकारी या सहकारी टैक्सी योजनाएँ शुरू कीं, जो शुरुआती उत्साह के बाद रखरखाव और प्रबंधन की चुनौतियों में फँस गईं। 75 जिलों का लक्ष्य महत्वाकांक्षी है, पर विस्तार की समयसीमा और वित्त-पोषण का ब्यौरा अभी सार्वजनिक न होना इस योजना के आकलन को अधूरा रखता है।
RashtraPress
16 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'भारत टैक्सी' मॉडल क्या है और यह कहाँ चल रहा है?
'भारत टैक्सी' उत्तर प्रदेश सरकार की एक सहकारी परिवहन सेवा है जो अभी लखनऊ और कानपुर में सक्रिय है। इसमें बाइक, ऑटो और कैब तीनों तरह की सुविधाएँ मिलती हैं और यात्रियों से कोई सर्ज चार्ज नहीं लिया जाता।
भारत टैक्सी को सभी 75 जिलों तक कब तक पहुँचाया जाएगा?
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर इस विस्तार की तैयारी है, लेकिन अभी तक सरकार ने इसकी कोई निश्चित समयसीमा सार्वजनिक नहीं की है। अधिकारियों के अनुसार जल्द ही औपचारिक घोषणा की जाएगी।
नो-सर्ज प्राइसिंग का यात्रियों को क्या फायदा होगा?
नो-सर्ज प्राइसिंग का अर्थ है कि पीक डिमांड या व्यस्त समय में भी किराये में अचानक वृद्धि नहीं होगी। यह उन यात्रियों के लिए विशेष रूप से फायदेमंद है जिन्हें अस्पताल, रेलवे स्टेशन या बस अड्डे जाने के लिए जरूरी समय में यात्रा करनी पड़ती है।
भारत टैक्सी में चालकों को क्या विशेष सुविधा मिलेगी?
जीरो कमीशन मॉडल के तहत चालकों की कमाई से प्रति-यात्रा प्लेटफार्म कमीशन नहीं काटा जाएगा। सहकारी व्यवस्था के जरिये उन्हें कारोबार में हिस्सेदार बनाया जाएगा, जिससे उनकी आय अधिक स्थिर और टिकाऊ होगी।
PACS के जरिये गाँवों तक सेवा कैसे पहुँचेगी?
प्राथमिक कृषि ऋण समितियों (PACS) के मौजूदा नेटवर्क को माध्यम बनाकर भारत टैक्सी को ग्रामीण क्षेत्रों तक विस्तारित करने की योजना है। इससे ग्रामीणों को अस्पताल, बाजार या जिला मुख्यालय तक पहुँचने के लिए स्थानीय परिवहन का एक नया विकल्प मिलेगा और स्थानीय स्वरोजगार के अवसर भी बनेंगे।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 1 घंटा पहले
  2. 2 महीने पहले
  3. 4 महीने पहले
  4. 6 महीने पहले
  5. 8 महीने पहले
  6. 11 महीने पहले
  7. 1 साल पहले
  8. 1 साल पहले