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मुंबई 3.0 परियोजना के लिए एमएमआरडीए ने लॉन्च किया भारत का अनोखा सहभागी भूमि अधिग्रहण मॉडल

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मुंबई 3.0 परियोजना के लिए एमएमआरडीए ने लॉन्च किया भारत का अनोखा सहभागी भूमि अधिग्रहण मॉडल

सारांश

एमएमआरडीए ने मुंबई 3.0 परियोजना के तहत एक अभिनव भूमि अधिग्रहण मॉडल पेश किया है, जो भूमि मालिकों को विकास प्रक्रिया में सक्रिय भागीदार बनाता है। यह पहल पारंपरिक मॉडल से एक कदम आगे है और भूमि मालिकों को विभिन्न विकल्प प्रदान करती है।

मुख्य बातें

भारत का पहला सहभागिता आधारित भूमि अधिग्रहण मॉडल भूमि मालिकों को विकास में सक्रिय भागीदार बनाना पारदर्शी और डिजिटल प्रक्रिया तीन लचीले विकल्प उपलब्ध दीर्घकालिक मूल्य वृद्धि का लाभ

मुंबई, 18 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएमआरडीए) ने मुंबई 3.0 परियोजना के अंतर्गत एक ऐतिहासिक पहल करते हुए भारत का पहला सहभागिता आधारित भूमि अधिग्रहण मॉडल प्रस्तुत किया है।

यह अभिनव मॉडल भूमि मालिकों को पारंपरिक अधिग्रहण प्रक्रियाओं के स्थान पर अनेक विकल्प प्रदान कर उन्हें विकास की प्रक्रिया में एक सक्रिय भागीदार बनाता है। इसके अंतर्गत रायगढ़ जिले के उरण, पनवेल और पेन तालुकों में 124 गाँवों के करीब 323.44 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र को 'कर्नाला-साई-चिरनर (केएससी) न्यू टाउन' के रूप में विकसित किया जाएगा। अटल बिहारी वाजपेयी सेवरी-न्हावा शेवा अटल सेतु के प्रभाव क्षेत्र में यह नया शहरी विकास क्षेत्र मुंबई को वैश्विक स्तर पर एक महत्वपूर्ण आर्थिक केंद्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

16 मार्च, 2026 को जारी सरकारी प्रस्ताव (जीआर) के आधार पर एमएमआरडीए को न्यू टाउन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एनटीडीए) के रूप में नियुक्त किया गया है। यह नीति पारंपरिक भूमि अधिग्रहण से हटकर जन-केंद्रित और पारदर्शी दृष्टिकोण अपनाती है, जिसमें भूमि मालिकों की सहमति और भागीदारी को प्राथमिकता दी गई है।

एमएमआरडीए ने भूमि मालिकों को तीन लचीले विकल्प प्रदान किए हैं। पहला विकल्प आपसी सहमति पर आधारित अधिग्रहण है, जिसमें महाराष्ट्र क्षेत्रीय और नगर नियोजन अधिनियम, 1966 के अंतर्गत दोनों पक्षों के बीच समझौते पर नकद मुआवजे की राशि तय की जाएगी। दूसरा विकल्प विकास अधिकारों के माध्यम से मुआवजा है, जिसमें फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई) और ट्रांसफरेबल डेवलपमेंट राइट्स (टीडीआर) के रूप में मुआवजा दिया जाएगा, और आवश्यकतानुसार अतिरिक्त प्रोत्साहन भी प्रदान किए जा सकते हैं। तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण विकल्प भूमि पूलिंग मॉडल है, जिसमें अविकसित भूमि के बदले भूमि मालिकों को उनकी कुल भूमि का 22.5 प्रतिशत विकसित भूमि वापस लौटाई जाएगी।

इस मॉडल के तहत उरण और पनवेल तालुका के भूमि मालिकों को उरण तालुका में ही विकसित प्लॉट आवंटित किए जाएंगे, जबकि पेन तालुका के भूमि मालिकों को पेन तालुका में ही 22.5 प्रतिशत विकसित भूमि वापस मिलेगी। यह व्यवस्था भूमि मालिकों को केवल मुआवजे तक सीमित नहीं रखती, बल्कि उन्हें नए शहर के विकास में सक्रिय भागीदार बनाती है और दीर्घकालिक मूल्य वृद्धि का लाभ भी सुनिश्चित करती है।

यह मॉडल सुनिश्चित करता है कि भूमि मालिक केवल मुआवजे तक सीमित न रहें, बल्कि नए शहर के विकास से उत्पन्न मूल्य वृद्धि में भी हिस्सेदार बनें। इससे वे दीर्घकालिक लाभ उठा सकेंगे।

एमएमआरडीए के मेट्रोपॉलिटन कमिश्नर डॉ. संजय मुखर्जी, आईएएस ने कहा, "मुंबई 3.0 को आकार देते समय हमारा पूरा ध्यान जन-केंद्रित विकास पर है। राष्ट्र-निर्माण और शहर-निर्माण दोनों भागीदारी वाली प्रक्रियाएं होनी चाहिए। हम भूमि मालिकों को विकल्प देकर उन्हें सशक्त बना रहे हैं, ताकि वे अपनी आकांक्षाओं के अनुरूप निर्णय ले सकें। इस पहल की सफलता नागरिकों की स्वैच्छिक भागीदारी पर निर्भर करेगी। हम पारदर्शिता और विश्वास बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं।"

भूमि मालिकों को अपनी सहमति देने के लिए 27 अप्रैल, 2026 से ऑनलाइन पोर्टल उपलब्ध होगा। इसमें आधार कार्ड, भूमि रिकॉर्ड और अन्य आवश्यक दस्तावेज जमा करने होंगे। यह प्रक्रिया पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होगी, जिससे विवादों की संभावना कम होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि भूमि मालिकों को विकास में सक्रिय भागीदार बनाता है। यह नीति सुनिश्चित करती है कि भूमि मालिक केवल मुआवजे तक सीमित न रहें, बल्कि वे दीर्घकालिक विकास का लाभ भी उठा सकें।
RashtraPress
23 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इस भूमि अधिग्रहण मॉडल के तहत भूमि मालिकों को क्या लाभ होगा?
भूमि मालिकों को विभिन्न विकल्पों के माध्यम से मुआवजा मिलेगा और वे नए शहर के विकास में सक्रिय भागीदार बन सकेंगे।
क्या यह प्रक्रिया पारदर्शी होगी?
हाँ, यह पूरी तरह डिजिटल और पारदर्शी होगी, जिससे विवादों की संभावना कम होगी।
भूमि मालिक कब अपनी सहमति दे सकते हैं?
भूमि मालिक 27 अप्रैल, 2026 से ऑनलाइन पोर्टल के माध्यम से अपनी सहमति दे सकते हैं।
इस मॉडल का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य भूमि मालिकों को विकास की प्रक्रिया में शामिल करना और उनकी भागीदारी सुनिश्चित करना है।
क्या यह मॉडल अन्य राज्यों में भी लागू किया जाएगा?
हालाँकि वर्तमान में यह मुंबई में लागू है, लेकिन सफल होने पर अन्य राज्यों में भी इसके लागू होने की संभावना है।
राष्ट्र प्रेस
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