क्या मनरेगा से गांधी का नाम हटाना गोडसेवादी सोच का नतीजा है?: भूपेश बघेल

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क्या मनरेगा से गांधी का नाम हटाना गोडसेवादी सोच का नतीजा है?: भूपेश बघेल

सारांश

भूपेश बघेल ने महात्मा गांधी के नाम को मिटाने की कोशिशों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने गोडसेवादी विचारधारा की आलोचना करते हुए यह बताया कि मनरेगा योजना से गांधी का नाम हटाना एक ख़तरनाक सोच का परिणाम है। क्या हम इतिहास से सीख नहीं ले सकते?

Key Takeaways

  • महात्मा गांधी का नाम संस्कृति और इतिहास का हिस्सा है।
  • गोडसेवादी सोच का मुकाबला करना आवश्यक है।
  • मनरेगा योजना से गांधी का नाम हटाना एक खतरनाक प्रवृत्ति है।
  • भूपेश बघेल ने हालात पर कड़ा रुख अपनाया है।
  • गांधी जी की विरासत को संरक्षित करना हम सभी की जिम्मेदारी है।

रायपुर, 6 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ के पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता भूपेश बघेल ने महात्मा गांधी के नाम से जुड़े मुद्दे पर राज्य के मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय और केंद्र की भाजपा सरकार पर कड़ा हमला किया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर एक विस्तृत पोस्ट के माध्यम से भूपेश बघेल ने नाथूराम गोडसे और गोडसेवादी विचारधारा की तीखी आलोचना की।

उन्होंने कहा कि महात्मा गांधी को मिटाने की कोशिशें आज भी जारी हैं, लेकिन गांधी का विचार कभी समाप्त नहीं हो सकता।

भूपेश बघेल ने 'एक्स' पोस्ट की शुरुआत 'नाथूराम गोडसे मुर्दाबाद' और 'गोडसेवादी मुर्दाबाद' जैसे नारों से की। उन्होंने लिखा, "मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने यह बात सही कही है कि महात्मा गांधी ने अपने अंतिम समय में 'हे राम' कहा था, लेकिन उन्होंने सवाल उठाया कि क्या मुख्यमंत्री को यह याद है कि ये शब्द गांधी जी के मुंह से कब निकले थे। ये शब्द उस समय निकले थे, जब आरएसएस से जुड़े और सावरकर के अनुयायी नाथूराम गोडसे ने महात्मा गांधी को गोली मार दी थी।"

पूर्व मुख्यमंत्री ने 'एक्स' पोस्ट के जरिए कहा कि गोडसे की गोली महात्मा गांधी को मिटाने की एक कोशिश थी, लेकिन गांधी को मिटाया नहीं जा सका।

उन्होंने आरोप लगाया कि गोडसेवादी मानसिकता आज भी गांधी के नाम और उनके विचारों को मिटाने की कोशिश में लगी हुई है। मनरेगा योजना से महात्मा गांधी का नाम हटाना भी उसी सोच का नतीजा है, जिसे उन्होंने गोडसेवादी और सावरकर की कायर मानसिकता बताया।

भूपेश बघेल ने कहा कि महात्मा गांधी किसी एक पार्टी के नहीं, बल्कि पूरे देश और दुनिया की धरोहर हैं। गांधी जी का नाम दुनिया की उन जगहों पर दर्ज है, जहां कई नेता अपने जीवन में भी नहीं पहुंच पाए। देश के हर बड़े शहर में महात्मा गांधी मार्ग का होना इस बात का बड़ा प्रमाण है।

उन्होंने मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय पर प्रधानमंत्री के प्रवक्ता की तरह व्यवहार करने का आरोप लगाते हुए कहा कि वे राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का अपमान कर रहे हैं।

बघेल ने तंज कसते हुए कहा कि ऐसे प्रधानमंत्री हैं जो अपने नाम का लिखा सूट पहनते हैं, अपने नाम पर क्रिकेट स्टेडियम का सुख लेते हैं और हर जगह अपनी तस्वीर देखकर स्वयं ही गर्व महसूस करते हैं।

मुख्य मंत्री विष्णुदेव साय के बयान का खंडन करते हुए भूपेश बघेल ने देश के कई प्रमुख संस्थानों का उल्लेख किया जो महात्मा गांधी के नाम पर हैं। इनमें केरल का महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, वाराणसी की महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ, बिहार का महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मेघालय और तेलंगाना के महात्मा गांधी विश्वविद्यालय, वर्धा का महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, तमिलनाडु का गांधीग्राम ग्रामीण संस्थान, सेवाग्राम का महात्मा गांधी चिकित्सा विज्ञान संस्थान और पुडुचेरी का महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज जैसे संस्थान शामिल हैं।

भूपेश बघेल ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकारें नाम मिटाने की राजनीति कर रही हैं। छत्तीसगढ़ में भी स्वर्गीय खूबचंद बघेल और स्वामी आत्मानंद जैसे महापुरुषों के नाम मिटाने की कोशिशें की जा रही हैं।

Point of View

हमें अपने महान नेताओं की पहचान को बनाए रखने की आवश्यकता है।
NationPress
07/01/2026

Frequently Asked Questions

भूपेश बघेल ने किस मुद्दे पर बात की?
भूपेश बघेल ने महात्मा गांधी के नाम को मिटाने की कोशिशों और गोडसेवादी विचारधारा पर बात की।
मनरेगा योजना से गांधी का नाम हटाना क्यों महत्वपूर्ण है?
यह गांधी के विचारों को मिटाने की एक कोशिश है, जो हमारे समाज के लिए गंभीर चिंता का विषय है।
गोडसेवादी सोच क्या है?
यह वह मानसिकता है जो महात्मा गांधी जैसे महान नेताओं की विरासत को नकारने की कोशिश करती है।
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