बिहार में पूर्व डीएसपी गौतम कुमार का निलंबन: आय से अधिक संपत्ति के मामले में कार्रवाई
सारांश
Key Takeaways
- गौतम कुमार का निलंबन आय से अधिक संपत्ति के आरोपों के चलते हुआ।
- आर्थिक अपराध इकाई द्वारा जांच की गई थी।
- निलंबन की अवधि में उन्हें निर्वाह भत्ता मिलेगा।
- विभागीय कार्यवाही जल्द शुरू की जाएगी।
- सरकारी रिकॉर्ड में अनुपातहीन संपत्ति के प्रमाण मिले हैं।
पटना, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार पुलिस ने किशनगंज के पूर्व डीएसपी गौतम कुमार को तुरंत प्रभाव से निलंबित कर दिया है।
बिहार पुलिस ने एक महत्वपूर्ण प्रशासनिक कार्रवाई में किशनगंज के पूर्व डीएसपी गौतम कुमार को निलंबित किया है। गृह विभाग ने उनके खिलाफ विभागीय कार्यवाही का भी आरंभ कर दिया है।
गृह विभाग की ओर से जारी आधिकारिक अधिसूचना में निलंबन की पुष्टि की गई है। निलंबन की अवधि के दौरान उनका मुख्यालय डीआईजी, चंपारण रेंज, बेतिया का कार्यालय निर्धारित किया गया है।
यह कार्रवाई आर्थिक अपराध इकाई की जांच के परिणामस्वरूप की गई है। पहले, गौतम कुमार को किशनगंज के एसडीपीओ पद से हटाकर पुलिस मुख्यालय में संबद्ध किया गया था। 6 अप्रैल को उनसे पटना स्थित आर्थिक अपराध इकाई कार्यालय में करीब पांच घंटे तक पूछताछ की गई थी।
मामला उनकी ज्ञात आय से अधिक संपत्ति रखने के आरोपों से संबंधित है। 31 मार्च 2026 को आर्थिक अपराध इकाई की टीमों ने किशनगंज, पटना और पूर्णिया में उनसे जुड़े कई ठिकानों पर छापेमारी की थी। जांच में यह सामने आया कि उन्होंने अपनी ज्ञात आय से लगभग 60 प्रतिशत अधिक संपत्ति अर्जित की है।
अधिकारियों के अनुसार, संपत्तियां केवल उनके नाम पर ही नहीं, बल्कि उनकी पत्नी, सास और अन्य सहयोगियों के नाम पर भी खरीदी गई हैं। इसके अलावा 80 करोड़ रुपए से अधिक की बेनामी संपत्ति होने की भी आशंका जताई गई है।
सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, प्रारंभिक जांच में लगभग 1.94 करोड़ रुपए (करीब 60.27 प्रतिशत अधिक) की अनुपातहीन संपत्ति के प्रमाण मिले हैं।
यह निलंबन बिहार सरकारी सेवक (वर्गीकरण, नियंत्रण एवं अपील) नियम, 2005 के नियम 9(1)(ए) और (सी) के तहत किया गया है। मामला आर्थिक अपराध थाना कांड संख्या 03/2026 (दिनांक 29 मार्च 2026) के तहत दर्ज है, जिसमें भारतीय न्याय संहिता और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, 1988 (संशोधित 2018) की धाराएं लगाई गई हैं।
गौतम कुमार के खिलाफ विभागीय कार्यवाही जल्द ही शुरू की जाएगी। निलंबन की अवधि के दौरान उन्हें सेवा नियमों के तहत निर्वाह भत्ता दिया जाएगा।
अधिकारियों ने संकेत दिया है कि जांच के निष्कर्षों के आधार पर आगे कानूनी और विभागीय कार्रवाई की जाएगी।