बिहार में सम्राट चौधरी का राजनीतिक कद: मुख्यमंत्री की दौड़ में प्रमुख
सारांश
Key Takeaways
- सम्राट चौधरी का भाजपा में महत्वपूर्ण स्थान है।
- उनका राजनीतिक सफर राजद से शुरू हुआ।
- 2023 में वे भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष बने।
- उन्हें उप मुख्यमंत्री की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
- 2025 के विधानसभा चुनाव में उनकी भूमिका अहम होगी।
पटना, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में भाजपा विधानमंडल दल की बैठक में सम्राट चौधरी को नेता चुने जाने के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि वे बिहार के अगले मुख्यमंत्री होंगे।
इस बैठक में केंद्रीय मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने सम्राट चौधरी के नेता चुने जाने की घोषणा की। सम्राट चौधरी ने अपने राजनीतिक करियर की शुरुआत राजद से की, लेकिन भाजपा ने उन्हें एक आम राजनीतिक कार्यकर्ता की सभी इच्छाएँ प्रदान की हैं।
सम्राट चौधरी ने अपने बचपन से राजनीति का करीबी अनुभव लिया है। उनके पिता शकुनी चौधरी बिहार में राजद के प्रमुख नेता रहे हैं, जो सात बार विधायक और सांसद रह चुके हैं। उनकी माता पार्वती देवी भी तारापुर निर्वाचन क्षेत्र से विधायक रह चुकी हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में सम्राट चौधरी ने मुंगेर के तारापुर से जीत हासिल की थी। भाजपा से पहले वे राजद और जदयू में भी सक्रिय रहे हैं।
सम्राट चौधरी ने 1990 में सक्रिय राजनीति में कदम रखा और 19 मई 1999 को बिहार सरकार में कृषि मंत्री के रूप में शपथ ली। उन्होंने 2000 और 2010 में परबत्ता (विधानसभा क्षेत्र) से चुनाव लड़ा और विधायक बने। 2010 में, उन्हें बिहार विधानसभा में विपक्षी दल का मुख्य सचेतक नियुक्त किया गया था।
2018 से उनकी पहचान भाजपा नेता के रूप में स्थापित हुई। 2019 में, जब नित्यानंद राय भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष थे, सम्राट चौधरी को प्रदेश उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई। इसके बाद, भाजपा में उनकी राजनीतिक अहमियत बढ़ गई। जब नीतीश कुमार ने भाजपा से नाता तोड़कर राजद के साथ महागठबंधन सरकार बनाई, तब सम्राट चौधरी को एक महत्वपूर्ण राजनीतिक पहचान मिली।
सम्राट चौधरी विधान परिषद में नेता प्रतिपक्ष बने। उन्होंने उस दिन नीतीश कुमार को मुख्यमंत्री पद से हटाने के बाद मुरैठा (पगड़ी) खोलने की बात कहकर अपने सिर पर मुरैठा बांध ली। 2023 में, सम्राट चौधरी ने भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष का पद संभाला, और जब नीतीश कुमार ने दोबारा एनडीए में वापसी की, तो वे उप मुख्यमंत्री बने। 2025 के विधानसभा चुनाव में वे विपक्ष के प्रमुख निशाने पर रहेंगे।
इस चुनाव के बाद जब एनडीए की सरकार बनी, मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने उन्हें उप मुख्यमंत्री के साथ गृह मंत्रालय की जिम्मेदारी दी। यह पहली बार हुआ जब नीतीश कुमार ने सीएम रहते गृह मंत्रालय का प्रभार संभाला।