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क्या बिहार में एनडीए की बढ़त दुर्भाग्यपूर्ण है?

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क्या बिहार में एनडीए की बढ़त दुर्भाग्यपूर्ण है?

सारांश

बिहार में एनडीए की बढ़त को पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने दुर्भाग्यपूर्ण बताया है। जानें इस पर नेताओं की क्या राय है और चुनावी रुझानों का क्या मतलब है।

मुख्य बातें

एनडीए को मिली बड़ी बढ़त पप्पू यादव का विवादास्पद बयान राजनीतिक रुख में बदलाव कांग्रेस नेताओं की प्रतिक्रिया चुनाव आयोग के आंकड़े

पटना, 14 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में वोटों की गिनती के दौरान एनडीए को मिली विशाल बढ़त को पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने 'दुर्भाग्यपूर्ण' करार दिया है।

पूर्णिया के सांसद पप्पू यादव ने कहा कि जो स्थिति बन रही है, उसे हमें स्वीकार करना होगा, लेकिन यह बिहार के लिए दुर्भाग्यपूर्ण है। मैं मतदाताओं के निर्णय का स्वागत करूंगा, फिर भी यह बिहार के लिए दुखद है।

बिहार विधानसभा चुनावों पर कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने कहा कि अभी जो रुझान हैं, उन्हें अंतिम परिणामों में बदलने में समय लगेगा। आयोग की वेबसाइट पर जो जानकारी मिल रही है, उसके अनुसार संख्याएं लगातार बदल रही हैं। इस समय किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना जल्दबाजी होगी। उन्होंने कहा कि धैर्य बनाए रखना आवश्यक है।

भागलपुर से कांग्रेस नेता प्रवीण सिंह ने कहा कि मुझे कोई पछतावा नहीं है। मैंने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया और जनता ने वही चुना जो उन्हें सही लगा। एक पक्ष जो रणनीति अपनाता है, दूसरा पक्ष भी वही कर सकता है। राजनीति इसी तरह चलती है।

चुनाव आयोग ने बिहार की 243 विधानसभा सीटों पर रुझान जारी किए हैं। भाजपा सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है। शुक्रवार दोपहर 3 बजे तक भाजपा 95 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। वहीं, जदयू 82 सीटों पर आगे है। राष्ट्रीय जनता दल 25 सीटों पर बढ़त बनाए हुए है। लोजपा (रामविलास) 20 सीटों पर आगे चल रही है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बिहार चुनावों में एनडीए की बढ़त ने राजनीतिक परिदृश्य को बदल दिया है। यह महत्वपूर्ण है कि हम चुनावी रुझानों का विश्लेषण करें और यह समझें कि मतदाता किस दिशा में बढ़ रहे हैं।
RashtraPress
12 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार में एनडीए की बढ़त का क्या मतलब है?
एनडीए की बढ़त का मतलब है कि भाजपा और अन्य गठबंधन पार्टियों की स्थिति मजबूत है, जो आगामी नीतियों और विकास योजनाओं को प्रभावित कर सकती है।
क्या पप्पू यादव का बयान राजनीतिक प्रभाव डाल सकता है?
हाँ, पप्पू यादव का बयान चुनावी राजनीति में एक महत्वपूर्ण विषय बन सकता है, जिससे अन्य नेताओं की प्रतिक्रियाएँ भी सामने आएंगी।
राष्ट्र प्रेस
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