क्या बिहार में सेकेंडरी टीचर एलीजीबिलिटी टेस्ट का परिणाम जारी हुआ?
सारांश
Key Takeaways
- कुल 4.42 लाख अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी।
- 2.56 लाख सफल अभ्यर्थी।
- उत्तीर्णता का प्रतिशत 57.96%।
- पेपर-1 के लिए 62.56% उत्तीर्णता।
- पेपर-2 के लिए 52.17% उत्तीर्णता।
पटना, 5 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बिहार में शिक्षक बनने के इच्छुक युवाओं के लिए खुशखबरी आई है। बिहार विद्यालय परीक्षा समिति (बीएसईबी) ने सेकेंडरी टीचर एलीजीबिलिटी टेस्ट (एसटीईटी) 2025 का परिणाम आज जारी किया। बीएसईबी के अध्यक्ष आनंद किशोर ने एक प्रेस वार्ता के माध्यम से इस परीक्षा का परिणाम साझा किया। इस परीक्षा में कुल 4.42 लाख अभ्यर्थियों में से 2.56 लाख ने सफलता प्राप्त की है।
आनंद किशोर ने बताया कि पेपर-1 यानी वर्ग 9-10 के शिक्षक हेतु आयोजित परीक्षा में 2,46,415 अभ्यर्थियों ने भाग लिया, जबकि पेपर-2 यानी वर्ग 11-12 के लिए 1,95,799 अभ्यर्थी उपस्थित हुए। दोनों पेपर में कुल 4,42,214 अभ्यर्थियों ने भाग लिया था। यह परीक्षा सीबीटी के माध्यम से पिछले साल 14 अक्टूबर से 16 अक्टूबर तक आयोजित की गई थी, जिसमें 2,56,301 अभ्यर्थी उत्तीर्ण हुए हैं। इनमें से 1,04,167 महिला और 1,52,134 पुरुष अभ्यर्थी शामिल हैं। उत्तीर्णता का प्रतिशत 57.96 प्रतिशत रहा।
इस परीक्षा में पेपर-1 में सीबीटी के माध्यम से 16 विषयों की परीक्षा आयोजित की गई थी, जिसमें 2,46,415 अभ्यर्थियों में से 1,54,145 ने सफलता प्राप्त की। उत्तीर्णता का प्रतिशत 62.56 प्रतिशत रहा। पेपर-2 में 29 विषयों की परीक्षा आयोजित की गई, जिसमें 1,95,799 अभ्यर्थियों में से 1,02,156 ने सफलता प्राप्त की। उत्तीर्णता का प्रतिशत 52.17 प्रतिशत रहा।
परीक्षा परिणाम के साथ-साथ विषयवार अंक और क्वालिफाइंग स्टेटस भी जारी कर दिया गया है। बिहार में शिक्षक भर्ती में शामिल होने के लिए यह प्रमाणपत्र आवश्यक दस्तावेज होगा। एसटीइटी 2025 के लिए कटऑफ का निर्धारण किया गया था।
सामान्य वर्ग के लिए 50 प्रतिशत, पिछड़ा वर्ग के लिए 45.5 प्रतिशत, अत्यंत पिछड़ा वर्ग के लिए 42.5 प्रतिशत और महिला, दिव्यांग, अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए 40 प्रतिशत उत्तीर्णांक निर्धारित किया गया था। परीक्षा में कुल 150 प्रश्न (150 अंक) पूछे गए, जिनमें 100 अंक विषयवस्तु से और 50 अंक शिक्षण कला एवं अन्य दक्षताओं पर आधारित थे। सभी प्रश्न बहुविकल्पीय थे और गलत उत्तर पर कोई निगेटिव मार्किंग नहीं थी।