बिहार: शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीआरई-4) की मांग को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश, 10 अप्रैल से आमरण अनशन
सारांश
Key Takeaways
- टीआरई-4 परीक्षा की देरी से अभ्यर्थियों में आक्रोश बढ़ रहा है।
- छात्र नेता दिलीप कुमार ने 10 अप्रैल से आमरण अनशन की घोषणा की।
- अभ्यर्थियों की उम्र सीमा समाप्त हो रही है, जिससे स्थिति और गंभीर हो रही है।
- सरकार से अनुमति न मिलने पर आंदोलन का इरादा है।
- अभ्यर्थियों से अपील की गई है कि वे 10 अप्रैल को पटना पहुंचें।
पटना, 7 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बिहार लोक सेवा आयोग (बीपीएससी) द्वारा चौथे चरण की शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीआरई-4) में हो रही देरी के कारण शिक्षक अभ्यर्थियों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है। यह देरी अब उनके लिए सहन करना मुश्किल हो गया है।
इस बीच, छात्र नेता दिलीप कुमार ने मंगलवार को इस मुद्दे पर 10 अप्रैल से आमरण अनशन की घोषणा की। पटना के गांधी मैदान में बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों ने एकत्रित होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी की। सभी का एक ही उद्देश्य था कि चौथे चरण की शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीआरई-4) जल्द से जल्द कराई जाए।
दिलीप कुमार ने चेतावनी दी कि यदि आयोग अगले तीन दिनों के भीतर परीक्षा का विज्ञापन जारी नहीं करता है, तो वे 10 अप्रैल से आमरण अनशन करेंगे। उन्होंने कहा कि टीआरई-4 के लाखों अभ्यर्थी पिछले दो वर्षों से वैकेंसी का इंतज़ार कर रहे हैं।
उन्होंने यह भी बताया कि पिछले दो सालों से अभ्यर्थियों को टीआरई-4 के संबंध में गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि 24 अगस्त 2024 को परीक्षा की तारीख निर्धारित की गई थी, लेकिन विभिन्न कारणों से इसे बार-बार टाला जा रहा है। इस समय में, हजारों अभ्यर्थियों की उम्र सीमा समाप्त होती जा रही है।
छात्र नेता ने आगे कहा कि शिक्षा मंत्री सुनील कुमार ने भी बिहार विधानसभा चुनाव से पूर्व टीआरई-4 की परीक्षा, परिणाम और नियुक्ति की तारीखें घोषित की थीं, लेकिन इस भर्ती को लगातार लटकायाअनुमति मांगी है। यदि सरकार अनुमति नहीं देती है, तो वे गर्दनीबाग में आंदोलन करेंगे।
दिलीप कुमार ने पूरे बिहार के शिक्षक अभ्यर्थियों से अपील की है कि वे 10 अप्रैल को पटना पहुंचें।