क्या जंगलराज से जीरो रि-पोलिंग तक, इस बार बिहार विधानसभा चुनाव ने नया इतिहास लिखा?

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क्या जंगलराज से जीरो रि-पोलिंग तक, इस बार बिहार विधानसभा चुनाव ने नया इतिहास लिखा?

सारांश

बिहार विधानसभा चुनाव ने ऐतिहासिक मतदान प्रतिशत के साथ नए मानक स्थापित किए हैं। 67.13 प्रतिशत मतदान के साथ, यह चुनाव 'जंगलराज' से 'जीरो रि-पोलिंग' की ओर बढ़ा है। जानिए इस बदलाव के पीछे क्या कारण हैं और इसे कैसे हासिल किया गया।

मुख्य बातें

67.13 प्रतिशत मतदान के साथ रिकॉर्ड कायम किया गया।
बिहार ने 'जीरो रि-पोलिंग' का सफर तय किया।
कोई भी चुनावी हिंसा नहीं हुई।
पुनर्मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी।
राजनीतिक इतिहास में बड़ा बदलाव देखा गया।

पटना, 14 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। इस बार बिहार विधानसभा चुनाव ने कई नई उपलब्धियाँ हासिल की हैं। बिहार के राजनीतिक इतिहास में पहली बार 67.13 प्रतिशत मतदान रिकॉर्ड किया गया है। केवल यही नहीं, इस बार बिहार ने 'जंगलराज' से 'जीरो रि-पोलिंग' तक का सफर भी तय किया है।

बिहार में किसी भी बूथ पर पुनर्मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी है। मतदान के दौरान हिंसा की घटनाएँ भी शून्य रही हैं। कुल मिलाकर, इस चुनाव में एक स्वच्छ और हिंसा-मुक्त मतदान प्रक्रिया देखी गई है।

राजद के शासन काल, जिसे विपक्ष 'जंगल राज' कहता है, में बिहार चुनावों के दौरान चुनावी धांधली और पुनर्मतदान की घटनाएँ सबसे अधिक थीं। चुनाव हिंसा, हत्याएँ, बूथ कैप्चरिंग और फर्जी मतदान की घटनाएँ आम थीं।

आंकड़ों के अनुसार, 1985 में बिहार विधानसभा चुनाव के दौरान 63 हत्याएँ हुई थीं, जबकि 156 बूथों पर पुनर्मतदान कराना पड़ा था। 1990 के विधानसभा चुनावों में, जब कई छोटे दलों से मिलकर बनी जनता दल ने राज्य में सत्ता हासिल की, तब लगभग 87 मौतें हुईं।

1995 के चुनावों में, लालू यादव के नेतृत्व में जनता दल ने पिछले चुनावों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया, लेकिन हिंसा और चुनावी धांधली की घटनाओं में वृद्धि देखी गई। तत्कालीन चुनाव आयुक्त टीएन शेषन को अभूतपूर्व हिंसा के कारण बिहार चुनाव चार बार स्थगित करने पड़े।

2005 के चुनावों में हिंसा और कदाचार के कारण 660 मतदान केंद्रों पर दोबारा वोटिंग कराई गई थी। उस वर्ष नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली जदयू पहली बार सत्ता में आई थी।

2005 के बाद राज्य में कानून-व्यवस्था की स्थिति में काफी सुधार देखने को मिला और चुनावी हिंसा और धांधली की घटनाएँ कम हुईं। इसका ताजा उदाहरण 2025 का विधानसभा चुनाव है। इस साल किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में पुनर्मतदान की मांग नहीं की गई और मतदान के समय कोई भी हिंसा की घटना नहीं हुई।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि यह एक संकेत भी है कि राज्य में कानून-व्यवस्था में सुधार संभव है। इस चुनाव ने लोकतंत्र की मजबूती को साबित किया है और यह दर्शाया है कि जब लोग एकजुट होते हैं, तो सकारात्मक परिवर्तन संभव है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बिहार विधानसभा चुनाव में मतदान प्रतिशत क्या था?
67.13 प्रतिशत मतदान हुआ।
क्या इस बार बिहार में चुनावी हिंसा हुई?
इस बार मतदान के दौरान कोई भी हिंसा की घटना नहीं हुई।
पुनर्मतदान की आवश्यकता क्यों नहीं पड़ी?
बिहार में किसी भी बूथ पर पुनर्मतदान की आवश्यकता नहीं पड़ी।
बिहार में चुनावी धांधली का इतिहास क्या है?
राजद के शासन काल में चुनावी धांधली और पुनर्मतदान की घटनाएँ आम थीं।
क्या बिहार चुनावों में सुधार हुआ है?
हाँ, हाल के चुनावों में कानून-व्यवस्था में सुधार देखने को मिला है।
राष्ट्र प्रेस
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