क्या बिहार विधानसभा में नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाई गई?
सारांश
Key Takeaways
- नवीनतम विधानसभा सत्र में कई महत्वपूर्ण कार्य होंगे।
- राजनीतिक बदलाव और विपक्ष की घटती संख्या पर ध्यान देना आवश्यक है।
- नवनिर्वाचित विधायकों का शपथ लेना महत्वपूर्ण है।
पटना, 1 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। बिहार की 18वीं विधानसभा का पहला सत्र सोमवार को आरंभ हुआ। यह सत्र पांच दिसंबर तक चलेगा और इसमें कई महत्वपूर्ण कार्य किए जाने हैं। पहले दिन, नवनिर्वाचित विधायकों को सदन में शपथ दिलाई जा रही है। इस प्रक्रिया का संचालन विधानसभा के प्रोटेम स्पीकर नरेंद्र नारायण यादव कर रहे हैं।
सर्वप्रथम, बिहार के उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने विधायक के रूप में शपथ ली। इसके बाद उप मुख्यमंत्री विजय कुमार सिन्हा ने शपथ ग्रहण किया। सम्राट चौधरी तारापुर विधानसभा क्षेत्र से चुने गए हैं, जबकि विजय कुमार सिन्हा लखीसराय से निर्वाचित हुए हैं।
प्रोटेम स्पीकर ने पहले मंत्रियों को शपथ दिलाई। इससे पहले, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान ने राजभवन में एक समारोह में नरेंद्र नारायण यादव को पद की शपथ दिलाई थी।
18वीं विधानसभा में सदन के भीतर की स्थिति पूरी तरह से बदलती नजर आ रही है। इस बार कोई भी निर्दलीय विधायक चुनाव जीत कर नहीं आया है, जबकि विपक्ष की संख्या पिछली बार की तुलना में काफी कम हो गई है। मुख्य विपक्षी पार्टी राजद के पास 25 विधायक हैं, जबकि कांग्रेस ने छह सीटों पर जीत हासिल की है।
यह जानना महत्वपूर्ण है कि भाजपा सत्ताधारी गठबंधन में सबसे बड़ी पार्टी के रूप में उभरी है, और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की अगुवाई वाली जदयू 85 विधायकों के साथ दूसरी सबसे बड़ी सहयोगी पार्टी है।
तीन दिसंबर को, राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान असेंबली एनेक्सी के सेंट्रल हॉल में दोनों सदनों, विधानसभा और विधान परिषद को संबोधित करेंगे। इस संबोधन में नई बनी एनडीए सरकार के आने वाले कार्यकाल के लिए एजेंडा और प्राथमिकताओं का उल्लेख किए जाने की संभावना है। 6 और 11 नवंबर को हुए दो चरण के चुनावों में एनडीए ने 202 सीटें जीतीं, जबकि विपक्षी महागठबंधन को 35 सीटें मिलीं, जिनमें से 25 सीटें आरजेडी ने जीतीं।