बीजेडी का निशिकांत दुबे के बयान पर तीखा विरोध, सदन से सांसदों का वॉकआउट
सारांश
Key Takeaways
- बीजेडी का वॉकआउट राजनीतिक संवाद का स्तर गिराने का संकेत है।
- निशिकांत दुबे का बयान विवाद खड़ा कर सकता है।
- सस्मित पात्रा ने सदन की गरिमा बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।
नई दिल्ली, 30 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। बीजू जनता दल ने भाजपा सांसद निशिकांत दुबे के विवादास्पद बयान पर कड़ा विरोध व्यक्त किया है। यह विरोध सोमवार को राज्यसभा में भी स्पष्ट रूप से देखा गया, जहां पार्टी के सांसदों ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए वॉकआउट किया।
बीजेडी के राज्यसभा सांसद सस्मित पात्रा ने इस मुद्दे को सदन में उठाया, जिसमें उन्होंने निशिकांत दुबे द्वारा दिवंगत नेता बीजू पटनायक के बारे में दिए गए बयान पर तीखी आपत्ति जताई।
यह विवाद तब शुरू हुआ जब 27 मार्च को दुबे ने कहा था कि ओडिशा के पूर्व मुख्यमंत्री बीजू पटनायक ने अमेरिकी सरकार, सीआईए और नेहरू के बीच एक मध्यस्थ की भूमिका निभाई थी। बीजेडी ने इस बयान को पूरी तरह से झूठा और अपमानजनक करार दिया। सस्मित पात्रा ने कहा कि उनकी पार्टी सदन की गरिमा बनाए रखते हुए आमतौर पर व्यवधान नहीं करती, लेकिन इस मामले में चुप रहना संभव नहीं है।
सस्मित पात्रा ने दुबे के बयान को झूठा और मनगढ़ंत बताते हुए इसकी कड़ी निंदा की। सदन में बोलते समय वह काफी नाराज दिखे और कहा कि बीजू पटनायक को सीआईए का एजेंट कहना न केवल गलत है, बल्कि यह देश के इतिहास और ओडिशा की भावनाओं का अपमान भी है।
बीजेडी ने इस बयान के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए सदन में विरोध दर्ज कराया। सस्मित पात्रा ने इसे राजनीतिक संवाद के स्तर में गिरावट का संकेत बताया और विरोध स्वरूप सदन का वॉकआउट किया।
इस विवाद के चलते सस्मित पात्रा ने पहले ही निशिकांत दुबे की अध्यक्षता वाली संसदीय संचार और आईटी समिति से इस्तीफा दे दिया था। उन्होंने अपने पत्र में लिखा कि वह ऐसे व्यक्ति के अधीन काम नहीं कर सकते जो बीजू पटनायक के बारे में अपमानजनक टिप्पणी करता हो। बीजेडी ने निशिकांत दुबे से माफी की मांग की है और उनके बयान को शर्मनाक और निराधार बताया है।