गांधीनगर नगर निगम चुनाव 2026: BJP ने 38 सीटें जीतीं, कांग्रेस 5 पर पहुँची, AAP का सफाया
सारांश
मुख्य बातें
गांधीनगर नगर निगम (GMC) चुनाव में भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 44 में से 38 सीटें जीतकर नगर निगम पर अपना वर्चस्व बरकरार रखा है। 13 अक्टूबर 2026 को घोषित इन नतीजों में कांग्रेस ने 2021 के मुकाबले अपनी सीटें 2 से बढ़ाकर 5 कर लीं, जबकि आम आदमी पार्टी (AAP) एक भी सीट नहीं जीत सकी। एक सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार ने जीत दर्ज की।
मुख्य चुनाव परिणाम
11 अक्टूबर 2026 को 11 वार्डों की 44 सीटों पर हुए मतदान में 59.25% मतदान दर्ज किया गया। कुल 2,59,985 पंजीकृत मतदाताओं में से 1,54,045 ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। 130 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे और मतगणना मंगलवार सुबह 9 बजे शुरू हुई।
वार्ड 4 में सर्वाधिक 74.78% मतदान हुआ, जबकि वार्ड 5 में सबसे कम 48.63% मतदाता बूथ तक पहुँचे। BJP ने 9 वार्डों में चारों-की-चारों सीटें अपने नाम कीं।
वार्डवार प्रदर्शन
वार्ड 6 कांग्रेस की सबसे बड़ी उपलब्धि रहा, जहाँ उसके सभी चारों उम्मीदवार जीते — करमजीतसिंह वाघेला (4,729 वोट), मेघना रबारी (4,469 वोट), मेहुलकुमार राठौड़ (4,422 वोट) और हंसाबेन निनामा (3,957 वोट)। वार्ड 7 में BJP को 3 और कांग्रेस को 1 सीट मिली, जहाँ कांग्रेस के नागिनभाई नाडिया को 6,130 वोट मिले।
वार्ड 2 में BJP की 3 सीटों के साथ-साथ निर्दलीय उम्मीदवार दीपिकाबेन वाघेला ने 4,909 वोट पाकर चौथी सीट जीती। वार्ड 10 में गौरांगभाई पटेल को सर्वाधिक 11,175 वोट मिले।
BJP की स्थिति और बदलाव
BJP ने 2021 में 41 सीटें जीती थीं, जो इस बार घटकर 38 रह गईं — यानी 3 सीटों की गिरावट। इसके बावजूद पार्टी ने नगर निगम में स्पष्ट बहुमत बनाए रखा। गौरतलब है कि गांधीनगर गुजरात की राजधानी और BJP का परंपरागत गढ़ रहा है, इसलिए यहाँ की जीत पार्टी के लिए प्रतीकात्मक महत्व भी रखती है।
AAP का सफाया और कांग्रेस की वापसी
AAP ने 2021 में 1 सीट जीती थी, लेकिन इस बार वह पूरी तरह खाली हाथ रही। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी गुजरात में अपनी उपस्थिति को मज़बूत करने की कोशिश कर रही थी। दूसरी ओर, कांग्रेस के लिए 2 से 5 सीटों की छलांग एक छोटी लेकिन राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है, विशेष रूप से वार्ड 6 में पूर्ण सफाया उसकी संगठनात्मक ताक़त का संकेत देता है।
आगे की राह
इन नतीजों के साथ गांधीनगर नगर निगम में BJP का प्रशासनिक नियंत्रण अगले कार्यकाल तक बना रहेगा। कांग्रेस के लिए यह मामूली सुधार भविष्य की नगरीय राजनीति में अपनी रणनीति को आकार देने का आधार बन सकता है। AAP को गुजरात के नगर निगम स्तर पर अपनी रणनीति पर पुनर्विचार करना होगा।