भाजपा: आदिवासी क्षेत्रों में विकास का सही मार्ग, सीएम माणिक साहा का दावा
सारांश
Key Takeaways
- भाजपा का टीटीएएडीसी में विकास का एकमात्र विकल्प होना।
- मुख्यमंत्री ने टिपरा मोथा पार्टी की आलोचना की।
- भाजपा का संकल्प पत्र 29 वादों को दर्शाता है।
- डबल-इंजन सरकार का फंड आवंटन विकास में सहायक।
- आदिवासी समुदायों के कल्याण पर जोर।
अगरतला, 5 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा ने रविवार को यह स्पष्ट किया कि त्रिपुरा ट्राइबल एरियाज ऑटोनॉमस डिस्ट्रिक्ट काउंसिल (टीटीएएडीसी) में विकास को सुनिश्चित करने के लिए भाजपा ही एकमात्र सही विकल्प है।
ढलाई जिले में एक चुनावी रैली को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि टीटीएएडीसी में वर्तमान में विपक्ष में बैठी भाजपा को आगे बढ़ने के लिए टिपरा मोथा पार्टी (टीएमपी) जैसी पार्टियों के साथ गठबंधन की आवश्यकता नहीं है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि रविवार को टीटीएएडीसी चुनावों के लिए जारी किया गया ‘संकल्प पत्र’ लोगों की आकांक्षाओं को दर्शाता है। अगर हमें आदिवासी क्षेत्रों में वास्तविक विकास करना है, तो भाजपा का कोई विकल्प नहीं है।
टिपरा मोथा पार्टी पर हमला करते हुए उन्होंने उसके गठन पर सवाल उठाए और आरोप लगाया कि उसके कई सदस्य कम्युनिस्ट आंदोलनों से जुड़े हुए हैं। उन्होंने पूर्व की सरकारों की आलोचना करते हुए कहा कि दशकों तक वामपंथी शासन के दौरान राज्य में हिंसा और अशांति का माहौल बना रहा।
मुख्यमंत्री ने क्षेत्रीय राजनीतिक दलों पर विभाजनकारी राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि इन पार्टियों की कोई स्पष्ट विचारधारा नहीं है और उनका दृष्टिकोण विकास के बजाए विभाजन पर आधारित है। लोकतांत्रिक मूल्यों के प्रति पार्टी की प्रतिबद्धता को दोहराते हुए उन्होंने कहा कि लोकतंत्र को डराने-धमकाने या दमन से नहीं चलाया जा सकता। लोगों को संवाद और पारदर्शिता के माध्यम से जोड़ा जाना चाहिए।
इससे पहले दिन में मुख्यमंत्री ने खुमुलवंग में भाजपा का ‘संकल्प पत्र’ जारी किया, जिसमें परिषद चुनावों से पहले 29 प्रमुख वादों को दर्शाया गया। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि भाजपा पहली बार टीटीएएडीसी सरकार बनाने की दिशा में अग्रसर है।
उन्होंने कहा कि यह एक ऐतिहासिक पल होगा। हमारा ध्यान इंफ्रास्ट्रक्चर के विकास, शांति और आदिवासी समुदायों के कल्याण पर केंद्रित है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि डबल-इंजन सरकार के तहत एडीसी क्षेत्रों के लिए पर्याप्त फंड आवंटित किया गया है। उन्होंने इंफ्रास्ट्रक्चर में सुधार, जल जीवन मिशन के तहत पीने के पानी की आपूर्ति, और पड़ोसी मिजोरम से जातीय अशांति के कारण त्रिपुरा भागकर आए रियांग शरणार्थियों के पुनर्वास के प्रयासों की चर्चा की।