दशहरे पर परीक्षा विवाद: BJP के विजयेंद्र ने कर्नाटक सरकार से हिंदू त्योहारों का सम्मान करने की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक भाजपा (BJP) अध्यक्ष एवं विधायक बीवाई विजयेंद्र ने मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को राज्य सरकार और शिक्षण संस्थानों से अपील की कि प्रमुख हिंदू त्योहारों के दौरान परीक्षाएँ आयोजित न की जाएँ और छात्रों की भावनाओं को शैक्षणिक कार्यक्रम बनाते समय उचित महत्व दिया जाए। यह प्रतिक्रिया मंगलुरु के एक निजी कॉलेज में दशहरा पर्व के दौरान सेमेस्टर परीक्षाएँ निर्धारित किए जाने को लेकर भड़के विवाद के संदर्भ में आई।
विवाद की पृष्ठभूमि
मंगलुरु के बेंदूरवेल स्थित एक निजी कॉलेज ने 12 से 28 अक्टूबर के बीच सेमेस्टर परीक्षाओं का कार्यक्रम जारी किया था, जो दशहरा उत्सव की अवधि से टकराता है। छात्रों ने पहले ही कॉलेज प्रबंधन को ज्ञापन सौंपकर कार्यक्रम बदलने की माँग की थी, लेकिन आरोप है कि प्रबंधन ने उनकी माँगों पर कोई जवाब नहीं दिया।
इसके बाद सोमवार, 12 अक्टूबर को अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) के कार्यकर्ताओं और छात्रों ने कॉलेज के मुख्य गेट पर धरना दिया, परीक्षाओं का बहिष्कार किया और पुलिस वाहनों को रोकने का प्रयास किया। इसके बाद पुलिस ने कई ABVP कार्यकर्ताओं और छात्रों को हिरासत में लिया। ABVP ने मंगलुरु जिले के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपकर हस्तक्षेप की माँग भी की।
विजयेंद्र का बयान
विजयेंद्र ने कहा कि राज्य की संस्कृति, परंपराओं और धार्मिक प्रथाओं का सम्मान करना सभी की जिम्मेदारी है। उन्होंने तर्क दिया कि जब कर्नाटक सरकार खुद दशहरे को राजकीय उत्सव के रूप में मनाती है, तो शिक्षण संस्थानों द्वारा उसी अवधि में परीक्षाएँ आयोजित करना असंगत है।
उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि एक समुदाय के त्योहारों के लिए शैक्षणिक व्यवस्था में समायोजन किया जाता है, जबकि दशहरे जैसे प्रमुख हिंदू पर्व पर यही सुविधा नहीं दी जाती — यह रवैया, उनके अनुसार, अस्वीकार्य है।
पुलिस कार्रवाई पर चिंता
विजयेंद्र ने प्रदर्शन के दौरान पुलिस के व्यवहार पर लगे आरोपों पर भी चिंता जताई। उन्होंने राज्य सरकार से आग्रह किया कि इन आरोपों की निष्पक्ष जाँच कराई जाए और दोषी पाए जाने वालों के विरुद्ध कार्रवाई की जाए। उनके अनुसार, छात्रों की जायज माँगों को नज़रअंदाज़ करना और विरोध पर सख्ती दिखाना प्रशासनिक विफलता का संकेत है।
छात्रों की आवाज़
कई छात्राओं ने परीक्षा कार्यक्रम पर अपनी निराशा व्यक्त की। एक प्रदर्शनकारी छात्रा ने कहा, 'कर्नाटक में दशहरा एक बड़ा त्योहार है, और हम इसका हिस्सा बनना चाहते हैं। कॉलेज इस दौरान नियमित कक्षाएँ जारी रख सकता है, हमें कोई आपत्ति नहीं है। हिंदू होने के नाते, हम मंदिर जाना चाहते हैं, उत्सव में भाग लेना चाहते हैं और अपने परिवार के साथ समय बिताना चाहते हैं। क्या हमारी कोई भावना नहीं है?' यह ऐसे समय में आया है जब राज्य में सत्तारूढ़ दल और विपक्ष के बीच सांस्कृतिक एवं धार्मिक मुद्दों पर तनाव पहले से चर्चा में है।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि मंगलुरु जिले के उपायुक्त को ज्ञापन सौंपा जा चुका है और हस्तक्षेप की माँग की जा रही है। फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि कॉलेज प्रबंधन परीक्षा कार्यक्रम में बदलाव करेगा या नहीं। राज्य सरकार की आधिकारिक प्रतिक्रिया की प्रतीक्षा है। विजयेंद्र के बयान के बाद यह मामला राज्यस्तरीय राजनीतिक बहस का केंद्र बनता जा रहा है।