दशहरा छुट्टी विवाद: हिंदू संगठनों ने बेंगलुरु के प्राइवेट स्कूलों पर कार्रवाई की माँग की
सारांश
मुख्य बातें
श्रीराम सेना-कर्नाटक और हिंदू जन जागृति वेदिके ने 5 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में स्कूल शिक्षा विभाग से उन प्राइवेट स्कूलों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की, जो कथित तौर पर राज्य सरकार द्वारा घोषित दशहरा अवकाश के दौरान कक्षाएँ और परीक्षाएँ आयोजित कर रहे हैं। संगठनों का आरोप है कि ये संस्थान सरकारी आदेश को नज़रअंदाज़ करते हुए दिसंबर में क्रिसमस के अवसर पर लंबी छुट्टियाँ दे रहे हैं।
मुख्य घटनाक्रम
दोनों संगठनों ने रामनगर और बेंगलुरु दक्षिण जिले के स्कूल शिक्षा उप-निदेशक को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में माँग की गई कि सरकार की अधिसूचना के अनुसार 3 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक घोषित 19 दिन के अवकाश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। संगठनों के अनुसार, माता-पिता और आम नागरिकों की शिकायतों के बावजूद कुछ प्राइवेट स्कूल नियमित कक्षाएँ और परीक्षाएँ जारी रखे हुए थे।
संगठनों का पक्ष
श्रीराम सेना-कर्नाटक के जिला अध्यक्ष परमेश गौड़ा के. ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हो रही हैं। उनका कहना था कि दशहरा कर्नाटक का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्त्वपूर्ण पर्व है और सरकार ने इसीलिए अवकाश घोषित किया था ताकि छात्र अपने परिवारों के साथ समय बिताते हुए राज्य की सांस्कृतिक विरासत को आत्मसात कर सकें। संगठन ने यह भी बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से इस प्रथा का विरोध कर रहे हैं।
छात्रों पर असर
संगठन का तर्क है कि अवकाश-काल में कक्षाएँ और परीक्षाएँ आयोजित करने से छात्रों पर अनावश्यक मानसिक दबाव और तनाव पड़ता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में स्कूल-बच्चों में परीक्षा-तनाव को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। उनके अनुसार, सरकारी अवकाश अधिसूचना का उद्देश्य ही तब विफल हो जाता है जब शिक्षण संस्थान उसकी अनदेखी करें।
स्कूल प्रबंधन का विरोध
दूसरी ओर, कर्नाटक एसोसिएटेड मैनेजमेंट ऑफ प्राइमरी एंड सेकेंडरी स्कूल्स (KAMS) के डी. शशिकुमार ने इस माँग को 'पूरी तरह गलत' बताते हुए खारिज किया। उनका कहना था कि प्राइवेट और बिना सरकारी सहायता वाले स्कूलों को निर्धारित पाठ्यक्रम और शिक्षण-दिवसों का पालन करना अनिवार्य होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय त्योहारों पर स्कूलों को कुछ छूट दी गई है और वे हालात के अनुसार तीन से चार दिन की स्थानीय अवकाश दे सकते हैं।
आगे क्या होगा
फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह विवाद सरकारी अवकाश नीति और प्राइवेट स्कूलों की स्वायत्तता के बीच की खींचतान को उजागर करता है — एक ऐसा मुद्दा जो कर्नाटक में हर वर्ष दशहरे के मौसम में सतह पर आता है। यदि शिक्षा विभाग ज्ञापन पर संज्ञान लेता है, तो आने वाले दिनों में जाँच और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।