5 अक्टूबर 2026
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दशहरा छुट्टी विवाद: हिंदू संगठनों ने बेंगलुरु के प्राइवेट स्कूलों पर कार्रवाई की माँग की

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दशहरा छुट्टी विवाद: हिंदू संगठनों ने बेंगलुरु के प्राइवेट स्कूलों पर कार्रवाई की माँग की

सारांश

बेंगलुरु में दशहरे के मौसम में एक परिचित विवाद फिर गर्माया — श्रीराम सेना और हिंदू जन जागृति वेदिके ने सरकारी 19-दिनी अवकाश के दौरान कक्षाएँ चलाने वाले प्राइवेट स्कूलों पर कार्रवाई माँगी। KAMS ने माँग को 'पूरी तरह गलत' बताया। यह विवाद सरकारी आदेश और प्राइवेट स्कूल स्वायत्तता की टकराहट को उजागर करता है।

मुख्य बातें

श्रीराम सेना-कर्नाटक और हिंदू जन जागृति वेदिके ने 5 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में शिक्षा विभाग को ज्ञापन सौंपा।
कर्नाटक सरकार ने दशहरे पर 3 अक्टूबर से 21 अक्टूबर तक 19 दिन के अवकाश की घोषणा की है।
जिला अध्यक्ष परमेश गौड़ा के.
ने आरोप लगाया कि कुछ स्कूल दशहरे में छुट्टी नहीं देते लेकिन क्रिसमस में लंबी छुट्टी देते हैं।
संगठन पिछले तीन वर्षों से इस प्रथा का विरोध कर रहे हैं।
शशिकुमार ने माँग को 'पूरी तरह गलत' बताया; कहा प्राइवेट स्कूलों को स्थानीय त्योहार पर 3-4 दिन की छूट है।
शिक्षा विभाग की ओर से ज्ञापन पर अब तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं।

श्रीराम सेना-कर्नाटक और हिंदू जन जागृति वेदिके ने 5 अक्टूबर 2026 को बेंगलुरु में स्कूल शिक्षा विभाग से उन प्राइवेट स्कूलों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई की माँग की, जो कथित तौर पर राज्य सरकार द्वारा घोषित दशहरा अवकाश के दौरान कक्षाएँ और परीक्षाएँ आयोजित कर रहे हैं। संगठनों का आरोप है कि ये संस्थान सरकारी आदेश को नज़रअंदाज़ करते हुए दिसंबर में क्रिसमस के अवसर पर लंबी छुट्टियाँ दे रहे हैं।

मुख्य घटनाक्रम

दोनों संगठनों ने रामनगर और बेंगलुरु दक्षिण जिले के स्कूल शिक्षा उप-निदेशक को एक ज्ञापन सौंपा। ज्ञापन में माँग की गई कि सरकार की अधिसूचना के अनुसार 3 अक्टूबर से 21 अक्टूबर 2026 तक घोषित 19 दिन के अवकाश का सख्ती से पालन सुनिश्चित किया जाए। संगठनों के अनुसार, माता-पिता और आम नागरिकों की शिकायतों के बावजूद कुछ प्राइवेट स्कूल नियमित कक्षाएँ और परीक्षाएँ जारी रखे हुए थे।

संगठनों का पक्ष

श्रीराम सेना-कर्नाटक के जिला अध्यक्ष परमेश गौड़ा के. ने आरोप लगाया कि इस मुद्दे से हिंदुओं की धार्मिक भावनाएँ आहत हो रही हैं। उनका कहना था कि दशहरा कर्नाटक का ऐतिहासिक और सांस्कृतिक रूप से महत्त्वपूर्ण पर्व है और सरकार ने इसीलिए अवकाश घोषित किया था ताकि छात्र अपने परिवारों के साथ समय बिताते हुए राज्य की सांस्कृतिक विरासत को आत्मसात कर सकें। संगठन ने यह भी बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से इस प्रथा का विरोध कर रहे हैं।

छात्रों पर असर

संगठन का तर्क है कि अवकाश-काल में कक्षाएँ और परीक्षाएँ आयोजित करने से छात्रों पर अनावश्यक मानसिक दबाव और तनाव पड़ता है। गौरतलब है कि यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में स्कूल-बच्चों में परीक्षा-तनाव को लेकर चिंताएँ बढ़ रही हैं। उनके अनुसार, सरकारी अवकाश अधिसूचना का उद्देश्य ही तब विफल हो जाता है जब शिक्षण संस्थान उसकी अनदेखी करें।

स्कूल प्रबंधन का विरोध

दूसरी ओर, कर्नाटक एसोसिएटेड मैनेजमेंट ऑफ प्राइमरी एंड सेकेंडरी स्कूल्स (KAMS) के डी. शशिकुमार ने इस माँग को 'पूरी तरह गलत' बताते हुए खारिज किया। उनका कहना था कि प्राइवेट और बिना सरकारी सहायता वाले स्कूलों को निर्धारित पाठ्यक्रम और शिक्षण-दिवसों का पालन करना अनिवार्य होता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि स्थानीय त्योहारों पर स्कूलों को कुछ छूट दी गई है और वे हालात के अनुसार तीन से चार दिन की स्थानीय अवकाश दे सकते हैं।

आगे क्या होगा

फिलहाल शिक्षा विभाग की ओर से ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह विवाद सरकारी अवकाश नीति और प्राइवेट स्कूलों की स्वायत्तता के बीच की खींचतान को उजागर करता है — एक ऐसा मुद्दा जो कर्नाटक में हर वर्ष दशहरे के मौसम में सतह पर आता है। यदि शिक्षा विभाग ज्ञापन पर संज्ञान लेता है, तो आने वाले दिनों में जाँच और कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो उसके अनुपालन की जवाबदेही किसकी है? शिक्षा विभाग यदि हर साल ज्ञापन लेकर चुप रह जाता है, तो अधिसूचना महज कागजी खानापूर्ति बन जाती है। दूसरी ओर, KAMS का तर्क भी पूरी तरह खारिज करने योग्य नहीं — पाठ्यक्रम पूर्ण करने का दबाव वास्तविक है। इस टकराहट का स्थायी समाधान तभी संभव है जब शिक्षा विभाग अनुपालन तंत्र को पारदर्शी और बाध्यकारी बनाए, न कि हर वर्ष ज्ञापनों का इंतजार करे।
RashtraPress
5 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कर्नाटक में दशहरा अवकाश विवाद क्या है?
कर्नाटक सरकार ने दशहरे पर 3 से 21 अक्टूबर 2026 तक 19 दिन के स्कूल अवकाश की घोषणा की है। श्रीराम सेना-कर्नाटक और हिंदू जन जागृति वेदिके का आरोप है कि कुछ प्राइवेट स्कूल इस आदेश का उल्लंघन करते हुए इस अवधि में कक्षाएँ और परीक्षाएँ जारी रख रहे हैं।
श्रीराम सेना ने क्या माँग की है?
श्रीराम सेना-कर्नाटक और हिंदू जन जागृति वेदिके ने रामनगर और बेंगलुरु दक्षिण जिले के स्कूल शिक्षा उप-निदेशक को ज्ञापन सौंपकर माँग की है कि सरकारी दशहरा अवकाश आदेश का उल्लंघन करने वाले प्राइवेट स्कूलों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाए।
प्राइवेट स्कूल संगठन KAMS ने इस माँग पर क्या कहा?
KAMS के डी. शशिकुमार ने माँग को 'पूरी तरह गलत' बताया। उनका कहना है कि प्राइवेट स्कूलों को निर्धारित पाठ्यक्रम और शिक्षण-दिवस पूरे करने होते हैं और स्थानीय त्योहारों पर उन्हें केवल तीन से चार दिन की छूट मिलती है।
क्या यह विवाद पहले भी उठा है?
हाँ, संगठन ने स्वयं बताया कि वे पिछले तीन वर्षों से इस प्रथा का विरोध कर रहे हैं। हर वर्ष दशहरे के अवसर पर यह मुद्दा उठता है, परंतु अभी तक कोई स्थायी नीतिगत समाधान सामने नहीं आया है।
शिक्षा विभाग ने इस ज्ञापन पर क्या प्रतिक्रिया दी?
अभी तक स्कूल शिक्षा विभाग की ओर से ज्ञापन पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया या कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई है। विभाग के रुख पर सभी की नजर बनी हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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