दशहरा लाइटिंग बढ़ाने पर BJP का CM शिवकुमार पर हमला, किसानों को थ्री-फेज बिजली की माँग
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने 22 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक सरकार पर तीखा निशाना साधा — मैसूरु दशहरा की सजावटी रोशनी को 15 दिन और बढ़ाने के फैसले को लेकर। अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से माँग की कि वे उत्सव की चमक-दमक से ध्यान हटाकर सूखे की मार झेल रहे किसानों को रोज़ाना थ्री-फेज बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करें।
मुख्य आरोप और राजनीतिक हमला
विधान सौधा के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए अशोक ने कहा कि एक तरफ पानी की कमी से फसलें सूख रही हैं और किसान संकट में हैं, वहीं राज्य सरकार पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विदेशी मेहमानों को आमंत्रित कर भव्य आयोजन करने में व्यस्त है। उन्होंने कहा, 'राज्य में सूखे के हालात हैं और किसान आँसू बहा रहे हैं — क्या अब आप हमारे उन किसानों के आँसू पोंछेंगे जो भारी संकट में हैं?'
अशोक ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा कि क्या सरकार कम-से-कम इतनी चिंता दिखाएगी कि किसानों के सूखते खेतों के लिए प्रतिदिन एक घंटे की थ्री-फेज बिजली आपूर्ति हो सके, 'ताकि उनके जीवन में भी कुछ रोशनी आ सके।' BJP नेता ने आरोप लगाया कि सरकार दशहरा की सजावट पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, जबकि किसानों के पंप सेटों के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने को तैयार नहीं है।
सरकार का रुख और सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल
दूसरी ओर, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने सोमवार को कहा कि वे अगले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और राज्य में सूखे से राहत के लिए ज्ञापन सौंपेंगे। विधान सौधा में मीडिया से बातचीत में शिवकुमार ने बताया कि विपक्ष के नेताओं ने भी इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने की इच्छा जताई है।
शिवकुमार ने कहा, 'हम सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री से मिलेंगे और उन्हें एक ज्ञापन सौंपेंगे। सूखे की समस्या सिर्फ कर्नाटक तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई अन्य हिस्सों पर भी इसका असर पड़ा है। अगर प्रधानमंत्री हमें दशहरा और कन्नड़ राज्योत्सव के बीच का समय देते हैं, तो हम उनसे मिलकर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।'
विरोधाभास की राजनीति
यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई जिले लगातार दूसरे वर्ष सूखे की चपेट में बताए जा रहे हैं और किसान संगठनों ने बिजली आपूर्ति की अनियमितता को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बनाना शुरू किया है। गौरतलब है कि मैसूरु दशहरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध उत्सव है और सरकार के लिए पर्यटन राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है — यही विरोधाभास इस राजनीतिक बहस की जड़ में है।
BJP के आलोचकों का कहना है कि उत्सव खर्च और कृषि राहत के बीच संतुलन न बना पाना, सत्तारूढ़ गठबंधन की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।
आम जनता और किसानों पर असर
अशोक के अनुसार, राज्य के किसान फसल उगाने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं और पंप सेटों के लिए बिजली पर निर्भर हैं। यदि थ्री-फेज आपूर्ति नियमित नहीं होती, तो सिंचाई बाधित होती है और सूखे में खड़ी फसलें नष्ट हो जाती हैं। उन्होंने कहा, 'उनके दिखावे और चकाचौंध से किसानों की जिंदगी नहीं बदलने वाली। बहुत हो गया यह फिजूलखर्च; अब शासन-प्रशासन पर ध्यान दें।'
क्या होगा आगे
सूखा राहत को लेकर सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का प्रधानमंत्री मोदी से मिलना अगले सप्ताह प्रस्तावित है, जो दशहरा और कन्नड़ राज्योत्सव के बीच की तारीख पर निर्भर करेगा। मैसूरु में दशहरा की सजावटी रोशनी 15 दिन और जारी रहने की योजना है। राज्य में बिजली आपूर्ति और सूखा राहत का मुद्दा आने वाले हफ्तों में और राजनीतिक रंग लेने की संभावना है।