22 अक्टूबर 2026
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दशहरा लाइटिंग बढ़ाने पर BJP का CM शिवकुमार पर हमला, किसानों को थ्री-फेज बिजली की माँग

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दशहरा लाइटिंग बढ़ाने पर BJP का CM शिवकुमार पर हमला, किसानों को थ्री-फेज बिजली की माँग

सारांश

दशहरा की रोशनी बढ़ाना जश्न है या जवाबदेही से बचना? BJP ने यही सवाल CM शिवकुमार के सामने रखा है — एक तरफ सूखे में तड़पते किसान, दूसरी तरफ मैसूरु की जगमगाहट। करोड़ों का उत्सव खर्च बनाम पंप सेटों के लिए बिजली — यह विरोधाभास अब कर्नाटक की राजनीति का केंद्र बन गया है।

मुख्य बातें

अशोक ने 22 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक सरकार पर दशहरा लाइटिंग को 15 दिन और बढ़ाने को लेकर निशाना साधा।
शिवकुमार से माँग की कि सूखाग्रस्त किसानों के पंप सेटों के लिए प्रतिदिन थ्री-फेज बिजली सुनिश्चित की जाए।
BJP का आरोप — सरकार दशहरा सजावट पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, लेकिन किसानों को बिजली नहीं दे रही।
CM शिवकुमार अगले सप्ताह PM मोदी से मिलने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और सूखा राहत ज्ञापन सौंपेंगे।
विपक्षी नेताओं ने भी प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने की इच्छा जताई है; मुलाकात दशहरा और कन्नड़ राज्योत्सव के बीच प्रस्तावित है।

भारतीय जनता पार्टी (BJP) के वरिष्ठ नेता आर. अशोक ने 22 अक्टूबर 2026 को कर्नाटक सरकार पर तीखा निशाना साधा — मैसूरु दशहरा की सजावटी रोशनी को 15 दिन और बढ़ाने के फैसले को लेकर। अशोक ने मुख्यमंत्री डी.के. शिवकुमार से माँग की कि वे उत्सव की चमक-दमक से ध्यान हटाकर सूखे की मार झेल रहे किसानों को रोज़ाना थ्री-फेज बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करें।

मुख्य आरोप और राजनीतिक हमला

विधान सौधा के बाहर पत्रकारों से बात करते हुए अशोक ने कहा कि एक तरफ पानी की कमी से फसलें सूख रही हैं और किसान संकट में हैं, वहीं राज्य सरकार पड़ोसी राज्यों के मुख्यमंत्रियों और विदेशी मेहमानों को आमंत्रित कर भव्य आयोजन करने में व्यस्त है। उन्होंने कहा, 'राज्य में सूखे के हालात हैं और किसान आँसू बहा रहे हैं — क्या अब आप हमारे उन किसानों के आँसू पोंछेंगे जो भारी संकट में हैं?'

अशोक ने व्यंग्यात्मक लहजे में पूछा कि क्या सरकार कम-से-कम इतनी चिंता दिखाएगी कि किसानों के सूखते खेतों के लिए प्रतिदिन एक घंटे की थ्री-फेज बिजली आपूर्ति हो सके, 'ताकि उनके जीवन में भी कुछ रोशनी आ सके।' BJP नेता ने आरोप लगाया कि सरकार दशहरा की सजावट पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, जबकि किसानों के पंप सेटों के लिए पर्याप्त बिजली उपलब्ध कराने को तैयार नहीं है।

सरकार का रुख और सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल

दूसरी ओर, मुख्यमंत्री शिवकुमार ने सोमवार को कहा कि वे अगले सप्ताह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने के लिए एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करेंगे और राज्य में सूखे से राहत के लिए ज्ञापन सौंपेंगे। विधान सौधा में मीडिया से बातचीत में शिवकुमार ने बताया कि विपक्ष के नेताओं ने भी इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने की इच्छा जताई है।

शिवकुमार ने कहा, 'हम सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ प्रधानमंत्री से मिलेंगे और उन्हें एक ज्ञापन सौंपेंगे। सूखे की समस्या सिर्फ कर्नाटक तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के कई अन्य हिस्सों पर भी इसका असर पड़ा है। अगर प्रधानमंत्री हमें दशहरा और कन्नड़ राज्योत्सव के बीच का समय देते हैं, तो हम उनसे मिलकर इस मुद्दे पर चर्चा करेंगे।'

विरोधाभास की राजनीति

यह ऐसे समय में आया है जब कर्नाटक के कई जिले लगातार दूसरे वर्ष सूखे की चपेट में बताए जा रहे हैं और किसान संगठनों ने बिजली आपूर्ति की अनियमितता को लेकर राज्य सरकार पर दबाव बनाना शुरू किया है। गौरतलब है कि मैसूरु दशहरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रसिद्ध उत्सव है और सरकार के लिए पर्यटन राजस्व का महत्वपूर्ण स्रोत माना जाता है — यही विरोधाभास इस राजनीतिक बहस की जड़ में है।

BJP के आलोचकों का कहना है कि उत्सव खर्च और कृषि राहत के बीच संतुलन न बना पाना, सत्तारूढ़ गठबंधन की प्राथमिकताओं पर सवाल खड़े करता है।

आम जनता और किसानों पर असर

अशोक के अनुसार, राज्य के किसान फसल उगाने के लिए दिन-रात मेहनत करते हैं और पंप सेटों के लिए बिजली पर निर्भर हैं। यदि थ्री-फेज आपूर्ति नियमित नहीं होती, तो सिंचाई बाधित होती है और सूखे में खड़ी फसलें नष्ट हो जाती हैं। उन्होंने कहा, 'उनके दिखावे और चकाचौंध से किसानों की जिंदगी नहीं बदलने वाली। बहुत हो गया यह फिजूलखर्च; अब शासन-प्रशासन पर ध्यान दें।'

क्या होगा आगे

सूखा राहत को लेकर सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का प्रधानमंत्री मोदी से मिलना अगले सप्ताह प्रस्तावित है, जो दशहरा और कन्नड़ राज्योत्सव के बीच की तारीख पर निर्भर करेगा। मैसूरु में दशहरा की सजावटी रोशनी 15 दिन और जारी रहने की योजना है। राज्य में बिजली आपूर्ति और सूखा राहत का मुद्दा आने वाले हफ्तों में और राजनीतिक रंग लेने की संभावना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि राज्य सरकार की प्राथमिकताओं की जाँच का है। दशहरा के लिए करोड़ों खर्च और साथ ही PM को सूखा राहत ज्ञापन — इस दोहरेपन को BJP ने कुशलता से उठाया है। असली सवाल यह है कि क्या सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल का दिल्ली दौरा ठोस राहत पैकेज लाएगा, या यह राजनीतिक छवि प्रबंधन तक सीमित रहेगा। कर्नाटक के किसानों के लिए बिजली आपूर्ति की अनियमितता पुरानी समस्या है — नई सरकार, पुरानी शिकायत।
RashtraPress
22 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

BJP नेता आर. अशोक ने CM शिवकुमार पर क्या आरोप लगाए?
अशोक ने आरोप लगाया कि राज्य सरकार दशहरा की सजावटी रोशनी पर करोड़ों रुपये खर्च कर रही है, जबकि सूखाग्रस्त किसानों के पंप सेटों के लिए पर्याप्त थ्री-फेज बिजली उपलब्ध नहीं कराई जा रही। उन्होंने CM से माँग की कि किसानों के खेतों के लिए कम-से-कम रोज़ाना एक घंटे की थ्री-फेज बिजली सुनिश्चित हो।
मैसूरु दशहरा की सजावटी रोशनी कितने दिन और बढ़ाई गई है?
कर्नाटक सरकार ने मैसूरु दशहरा की सजावटी रोशनी को 15 दिन और जारी रखने की योजना बनाई है। इसी फैसले पर BJP ने सूखे में फँसे किसानों से तुलना करते हुए सरकार की प्राथमिकताओं पर सवाल उठाए हैं।
CM शिवकुमार प्रधानमंत्री मोदी से कब और क्यों मिलने वाले हैं?
CM शिवकुमार ने कहा कि वे अगले सप्ताह एक सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल के साथ PM मोदी से मिलेंगे और राज्य में सूखे से राहत के लिए ज्ञापन सौंपेंगे। यह मुलाकात दशहरा और कन्नड़ राज्योत्सव के बीच की तारीख पर निर्भर करेगी।
क्या विपक्ष भी सूखा राहत प्रतिनिधिमंडल में शामिल होगा?
CM शिवकुमार के अनुसार, विपक्ष के नेताओं ने भी PM मोदी से मिलने वाले इस प्रतिनिधिमंडल में शामिल होने की इच्छा जताई है। सूखे की समस्या को उन्होंने सिर्फ कर्नाटक नहीं, बल्कि देश के कई हिस्सों की समस्या बताया।
कर्नाटक में किसानों की बिजली समस्या क्या है?
कर्नाटक के सूखाग्रस्त जिलों में किसान खेतों की सिंचाई के लिए पंप सेटों पर निर्भर हैं, जिनके लिए थ्री-फेज बिजली की नियमित आपूर्ति आवश्यक है। BJP नेता अशोक के अनुसार, अनियमित बिजली के कारण फसलें नष्ट हो रही हैं और किसान गहरे संकट में हैं।
राष्ट्र प्रेस
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