ई-मुद्रा सुरक्षा जांच: सरकार ने विशेष टीम गठित की, तीन दिन में शेयर 35% गिरा
सारांश
मुख्य बातें
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने बुधवार, 22 अक्टूबर 2026 को डिजिटल सर्टिफिकेट प्रदाता कंपनी ई-मुद्रा में हुई एक गंभीर साइबर सुरक्षा घटना की जांच के लिए एक विशेष टीम गठित करने की घोषणा की। इस खुलासे के बाद कंपनी के शेयरों में भारी बिकवाली शुरू हो गई और बीते तीन कारोबारी दिनों में शेयर 35 प्रतिशत तक लुढ़क गए।
शेयर बाज़ार में भारी गिरावट
गुरुवार को दोपहर 2 बजे IST तक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) पर ई-मुद्रा के शेयर 18.66 प्रतिशत की गिरावट के साथ ₹351.40 प्रति शेयर पर कारोबार कर रहे थे। सोमवार को यही शेयर ₹540.15 पर बंद हुए थे। बीते छह महीनों में शेयर 30 प्रतिशत और पिछले एक वर्ष में 46 प्रतिशत से अधिक टूट चुके हैं।
सुरक्षा घटना का स्वरूप
साइबर सुरक्षा निगरानी संस्था सीईआरटी-इन (CERT-In) की एक एडवाइजरी के बाद यह मामला सामने आया। कंपनी ने सीईआरटी-इन को सूचित किया था कि उसके सर्टिफिकेट से जुड़ी प्राइवेट 'की' सुरक्षित नहीं रही हैं। ये 'की' भरोसेमंद डिजिटल एसेट्स को सत्यापित करती हैं और सुरक्षित ऑनलाइन लेनदेन सुनिश्चित करती हैं। कंपनी के सिस्टम में एक तकनीकी खामी के कारण मजबूत क्रिप्टोग्राफिक 'की' के साथ-साथ कुछ कमजोर 'की' भी तैयार हो गई थीं।
सरकार और कंपनी का पक्ष
मंत्रालय के आधिकारिक बयान के अनुसार यह सुरक्षा घटना मुख्य रूप से ग्लोबल सर्टिफिकेट कारोबार से संबंधित है और भारतीय वेबसाइटों तथा एप्लिकेशन्स पर इसका असर 'बहुत सीमित' बताया गया है। ई-मुद्रा ने भी स्पष्ट किया है कि यह समस्या उनके अंतरराष्ट्रीय ट्रांसपोर्ट लेयर सिक्योरिटी (TLS) सर्टिफिकेट कारोबार के एक छोटे हिस्से तक सीमित है, और घरेलू डिजिटल सिग्नेचर ऑपरेशंस पर इसका कोई प्रभाव नहीं है।
ई-मुद्रा क्या करती है
ई-मुद्रा डिजिटल सिग्नेचर और आम जनता की सुलभता के लिए वेबसाइट्स को सिक्योरिटी सर्टिफिकेट जारी करने वाली एक प्रमुख कंपनी है। इसके डिजिटल सर्टिफिकेट ब्राउज़रों को यह पुष्टि करने में मदद करते हैं कि कोई वेबसाइट असली है या नकली। गौरतलब है कि इस तरह के सर्टिफिकेट प्रदाता की सुरक्षा में सेंध पूरे डिजिटल पारितंत्र के लिए चिंता का विषय बन सकती है।
आगे क्या होगा
मंत्रालय द्वारा गठित विशेष जांच टीम मामले की पूरी पड़ताल करेगी। बाज़ार विश्लेषकों के अनुसार जब तक जांच के नतीजे सामने नहीं आते, निवेशकों की धारणा दबाव में बनी रह सकती है। यह देखना अहम होगा कि सरकार की जांच में घरेलू डिजिटल बुनियादी ढाँचे पर असर की वास्तविक सीमा क्या निकलती है।