22 अक्टूबर 2026
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भारतीय नौसेना के INS तीर, INS सुजाता और ICGS सारथी माले पहुंचे, भारत-मालदीव समुद्री सहयोग को मिली नई मजबूती

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भारतीय नौसेना के INS तीर, INS सुजाता और ICGS सारथी माले पहुंचे, भारत-मालदीव समुद्री सहयोग को मिली नई मजबूती

सारांश

भारतीय नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के तीन पोत — INS तीर, INS सुजाता और ICGS सारथी — माले पहुंचे हैं। यह यात्रा 'महासागर' परिकल्पना के तहत हिंद महासागर में भारत की साझेदारी रणनीति का हिस्सा है और भारत-मालदीव के बीच समुद्री सहयोग को व्यावहारिक मजबूती देती है।

मुख्य बातें

भारतीय नौसेना के आईएनएस तीर और आईएनएस सुजाता तथा तटरक्षक पोत आईसीजीएस सारथी 22 अक्टूबर 2026 को माले पहुंचे।
तीनों पोत प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1 TS) के लंबी दूरी के प्रशिक्षण अभियान का हिस्सा हैं।
वरिष्ठ नौसेना अधिकारी ने MNDF प्रमुख , मालदीव तटरक्षक कमांडेंट और उच्चायुक्त जी.
बालासुब्रमण्यम से मुलाकात की।
प्रशिक्षु अधिकारियों ने गिरिफुशी प्रशिक्षण केंद्र का दौरा किया; पोत भ्रमण, खेल प्रतियोगिताएं और सामाजिक कार्यक्रम आयोजित होंगे।
यह अभियान भारत की 'महासागर' परिकल्पना और हिंद महासागर क्षेत्रीय सुरक्षा रणनीति के अनुरूप है।
इससे पहले स्क्वाड्रन सिंगापुर , इंडोनेशिया और थाईलैंड का दौरा कर संयुक्त समुद्री अभ्यास कर चुका है।

भारतीय नौसेना के आईएनएस तीर और आईएनएस सुजाता तथा भारतीय तटरक्षक बल के पोत आईसीजीएस सारथी — तीनों समुद्री जहाज 22 अक्टूबर 2026 को मालदीव की राजधानी माले के तट पर पहुंचे। नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन (1 TS) के तहत आया यह दल लंबी दूरी के प्रशिक्षण अभियान के एक महत्वपूर्ण पड़ाव के रूप में माले पहुंचा है, और यह यात्रा भारत-मालदीव समुद्री साझेदारी को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है।

मालदीव रक्षा बल ने किया गर्मजोशी से स्वागत

माले पहुंचने पर मालदीव राष्ट्रीय रक्षा बल (MNDF) ने भारतीय पोतों का औपचारिक स्वागत किया। प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन के वरिष्ठ अधिकारी ने MNDF प्रमुख और मालदीव तटरक्षक बल के कमांडेंट से मुलाकात की। दोनों पक्षों के बीच हुई वार्ता में निरंतर संपर्क बनाए रखने और समुद्री क्षेत्र में बहुआयामी सहयोग को और गहरा करने पर सहमति जताई गई।

उच्चायुक्त से मुलाकात और गिरिफुशी प्रशिक्षण केंद्र का दौरा

इस यात्रा के दौरान वरिष्ठ नौसेना अधिकारी ने मालदीव में भारत के उच्चायुक्त जी. बालासुब्रमण्यम से भी भेंट की। इसके साथ ही भारतीय नौसेना के प्रशिक्षु अधिकारी मालदीव के गिरिफुशी प्रशिक्षण केंद्र पहुंचे, जहाँ उन्हें स्थानीय प्रशिक्षण संस्थान और उसकी गतिविधियों को करीब से समझने का अवसर मिला। यह आदान-प्रदान दोनों देशों की नौसैनिक शिक्षा प्रणालियों के बीच तालमेल बढ़ाने की दृष्टि से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

सामाजिक और खेल गतिविधियों से बढ़ेगी मित्रता

नौसेना के अनुसार, इस अभियान के तहत दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने के लिए कई गतिविधियां आयोजित की जाएंगी। इनमें एक-दूसरे के पोतों का दौरा, खेल प्रतियोगिताएं, सामाजिक मेल-मिलाप और जनसंपर्क कार्यक्रम शामिल हैं। इन आयोजनों का मूल उद्देश्य दोनों देशों के सैन्य बलों के बीच आपसी समझ और विश्वास को और प्रगाढ़ करना है।

'महासागर' परिकल्पना और हिंद महासागर रणनीति

भारतीय नौसेना ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान 'महासागर' — यानी 'क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति' — की परिकल्पना के अनुरूप है। इस ढाँचे के तहत भारत हिंद महासागर क्षेत्र में साझेदार देशों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा, प्रशिक्षण और सहयोग को आगे बढ़ाने पर जोर दे रहा है। गौरतलब है कि इससे पहले प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन दक्षिण-पूर्व एशिया में तैनाती पर था और सिंगापुर, इंडोनेशिया तथा थाईलैंड के अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों का दौरा करते हुए वहाँ की नौसेनाओं के साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास भी कर चुका है।

भारत-मालदीव संबंधों के लिए अहमियत

यह यात्रा ऐसे समय में आई है जब भारत-मालदीव द्विपक्षीय संबंध हाल के वर्षों में कई उतार-चढ़ाव देख चुके हैं। इस संदर्भ में नौसेना का यह कदम राजनयिक स्तर पर भी महत्व रखता है — यह संकेत देता है कि दोनों देश समुद्री सुरक्षा सहयोग के जरिए अपनी रणनीतिक साझेदारी को व्यावहारिक धरातल पर बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध हैं। आने वाले दिनों में इस यात्रा के दौरान होने वाले संयुक्त कार्यक्रम भविष्य के अभ्यासों और सहयोग की नींव तैयार करेंगे।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

भारतीय नौसेना के कौन से जहाज मालदीव पहुंचे हैं?
भारतीय नौसेना के आईएनएस तीर और आईएनएस सुजाता तथा भारतीय तटरक्षक बल का पोत आईसीजीएस सारथी 22 अक्टूबर 2026 को मालदीव की राजधानी माले पहुंचे। ये तीनों पोत नौसेना के प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन का हिस्सा हैं।
भारतीय नौसेना की मालदीव यात्रा का उद्देश्य क्या है?
यह यात्रा लंबी दूरी के प्रशिक्षण अभियान के तहत है, जिसका उद्देश्य भारत-मालदीव समुद्री सहयोग को मजबूत करना, संयुक्त प्रशिक्षण गतिविधियां संचालित करना और दोनों देशों के सैन्य बलों के बीच आपसी समझ बढ़ाना है।
'महासागर' परिकल्पना क्या है जिसका ज़िक्र इस अभियान में हुआ है?
'महासागर' का पूरा अर्थ है 'क्षेत्रों में सुरक्षा और विकास के लिए पारस्परिक एवं समग्र उन्नति'। यह भारत की हिंद महासागर क्षेत्रीय रणनीति है, जिसके तहत भारत पड़ोसी और साझेदार देशों के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा, प्रशिक्षण और सहयोग को बढ़ावा देता है।
प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन इससे पहले किन देशों का दौरा कर चुका है?
मालदीव से पहले प्रथम प्रशिक्षण स्क्वाड्रन दक्षिण-पूर्व एशिया के दौरे पर था और सिंगापुर, इंडोनेशिया तथा थाईलैंड के अंतरराष्ट्रीय बंदरगाहों पर जा चुका है। वहाँ भारतीय नौसेना के अधिकारियों और जवानों ने मेजबान देशों की नौसेनाओं के साथ संयुक्त समुद्री अभ्यास भी किए।
इस यात्रा के दौरान भारत और मालदीव के बीच क्या गतिविधियां होंगी?
दोनों देशों के नौसैनिकों के बीच एक-दूसरे के पोतों का दौरा, खेल प्रतियोगिताएं, सामाजिक मेल-मिलाप और जनसंपर्क कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इसके साथ ही भारतीय प्रशिक्षु अधिकारियों ने मालदीव के गिरिफुशी प्रशिक्षण केंद्र का दौरा किया।
राष्ट्र प्रेस
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