क्या बीएमसी चुनाव में पूनम महाजन का मानना है कि महायुति मुंबई का विकास करेगी?

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क्या बीएमसी चुनाव में पूनम महाजन का मानना है कि महायुति मुंबई का विकास करेगी?

सारांश

बीएमसी चुनावों में पूनम महाजन ने शिवसेना और मनसे के गठबंधन को सेल्फ सर्वाइवल करार दिया, और जनता की अपेक्षाओं पर जोर दिया कि भाजपा और शिवसेना का महायुति मुंबई का विकास करें। यह चुनाव न केवल राजनीतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि मुंबई के भविष्य के लिए भी।

Key Takeaways

  • बीएमसी चुनाव में महायुति का महत्व
  • पूनम महाजन का विकास पर जोर
  • जनता का विश्वास भाजपा और शिवसेना पर
  • स्थानीय समस्याओं का समाधान प्राथमिकता
  • राजनीति से अधिक विकास पर ध्यान

मुंबई, 11 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। बीएमसी चुनाव को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। भाजपा की नेता पूनम महाजन ने शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के गठबंधन को सेल्फ सर्वाइवल का गठबंधन बताया। पूर्व सांसद ने कहा कि जनता चाहती है कि मुंबई का विकास भाजपा और शिवसेना की महायुति के माध्यम से हो।

शिवसेना (यूबीटी) और मनसे के गठबंधन पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए पूनम महाजन ने इसे “सुविधा का गठबंधन” नहीं, बल्कि “सेल्फ सर्वाइवल का गठबंधन” करार दिया।

राष्ट्र प्रेस से बातचीत में उन्होंने कहा कि इस पर ज्यादा टिप्पणी करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि जनता पहले से जानती है कि पिछले कुछ वर्षों में किन गठबंधनों का क्या उद्देश्य रहा है और कैसे विकास के मुद्दों को नजरअंदाज कर स्वार्थ को प्राथमिकता दी गई। भाजपा ने हमेशा विकास के लिए गठबंधन किया है और पार्टी उन दलों के साथ खड़ी है, जिनका हिंदुत्व में विश्वास है। 2019 के बाद उस विचारधारा को पूरी तरह से दरकिनार कर दिया गया था, लेकिन लोकसभा और विधानसभा चुनावों के परिणामों से स्पष्ट है कि जनता ने ऐसे प्रयोगों को नकार दिया है।

पूनम महाजन ने कहा कि जनता चाहती है कि मुंबई का विकास भाजपा और शिवसेना की महायुति के माध्यम से हो, क्योंकि लोगों ने जमीनी स्तर पर इस गठबंधन का कार्य देखा है। उन्होंने ठाकरे बंधुओं पर मराठी मुद्दे को लेकर भावनात्मक राजनीति करने का आरोप लगाया और कहा कि मराठी का मुद्दा पहले भी था, लेकिन उस समय इसके लिए क्या ठोस काम किया गया, यह जनता जानती है। आज लोग जाति और धर्म की राजनीति नहीं चाहते, बल्कि स्थानीय समस्याओं का समाधान चाहते हैं और महायुति का फोकस राजनीति से ज्यादा विकास पर है।

पूनम महाजन ने कहा कि यह चुनाव न केवल राजनीतिक दृष्टि से, बल्कि मुंबई के भविष्य और यहां रहने वाले लोगों के कल्याण के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण है। भले ही महाराष्ट्र में 29 स्थानीय निकाय चुनाव हो रहे हों, लेकिन राजनीतिक और आर्थिक दृष्टि से सबकी नजर मुंबई पर रहती है, क्योंकि यह देश की आर्थिक राजधानी है। मुंबई जिस प्रकार से मेहनत करती है, उसका सीधा योगदान देश और महाराष्ट्र की ताकत को मजबूत करने में होता है। इसलिए भाजपा इस चुनाव को केवल सत्ता के नजरिए से नहीं, बल्कि मुंबई के विकास और नागरिकों के जीवन स्तर को बेहतर बनाने के दृष्टिकोण से देखती है।

पूनम महाजन ने कहा कि इस बार मुंबई नगर निगम चुनाव को पूरे मेट्रोपॉलिटन रीजन के संदर्भ में देखा जा रहा है, क्योंकि नौ बड़ी नगर निगमों के चुनाव एक साथ हो रहे हैं और इन सभी के केंद्र में मुंबई है। आने वाले समय में बहुमत हासिल करने के लिए भाजपा छोटी-छोटी लेकिन महत्वपूर्ण बातों पर ध्यान दे रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वर्ष 2014 में मुंबई के विकास के लिए एक बड़ा मास्टर प्लान तैयार किया था और उस विजन को आगे बढ़ाने के लिए बीएमसी चुनाव जीतना आवश्यक है। इससे मुंबई के विकास को नई मजबूती मिलेगी और ‘वर्ल्ड क्लास सिटी’ के लक्ष्य को वास्तविकता में बदला जा सकेगा।

महायुति में शिंदे और देवेंद्र फड़नवीस के बीच कथित ‘कोल्ड वॉर’ के प्रश्न पर पूनम महाजन ने कहा कि स्थानीय निकाय चुनावों में कभी-कभी सभी दलों और नेताओं को अपनी-अपनी जगह बनानी पड़ती है, जिससे कुछ मतभेद सामने आते हैं। अजीत पवार कभी-कभी भावनात्मक होकर कुछ बयान दे देते हैं, लेकिन बाद में उसका स्पष्टीकरण भी देते हैं।

एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फड़नवीस के बीच बेहतर तालमेल है, जो जमीनी स्तर पर साफ नजर आता है। मुंबई समेत जिन क्षेत्रों में वह काम कर रही हैं, वहां शिंदे गुट की शिवसेना और भाजपा के कार्यकर्ता मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने माना कि साथ काम करने के दौरान हल्की-फुल्की नोकझोंक हो जाती है, लेकिन लक्ष्य हमेशा जनता की सेवा ही रहता है।

पूनम महाजन ने स्थानीय निकाय चुनावों की चुनौतियों का जिक्र करते हुए कहा कि इन चुनावों में उम्मीदवारों की संख्या ज्यादा होती है और हर पार्टी का अपना मजबूत कैडर होता है, जिससे तालमेल बिठाना चुनौतीपूर्ण हो जाता है। उन्होंने 1995 का उदाहरण देते हुए बताया कि उस समय संभाजीनगर में शिवसेना-भाजपा सरकार होने के बावजूद दोनों दल अलग-अलग चुनाव लड़ रहे थे। तब प्रमोद महाजन ने कहा था कि जैसे टेस्ट मैच में सौरव गांगुली कोलकाता के लिए और सचिन तेंदुलकर महाराष्ट्र के लिए खेलते हैं, लेकिन जब देश की बात आती है तो दोनों टीम इंडिया के लिए लड़ते हैं। उसी तरह भाजपा और शिवसेना भी देश और महाराष्ट्र के हित में एकजुट रहती हैं।

पूनम महाजन ने महाराष्ट्र की राजनीति में परिवारवाद पर भी निशाना साधते हुए कहा कि कई जगहों पर राजनीतिक पार्टियां परिवार-संचालित संगठनों में बदलती जा रही हैं, जहां शासन जनता का नहीं, बल्कि परिवार का होता है। उन्होंने वसई-विरार का उदाहरण देते हुए आरोप लगाया कि 35 वर्षों तक इस क्षेत्र के साथ ऐसा व्यवहार किया गया, जैसे वह इमरजेंसी जोन हो। इसे एक पारिवारिक गढ़ बनाकर रखा गया और विकास को नजरअंदाज किया गया।

उन्होंने कहा कि 2014 से 2019 के बीच भाजपा ने वसई-विरार में बड़े बदलाव के लिए काम किया। कोस्टल रोड के विस्तार, उसे वधावन पोर्ट से जोड़ने, विरार में एयरपोर्ट लाने और बुलेट ट्रेन परियोजना को आगे बढ़ाने जैसे कई विकासात्मक प्रयास किए गए। पार्टी का उद्देश्य उस क्षेत्र में चौतरफा विकास करना था।

पूनम महाजन ने कहा कि मुंबई की मिट्टी का बेटा या बेटी—चाहे वह मराठी हो, हिंदू हो, महिला हो या पुरुष—मुंबई का मेयर बनेगा। यह भाजपा का वादा है।

Point of View

बल्कि मुंबई के नागरिकों के भविष्य के लिए भी महत्वपूर्ण है। महायुति का फोकस विकास पर है, जो स्थानीय समस्याओं के समाधान की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
NationPress
11/01/2026

Frequently Asked Questions

बीएमसी चुनाव का महत्व क्या है?
बीएमसी चुनाव का महत्व मुंबई के विकास और यहां के नागरिकों के कल्याण के लिए है। यह चुनाव न केवल राजनीतिक दृष्टि से, बल्कि आर्थिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है।
पूनम महाजन ने गठबंधन के बारे में क्या कहा?
पूनम महाजन ने शिवसेना और मनसे के गठबंधन को सेल्फ सर्वाइवल का गठबंधन करार दिया है और कहा कि जनता का विकास भाजपा और शिवसेना की महायुति से होगा।
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