16 अक्टूबर 2026
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बोकारो स्टील प्लांट: भूख हड़ताल के सातवें दिन विस्थापितों ने सभी गेट जाम किए, उत्पादन पर संकट

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बोकारो स्टील प्लांट: भूख हड़ताल के सातवें दिन विस्थापितों ने सभी गेट जाम किए, उत्पादन पर संकट

सारांश

बोकारो स्टील प्लांट में भूख हड़ताल का सातवाँ दिन और तेज हुआ — 106 विस्थापित युवाओं ने सभी गेट जाम कर दिए। 16 महीने पहले त्रिपक्षीय वार्ता में बनी सहमति अब तक कागज़ पर ही है। जमीन देने वाले परिवार अब आश्वासन नहीं, नियुक्ति पत्र माँग रहे हैं।

मुख्य बातें

बोकारो स्टील प्लांट में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल का सातवाँ दिन , 16 अक्टूबर 2026 को आंदोलन और तेज।
विस्थापित नौजवान संघर्ष मोर्चा के 106 युवक टू-टैंक गार्डन के पास भूख हड़ताल पर; मेन गेट को छोड़कर सभी प्रवेश द्वार जाम।
आंदोलनकारियों का आरोप — प्रेम महतो की मौत के बाद हुई त्रिपक्षीय वार्ता में बनी सहमति पर 16 महीने बाद भी अमल नहीं।
मांगें: चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियोजन, प्रशिक्षण पूरा कर चुके अप्रेंटिस की नियमित बहाली, स्पष्ट रोजगार नीति।
बोकारो विधायक श्वेता सिंह सातवें दिन भी आंदोलनकारियों के साथ धरने पर बनी रहीं।
बीएसएल सुरक्षा विभाग ने उत्पादन और औद्योगिक सुरक्षा पर असर को लेकर पहले ही प्रशासन को पत्र लिखा था।

बोकारो स्टील प्लांट (बीएसएल) में स्थायी नियोजन की मांग को लेकर चल रहा विस्थापित परिवारों का आंदोलन 16 अक्टूबर 2026 को और तीव्र हो गया, जब अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल के सातवें दिन आंदोलनकारियों ने मेन गेट को छोड़कर संयंत्र के तमाम प्रवेश द्वार बंद कर दिए। इस कार्रवाई से कर्मचारियों की आवाजाही बाधित हुई और ड्यूटी पर आए कई कर्मचारियों को वापस लौटना पड़ा। झारखंड के इस प्रमुख इस्पात संयंत्र में गतिरोध के गहराने से सामान्य संचालन पर असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है।

आंदोलन का मौजूदा स्वरूप

विस्थापित नौजवान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले 106 युवक टू-टैंक गार्डन के पास भूख हड़ताल पर बैठे हैं। विस्थापित अप्रेंटिस संघ और विस्थापित परिवारों से जुड़े आंदोलनकारियों ने पहले गेट नंबर 9 और 10 बंद कर प्रबंधन को चेतावनी दी थी कि मांगों पर ठोस निर्णय नहीं हुआ तो आंदोलन का विस्तार किया जाएगा। शुक्रवार को उन्होंने वह चेतावनी अमल में लाते हुए मेन गेट को छोड़कर संयंत्र के अन्य सभी प्रवेश द्वार अनिश्चितकाल के लिए जाम कर दिए।

आंदोलन के दौरान कुछ प्रतिभागियों की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें सदर अस्पताल भेजा गया। बोकारो विधायक श्वेता सिंह सातवें दिन भी आंदोलनकारियों के साथ धरने पर बनी रहीं।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें

आंदोलनकारियों का कहना है कि विस्थापित परिवार के प्रेम महतो की मौत के बाद हुई त्रिपक्षीय वार्ता में नियोजन के मुद्दे पर सहमति बनी थी, लेकिन करीब 16 महीने बीत जाने के बाद भी उस पर अमल नहीं हुआ। उनका आरोप है कि विस्थापित परिवारों ने संयंत्र की स्थापना के लिए अपनी जमीन दी और उनके युवाओं ने अप्रेंटिस प्रशिक्षण भी पूरा किया, फिर भी स्थायी रोजगार का इंतजार खत्म नहीं हुआ।

आंदोलनकारियों की मुख्य मांगों में शामिल हैं — पहले की व्यवस्था के अनुरूप चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियोजन, प्रशिक्षण पूरा कर चुके विस्थापित अप्रेंटिस युवाओं की नियमित बहाली, और विस्थापित परिवारों के लिए स्पष्ट रोजगार नीति का क्रियान्वयन। उनका कहना है कि आश्वासनों का दौर अब काफी है और ठोस प्रक्रिया व समयसीमा की जरूरत है।

प्रबंधन और प्रशासन की प्रतिक्रिया

बीएसएल के सुरक्षा विभाग ने पूर्व में प्रशासन को पत्र लिखकर आंदोलन से उत्पादन और औद्योगिक सुरक्षा पर संभावित असर की चिंता जताई थी। प्रबंधन ने आंदोलनकारियों से संवाद के जरिए समाधान निकालने की अपील की थी, हालांकि अब तक कोई ठोस नतीजा सामने नहीं आया है।

गौरतलब है कि यह आंदोलन लंबे समय से चली आ रही उस बेचैनी की परिणति है, जहाँ विस्थापित परिवारों को बातचीत के वादे तो मिलते रहे, लेकिन नियुक्ति पत्र नहीं। यह ऐसे समय में आया है जब झारखंड में भूमि अधिग्रहण और विस्थापन से जुड़े रोजगार के मुद्दे राज्य की राजनीति में लगातार केंद्रीय बनते जा रहे हैं।

आम जनता और संयंत्र पर असर

सभी गेट बंद होने से संयंत्र के नियमित संचालन पर असर पड़ने की आशंका है। ड्यूटी पर पहुँचे कुछ कर्मचारियों को वापस लौटना पड़ा, जबकि अन्य मुख्य गेट से प्रवेश करते दिखे। यदि यह स्थिति लंबी खिंची, तो उत्पादन में व्यवधान और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव बढ़ सकता है।

आगे की राह

फिलहाल आंदोलनकारियों की ओर से भूख हड़ताल समाप्त करने का कोई संकेत नहीं मिला है। प्रबंधन और प्रशासन के साथ जारी गतिरोध का हल निकलना इस आंदोलन की दिशा तय करेगा। यदि त्वरित बातचीत नहीं हुई, तो आंदोलन का और विस्तार होने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता।

संपादकीय दृष्टिकोण

और इसे केवल 'प्रबंधन-आंदोलनकारी गतिरोध' कहकर नहीं टाला जा सकता। असली सवाल यह है कि क्या इस्पात संयंत्र जैसे राष्ट्रीय उपक्रम उन परिवारों के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाने को बाध्य हैं जिनकी जमीन पर वे खड़े हैं।
RashtraPress
16 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

बोकारो स्टील प्लांट में विस्थापितों का आंदोलन किस मांग को लेकर है?
आंदोलनकारी स्थायी नियोजन की माँग कर रहे हैं — विशेष रूप से चतुर्थ श्रेणी के पदों पर नियुक्ति, प्रशिक्षण पूरा कर चुके विस्थापित अप्रेंटिस युवाओं की नियमित बहाली, और विस्थापित परिवारों के लिए स्पष्ट रोजगार नीति का लागू होना। उनका कहना है कि बातचीत के वादे लंबे समय से चल रहे हैं लेकिन ठोस नियुक्ति नहीं हुई।
भूख हड़ताल कब से चल रही है और इसमें कितने लोग शामिल हैं?
विस्थापित नौजवान संघर्ष मोर्चा के बैनर तले 106 युवक टू-टैंक गार्डन के पास अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल पर बैठे हैं। 16 अक्टूबर 2026 को यह हड़ताल अपने सातवें दिन में थी और आंदोलन की तीव्रता बढ़ती जा रही है।
त्रिपक्षीय वार्ता क्या थी और वह क्यों अटकी हुई है?
आंदोलनकारियों के अनुसार, विस्थापित परिवार के प्रेम महतो की मौत के बाद हुई त्रिपक्षीय वार्ता में नियोजन पर सहमति बनी थी। लेकिन करीब 16 महीने गुजरने के बाद भी उस सहमति पर अमल नहीं हुआ, जिससे आंदोलनकारियों में आक्रोश बढ़ गया है।
गेट जाम करने से बोकारो स्टील प्लांट पर क्या असर पड़ा?
मेन गेट को छोड़कर संयंत्र के अन्य सभी प्रवेश द्वार बंद होने से कर्मचारियों की आवाजाही बाधित हुई और ड्यूटी पर आए कुछ कर्मचारियों को वापस लौटना पड़ा। बीएसएल सुरक्षा विभाग ने पहले ही प्रशासन को उत्पादन और औद्योगिक सुरक्षा पर संभावित असर को लेकर आगाह किया था।
बोकारो विधायक की इस आंदोलन में क्या भूमिका है?
बोकारो विधायक श्वेता सिंह सातवें दिन भी आंदोलनकारियों के साथ धरने पर बैठी रहीं। उनकी उपस्थिति इस आंदोलन को राजनीतिक समर्थन का संकेत देती है, हालांकि अब तक प्रबंधन और प्रशासन के साथ कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है।
राष्ट्र प्रेस
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