विकसित भारत को 'केस नंबर 2047' बताकर CM योगी ने लखनऊ विधि विश्वविद्यालय में रखा विकास का कानूनी खाका
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शनिवार, 17 अक्तूबर को लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया राष्ट्रीय विधि विश्वविद्यालय के 5वें दीक्षांत समारोह में विकसित भारत की परिकल्पना को एक अनूठे कानूनी रूपक के माध्यम से प्रस्तुत किया। उन्होंने इस संकल्प को 'केस नंबर 2047' की संज्ञा दी, जिसके याची 140 करोड़ भारतवासी हैं और जिसकी पैरवी की ज़िम्मेदारी नई पीढ़ी के विधि स्नातकों पर है।
कानूनी रूपक में विकसित भारत का खाका
मुख्यमंत्री ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा, 'अगर हम मान लें कि हमारा केस नंबर 2047 है, उसका विषय विकसित भारत है, उसके याची 140 करोड़ भारतवासी हैं और उन याची के अधिवक्ता के रूप में अगर आपको इस दलील को आगे बढ़ाना है तो आपकी क्या स्थिति होगी?' उन्होंने कहा कि इस केस में विकास के लिए दलील और विकास के लिए वकील — दोनों की दरकार है।
योगी ने स्पष्ट किया कि 140 करोड़ लोगों के दावे को तथ्य, साक्ष्य, तर्क और एक ईमानदार वकील चाहिए। उनके अनुसार इस केस का प्रतिवादी कोई व्यक्ति या राजनीतिक दल नहीं, बल्कि वे लोग हैं जो यथास्थितिवादी हैं और बदलाव की संभावना को नकारते हैं।
उत्तर प्रदेश की अर्थव्यवस्था और साइबर सुरक्षा
मुख्यमंत्री ने बताया कि प्रदेश को 2029-30 तक एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने की कार्ययोजना तैयार है। उन्होंने साइबर अपराधों और डीपफेक तकनीक से उत्पन्न साक्ष्यों की विश्वसनीयता पर भी चिंता जताई। इससे निपटने के लिए प्रदेश के 75 जिलों में साइबर थाने और 1,583 थानों में साइबर हेल्प डेस्क स्थापित किए गए हैं।
गौरतलब है कि 'एआई प्रज्ञा' कार्यक्रम के तहत 10 लाख युवाओं को कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। हालाँकि, मुख्यमंत्री ने यह भी रेखांकित किया कि एआई काम आसान कर सकती है, लेकिन अंतिम निर्णय इंसान के विवेक से ही होना चाहिए।
युवा अधिवक्ताओं को नैतिकता की सीख
योगी आदित्यनाथ ने विद्यार्थियों को अन्याय के विरुद्ध खड़े होने और अपनी जड़ों से जुड़े रहने की सीख दी। उन्होंने कहा कि लापरवाह मसौदे से किसी निर्दोष व्यक्ति को स्वतंत्रता गंवानी पड़ सकती है — इसलिए कानून की हर पंक्ति की ज़िम्मेदारी बड़ी है। उन्होंने यह भी कहा कि गाँवों में जमीन और पारिवारिक विवादों के समाधान में योगदान देना युवा वकीलों का दायित्व है और गलत काम का दबाव आने पर सिद्धांतों से समझौता नहीं करना चाहिए।
पदक विजेता विद्यार्थी
दीक्षांत समारोह में एलएलएम में रुपाली जायसवाल को स्वर्ण, चित्रा सिंह को रजत और सौम्या गिरी को कांस्य पदक प्रदान किया गया। एलएलबी ऑनर्स में तेजस्विनी कौशल को स्वर्ण, ईशा अग्रवाल को रजत और निशा वर्मा को कांस्य पदक मिला।
ईशा अग्रवाल को क्रिमिनल लॉ में जस्टिस ओपी प्रधान मेमोरियल पदक, कॉन्स्टिट्यूशनल लॉ में पद्मावती मोहनलाल जरीवाला पदक और स्टूडेंट ऑफ द ईयर के लिए वीरेंद्र भाटिया स्वर्ण पदक से सम्मानित किया गया।
आगे की राह
यह संबोधन ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश सरकार 2027 के विधानसभा चुनावों से पहले युवाओं और विधि क्षेत्र को अपने विकास एजेंडे से जोड़ने की कोशिश में है। 2047 तक विकसित भारत के संकल्प में युवा अधिवक्ताओं की भूमिका को रेखांकित कर मुख्यमंत्री ने एक स्पष्ट संदेश दिया — कि कानून की पढ़ाई केवल करियर नहीं, राष्ट्र-निर्माण की साधना है।