केंद्र ने राजस्थान के किसानों को मौसम से राहत देने के लिए गेहूं खरीद नियमों में दी छूट
सारांश
Key Takeaways
- राजस्थान में गेहूं खरीद नियमों में छूट दी गई है।
- बेमौसम बारिश से प्रभावित किसानों को राहत मिलेगी।
- गुणवत्ता मानकों में ढील दी गई है।
- सरकार ने किसानों के हितों की सुरक्षा को प्राथमिकता दी है।
- खरीद प्रक्रिया को सुचारू बनाने के लिए निर्देश जारी किए गए हैं।
जयपुर, 9 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण प्रभावित किसानों को राहत प्रदान करते हुए केंद्र सरकार ने राजस्थान में चल रहे रबी सीजन के लिए गेहूं खरीद के नियमों में छूट दी है।
यह निर्णय लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला की पहल के बाद लिया गया, जिन्होंने किसानों की समस्याओं को उजागर करते हुए केंद्रीय स्तर पर सुधारों की मांग की थी।
संशोधित नियमों का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि मौसमी नुकसान के कारण किसानों को आर्थिक हानि न उठानी पड़े। इस निर्णय से राज्यभर के किसानों, विशेषकर कोटा-बूंदी क्षेत्र के किसानों को बड़ा लाभ मिलने की उम्मीद है।
नई गाइडलाइंस के अनुसार, गेहूं में चमक की स्वीकार्यता सीमा बढ़ाकर 50 प्रतिशत कर दी गई है। इसी तरह, सिकुड़े और टूटे दानों की सीमा 15 प्रतिशत तक कर दी गई है। क्षतिग्रस्त और आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त दानों की संयुक्त सीमा अब 6 प्रतिशत तय की गई है। हाल की बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि के कारण फसल की गुणवत्ता में कमी को देखते हुए ये बदलाव किए गए हैं।
सरकार ने दोहराया है कि किसानों के हितों की रक्षा करना और न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर खरीद सुनिश्चित करना उसकी प्राथमिकता है। गुणवत्ता मानकों में ढील देकर केंद्र का उद्देश्य अधिक से अधिक खरीद करना है, ताकि किसानों को खुले बाजार में कम दाम पर अपनी उपज बेचने के लिए मजबूर न होना पड़े।
अधिकारियों को राज्यभर की मंडियों में खरीद प्रक्रिया को सुचारू रूप से संचालित करने के निर्देश दिए गए हैं। किसानों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए पर्याप्त इंतजाम किए जा रहे हैं और बढ़ती आवक को संभालने की तैयारी भी की जा रही है।
इस निर्णय से राजस्थान के लाखों किसानों को सीधे लाभ मिलने की उम्मीद है और कठिन कृषि मौसम के बीच उन्हें बड़ी राहत मिलेगी। साथ ही, यह कदम राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था को स्थिर बनाए रखने में भी सहायक साबित होगा, क्योंकि प्रभावित फसल भी सरकारी खरीद प्रणाली के तहत स्वीकार की जा सकेगी।
खरीद प्रक्रिया में तेजी आने की संभावना के साथ, इसे किसानों की आजीविका सुरक्षित रखने के लिए समय पर उठाया गया महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।