झारखंड हाई कोर्ट ने चाईबासा में नाबालिगों को संक्रमित खून चढ़ाने के मामले को गंभीरता से लिया
सारांश
Key Takeaways
- चाईबासा में नाबालिगों को संक्रमित रक्त चढ़ाने का मामला
- झारखंड हाईकोर्ट ने गंभीरता से लिया
- राज्य सरकार से विस्तृत रिपोर्ट मांगी
- अगली सुनवाई 21 अप्रैल को
- बच्चों के स्वास्थ्य पर गहरा प्रभाव
रांची, 8 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। झारखंड उच्च न्यायालय ने चाईबासा सदर अस्पताल के ब्लड बैंक में नाबालिग बच्चों को एचआईवी संक्रमित रक्त चढ़ाने के आरोप को अत्यंत गंभीर मानते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह जांच की अद्यतन और विस्तृत रिपोर्ट प्रस्तुत करे।
न्यायमूर्ति रंगन मुखोपाध्याय की पीठ ने बुधवार को इस मुद्दे पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार के दृष्टिकोण पर असंतोष व्यक्त किया। अदालत ने कहा कि केवल एफआईआर दर्ज करना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि यह भी सुनिश्चित किया जाना चाहिए कि इस गंभीर लापरवाही के लिए जिम्मेदार व्यक्तियों को कानून के अनुसार सजा दी जाए।
याचिकाकर्ता दीपिका हेम्ब्रम और अन्य द्वारा दायर याचिका में एफआईआर दर्ज करने और विशेष जांच दल (एसआईटी) गठित करने की मांग की गई थी। सुनवाई के दौरान अदालत को बताया गया कि इस मामले में 6 फरवरी 2026 को एफआईआर संख्या 18/2026 दर्ज की गई थी। हालाँकि, राज्य सरकार के वकील जांच की मौजूदा स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी देने में असमर्थ रहे।
इस पर अदालत ने कड़ी टिप्पणी करते हुए कहा कि कई छोटे बच्चों को एचआईवी-संक्रमित रक्त चढ़ाना एक गंभीर मुद्दा है, जो उनके जीवन और भविष्य पर गहरा प्रभाव डालता है। अदालत ने कहा कि इस प्रकार की आपराधिक लापरवाही को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। उच्च न्यायालय ने यह भी कहा कि राज्य सरकार द्वारा दाखिल जवाब केवल एफआईआर दर्ज करने तक सीमित है और जांच की प्रगति को लेकर कोई ठोस जानकारी प्रदान नहीं की गई है।
अदालत ने इसे गंभीरता से लेते हुए राज्य सरकार को निर्देश दिया कि अब तक की जांच की पूरी प्रगति को स्पष्ट करते हुए पूरक हलफनामा दाखिल किया जाए। उल्लेखनीय है कि वर्ष 2025 में चाईबासा सदर अस्पताल में पांच नाबालिग थैलेसीमिया मरीजों को संक्रमित खून चढ़ाने के बाद एचआईवी संक्रमण का मामला सामने आया था। इस घटना के संबंध में परिजनों ने उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाया है। मामले की अगली सुनवाई 21 अप्रैल को निर्धारित की गई है।