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छत्तीसगढ़: 66 आत्मसमर्पित माओवादियों को ₹6.60 करोड़ की प्रोत्साहन राशि, 'नक्सल पुनर्वास नीति 2025' के तहत बड़ा कदम

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छत्तीसगढ़: 66 आत्मसमर्पित माओवादियों को ₹6.60 करोड़ की प्रोत्साहन राशि, 'नक्सल पुनर्वास नीति 2025' के तहत बड़ा कदम

सारांश

छत्तीसगढ़ सरकार ने 66 आत्मसमर्पित माओवादियों को ₹6.60 करोड़ की एकमुश्त प्रोत्साहन राशि जारी की — राज्य के माओवादी मुक्त घोषित होने के बाद पुनर्वास नीति का अब तक का सबसे बड़ा एकल वितरण। यह कदम हिंसा-छोड़ो और समाज में लौटो की रणनीति को ठोस आर्थिक आधार देता है।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार ने 5 अगस्त 2026 को 66 आत्मसमर्पित माओवादियों को ₹6.60 करोड़ की प्रोत्साहन राशि जारी करने की मंजूरी दी।
सभी लाभार्थी वे माओवादी हैं जिन पर पहले ₹5 लाख या उससे अधिक का इनाम घोषित था।
यह राशि 'नक्सली आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति 2025' के तहत दी गई है।
पुनर्वास नीति में 36 महीनों तक ₹10,000 प्रतिमाह मानदेय और भारी हथियारों की जानकारी पर अतिरिक्त पुरस्कार का प्रावधान है।
छत्तीसगढ़ को मार्च 2026 में माओवादी मुक्त राज्य घोषित किया जा चुका है।
बीजापुर जिले के लाभार्थियों में लच्छू फरसा (₹5 लाख), मिटकी काकेम, सीनू पदम, लक्ष्मी मड़वी (₹8-8 लाख) और सुशीला हेमला (₹5 लाख) शामिल हैं।

छत्तीसगढ़ सरकार ने 5 अगस्त 2026 को 66 आत्मसमर्पित माओवादियों को कुल ₹6.60 करोड़ की प्रोत्साहन राशि जारी करने की मंजूरी दी — यह सभी वे नक्सली हैं जिन पर पहले ₹5 लाख या उससे अधिक का इनाम घोषित था। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के नेतृत्व में लिया गया यह निर्णय 'नक्सली आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति 2025' के तहत है, जो राज्य की द्वि-आयामी रणनीति — कठोर सुरक्षा कार्रवाई और मानवीय पुनर्वास — का हिस्सा है।

पुनर्वास नीति में क्या है प्रावधान

राज्य सरकार की पुनर्वास नीति के अनुसार, हथियार छोड़कर मुख्यधारा में लौटने वाले माओवादियों को तत्काल आर्थिक सहायता के साथ-साथ 36 महीनों तक प्रतिमाह ₹10,000 का मानदेय दिया जाता है। इसके अतिरिक्त, भारी हथियारों या विस्फोटकों की जानकारी देने पर अलग से पुरस्कार और प्रोत्साहन राशि का भी प्रावधान है।

नीति में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जिन आत्मसमर्पित माओवादियों को सरकारी नौकरी में समायोजित नहीं किया जा सकता, उन्हें एकमुश्त प्रोत्साहन राशि दी जाएगी — ताकि वे आत्मनिर्भर जीवन की ओर कदम बढ़ा सकें।

बीजापुर के लाभार्थियों का विवरण

बीजापुर जिले के लाभार्थियों में लच्छू फरसा को ₹5 लाख की राशि मिलेगी। मिटकी काकेम (उर्फ सरिता), सीनू पदम (उर्फ चिन्ना) और लक्ष्मी मड़वी (उर्फ खुटो) को ₹8-8 लाख दिए जाएंगे। सुशीला हेमला (उर्फ बुज्जी/विमला हेमला) को ₹5 लाख की प्रोत्साहन राशि प्रदान की जाएगी।

माओवाद-मुक्त छत्तीसगढ़ की दिशा में संदर्भ

गौरतलब है कि छत्तीसगढ़ को इसी वर्ष मार्च 2026 में माओवादी मुक्त राज्य घोषित किया जा चुका है — जो दशकों की हिंसा और सुरक्षाबलों के संघर्ष के बाद एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है। यह ऐसे समय में आया है जब केंद्र और राज्य दोनों सरकारें वामपंथी उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों में विकास की रफ्तार तेज करने पर जोर दे रही हैं।

राज्य सरकार के अनुसार, इतनी बड़ी संख्या में आत्मसमर्पित माओवादियों को एकसाथ प्रोत्साहन राशि का वितरण, माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और पुनर्वास प्रयासों को मजबूत करने की दिशा में एक निर्णायक कदम है।

सरकार की दोहरी रणनीति

मुख्यमंत्री साय की सरकार स्पष्ट रूप से दो-मोर्चे की नीति पर चल रही है — एक ओर उग्रवाद के विरुद्ध सख्त सुरक्षा अभियान, और दूसरी ओर आत्मसमर्पण करने वालों के लिए व्यवस्थित पुनर्वास। सरकार का मानना है कि वित्तीय सहायता और सामाजिक पुनर्एकीकरण के माध्यम से पूर्व माओवादी समाज के विकास में सकारात्मक भूमिका निभा सकते हैं।

आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि पुनर्वास नीति के तहत लाभ पाने वाले ये पूर्व माओवादी किस हद तक मुख्यधारा में स्थायी रूप से स्थापित हो पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा यह है कि पुनर्वास केवल वित्तीय लेन-देन तक सीमित न रहे। पिछले अनुभव बताते हैं कि एकमुश्त राशि और मासिक मानदेय के बाद भी पूर्व माओवादियों का सामाजिक पुनर्एकीकरण एक जटिल और दीर्घकालिक प्रक्रिया है। छत्तीसगढ़ के माओवादी मुक्त घोषित होने के बाद यह पहला बड़ा सामूहिक वितरण है — जो नीति की गंभीरता दर्शाता है, परंतु कौशल विकास, रोज़गार और सामाजिक स्वीकृति के बिना यह राशि दीर्घकालिक बदलाव की गारंटी नहीं बन सकती। सरकार को यह सुनिश्चित करना होगा कि लाभार्थियों की निगरानी और अनुवर्ती सहायता की व्यवस्था भी उतनी ही सुदृढ़ हो जितनी प्रोत्साहन राशि का वितरण।
RashtraPress
6 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्तीसगढ़ सरकार ने 66 माओवादियों को ₹6.60 करोड़ क्यों दिए?
यह राशि 'नक्सली आत्मसमर्पण/पीड़ित राहत एवं पुनर्वास नीति 2025' के तहत उन 66 आत्मसमर्पित माओवादियों को दी गई है जिन पर पहले ₹5 लाख या उससे अधिक का इनाम घोषित था। इसका उद्देश्य उन्हें हिंसा छोड़कर समाज की मुख्यधारा में स्थायी रूप से स्थापित करना है।
नक्सल पुनर्वास नीति 2025 में क्या-क्या मिलता है?
इस नीति के तहत आत्मसमर्पण करने वाले माओवादियों को तत्काल आर्थिक सहायता, 36 महीनों तक ₹10,000 प्रतिमाह मानदेय और भारी हथियारों या विस्फोटकों की जानकारी देने पर अतिरिक्त पुरस्कार दिया जाता है। जिन्हें सरकारी नौकरी में समायोजित नहीं किया जा सकता, उन्हें एकमुश्त प्रोत्साहन राशि भी प्रदान की जाती है।
छत्तीसगढ़ को माओवादी मुक्त राज्य कब घोषित किया गया?
छत्तीसगढ़ को मार्च 2026 में माओवादी मुक्त राज्य घोषित किया गया। यह दशकों की हिंसा और सुरक्षाबलों के निरंतर अभियानों के बाद हासिल की गई एक ऐतिहासिक उपलब्धि मानी जा रही है।
बीजापुर जिले के किन माओवादियों को कितनी राशि मिलेगी?
बीजापुर जिले में लच्छू फरसा और सुशीला हेमला (उर्फ बुज्जी/विमला हेमला) को ₹5-5 लाख, जबकि मिटकी काकेम (उर्फ सरिता), सीनू पदम (उर्फ चिन्ना) और लक्ष्मी मड़वी (उर्फ खुटो) को ₹8-8 लाख की प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
छत्तीसगढ़ सरकार की नक्सल विरोधी रणनीति क्या है?
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की सरकार दो-मोर्चे की नीति अपना रही है — एक ओर उग्रवाद के खिलाफ सख्त सुरक्षा अभियान, और दूसरी ओर आत्मसमर्पण करने वालों के लिए व्यवस्थित पुनर्वास। इस रणनीति का उद्देश्य माओवाद प्रभावित क्षेत्रों में स्थायी शांति और विकास सुनिश्चित करना है।
राष्ट्र प्रेस
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