छत्तीसगढ़: नारायणपुर में एक लाख रुपये के इनामी माओवादी ने किया आत्मसमर्पण
सारांश
Key Takeaways
- आत्मसमर्पण: 26 वर्षीय माओवादी ने अधिकारियों के सामने आत्मसमर्पण किया।
- इनाम: बिजलू मंडावी पर एक लाख रुपये का इनाम था।
- पुनर्वास योजना: राज्य सरकार की 'पूना मार्गम' योजना के तहत मुख्यधारा में लौटने का प्रयास।
- संयुक्त अभियान: सुरक्षा बलों ने माओवादियों के ठिकानों से भारी मात्रा में हथियार बरामद किए।
- सरकार की प्रतिबद्धता: हिंसा छोड़ने वालों को सम्मानित जीवन देने का आश्वासन।
नारायणपुर, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। छत्तीसगढ़ में नक्सल-विरोधी अभियानों में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि मंगलवार को उस समय हासिल हुई, जब नारायणपुर जिले में 26 वर्षीय सशस्त्र माओवादी ने अधिकारियों के समक्ष आत्मसमर्पण किया।
माओवादी बिजलू मंडावी पर एक लाख रुपये का इनाम था और वह प्रतिबंधित संगठन सीपीआई (माओवादी) के उत्तर-पश्चिम संयुक्त उप-क्षेत्रीय ब्यूरो के तकनीकी विभाग से संबंधित था। वह बीजापुर जिले के बारसूर पुलिस थाने के अधीन तुशवाल पंचायत का निवासी है। पुलिस अधीक्षक रॉबिन्सन गुड़िया की उपस्थिति में बिजलू मंडावी ने अपने हथियार डालकर हिंसा का रास्ता छोड़ने का निर्णय लिया।
राज्य सरकार की प्रमुख योजना 'पूना मार्गम: पुनर्वास से पुनर्जीवन' के अंतर्गत बिजलू मंडावी ने मुख्यधारा में लौटने का संकल्प लिया है। सुरक्षा बलों और नारायणपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने घने जंगलों में माओवादियों के ठिकानों से बड़ी मात्रा में हथियार और गोला-बारूद बरामद किया है।
हाल के महीनों में छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के आत्मसमर्पण में तेजी आई है। नारायणपुर, बीजापुर और सुकमा में कई नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया है।
डिस्ट्रिक्ट रिजर्व गार्ड, सीआरपीएफ और राज्य पुलिस के संयुक्त अभियानों ने नक्सलियों में भय उत्पन्न कर दिया है। एसपी रॉबिन्सन गुड़िया ने मंडावी के साहसिक फैसले की सराहना की और उनके पुनर्वास के लिए सभी आवश्यक प्रशासनिक सहायता का आश्वासन दिया।
उन्होंने अन्य माओवादी कैडर से भी ऐसा ही करने की अपील की, और यह स्पष्ट किया कि सरकार उन लोगों को सुरक्षित और सम्मानित जीवन देने के प्रति प्रतिबद्ध है जो हिंसा के बजाय शांति का मार्ग चुनते हैं।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 30 मार्च को सदन में यह बयान दिया था कि अब माओवादी हिंसा करने वालों के दिन समाप्त हो गए हैं। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ में सरकार बदलने के दूसरे महीने ही उन्होंने वहां का दौरा किया था। भाजपा सरकार ने समर्थन का पूरा आश्वासन दिया, और साझा रणनीति बनाई। उन्होंने 24 अगस्त 2024 को घोषणा की थी कि मार्च 2026 तक नक्सलवाद को देश से समाप्त कर देंगे।