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क्या छत्तीसगढ़ की झांकी ने राष्ट्रपति-पीएम और यूरोपीय अतिथियों को मंत्रमुग्ध किया?

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क्या छत्तीसगढ़ की झांकी ने राष्ट्रपति-पीएम और यूरोपीय अतिथियों को मंत्रमुग्ध किया?

सारांश

गणतंत्र दिवस पर छत्तीसगढ़ की झांकी ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री समेत कई dignitaries का ध्यान आकर्षित किया। जानिए इस झांकी में क्या खास था और कैसे इसने देश के पहले डिजिटल संग्रहालय को प्रदर्शित किया।

मुख्य बातें

झांकी का थीम 'स्वतंत्रता का मंत्र- वंदे मातरम्' था।
यह जनजातीय नायकों को समर्पित थी।
छत्तीसगढ़ का पहला डिजिटल संग्रहालय प्रस्तुत किया गया।
वीर गुंडाधुर और वीर नारायण सिंह के योगदान को प्रदर्शित किया गया।
झांकी ने छत्तीसगढ़ की पहचान को राष्ट्रीय मंच पर प्रस्तुत किया।

नई दिल्ली, 26 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। 77वें गणतंत्र दिवस के अवसर पर कर्तव्य पथ पर प्रस्तुत छत्तीसगढ़ की झांकी ने देश और दुनिया का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया। 'स्वतंत्रता का मंत्र- वंदे मातरम्' थीम पर आधारित यह झांकी जनजातीय वीर नायकों को समर्पित देश के पहले डिजिटल संग्रहालय की गौरवगाथा को प्रभावशाली तरीके से प्रदर्शित करती है।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी समेत केंद्रीय मंत्रियों और अन्य विशिष्ट अतिथियों ने झांकी का उत्सुकता से अवलोकन किया और तालियों की गड़गड़ाहट से इसकी सराहना की। दर्शक दीर्घा में उपस्थित लाखों लोगों ने भी छत्तीसगढ़ की झांकी का जोरदार स्वागत किया। झांकी के सामने छत्तीसगढ़ के कलाकारों द्वारा प्रस्तुत पारंपरिक लोक नृत्य ने माहौल को और भी जीवंत बना दिया।

झांकी में नवा रायपुर अटल नगर में स्थित देश के पहले जनजातीय डिजिटल संग्रहालय की झलक दिखाई गई, जहाँ छत्तीसगढ़ समेत देश के 14 प्रमुख जनजातीय स्वतंत्रता आंदोलनों को आधुनिक डिजिटल तकनीकों से संरक्षित किया गया है। इस ऐतिहासिक संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती के अवसर पर किया था।

झांकी के अग्र भाग में वर्ष 1910 के ऐतिहासिक भूमकाल विद्रोह के नायक वीर गुंडाधुर को दर्शाया गया। धुर्वा समाज के इस महान योद्धा ने अन्यायपूर्ण अंग्रेजी शासन के खिलाफ जनजातीय समाज को संगठित किया। विद्रोह के प्रतीक के रूप में आम की टहनियां और सूखी मिर्च को विशेष रूप से प्रदर्शित किया गया। विद्रोह की तीव्रता का अनुमान इसी से लगाया जा सकता है कि अंग्रेजों को नागपुर से सेना बुलानी पड़ी, फिर भी वे वीर गुंडाधुर को पकड़ने में असफल रहे।

झांकी के पृष्ठ भाग में छत्तीसगढ़ के प्रथम शहीद वीर नारायण सिंह को घोड़े पर सवार, हाथ में तलवार लिए दर्शाया गया। उन्होंने अकाल के समय गरीबों और वंचितों के अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया और 1857 के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम में अग्रणी भूमिका निभाई। पूरी झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, बलिदान और देशभक्ति की भावना को सशक्त रूप में अभिव्यक्त करती रही और गणतंत्र दिवस परेड में छत्तीसगढ़ की गौरवपूर्ण पहचान को राष्ट्रीय मंच पर स्थापित किया।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि एक प्रेरणा भी, जो हमें हमारे वीर नायकों की ओर सोचने पर मजबूर करती है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

छत्तीसगढ़ की झांकी का मुख्य थीम क्या था?
झांकी का मुख्य थीम 'स्वतंत्रता का मंत्र- वंदे मातरम्' था।
यह झांकी किससे समर्पित थी?
यह झांकी जनजातीय वीर नायकों को समर्पित थी।
संग्रहालय का उद्घाटन कब हुआ था?
संग्रहालय का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने छत्तीसगढ़ राज्य गठन की रजत जयंती पर किया था।
झांकी में कौन-कौन से प्रमुख नायकों को दर्शाया गया?
झांकी में वीर गुंडाधुर और वीर नारायण सिंह को दर्शाया गया।
झांकी का क्या महत्व है?
यह झांकी जनजातीय समाज के अदम्य साहस, बलिदान और देशभक्ति की भावना को प्रदर्शित करती है।
राष्ट्र प्रेस
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