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क्या केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए सीसीआई ने चार सूत्रीय रणनीति का प्रस्ताव रखा है?

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क्या केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए सीसीआई ने चार सूत्रीय रणनीति का प्रस्ताव रखा है?

सारांश

सीआईआई ने केंद्रीय बजट 2026-27 के लिए एक चार-सूत्रीय रणनीति प्रस्तुत की है। यह रणनीति भारत की अर्थव्यवस्था की स्थिरता को बढ़ाने के लिए ऋण स्थिरता, राजकोषीय पारदर्शिता, राजस्व संग्रह और खर्च दक्षता पर केंद्रित है। जानिए इस रणनीति की विशेषताएं और इसके संभावित प्रभाव।

मुख्य बातें

ऋण स्थिरता का महत्व राजकोषीय पारदर्शिता की आवश्यकता राजस्व संग्रह में सुधार खर्च दक्षता की भूमिका प्रमुख सुधारों की सिफारिशें

नई दिल्ली, 25 दिसंबर (राष्ट्र प्रेस)। केंद्रीय बजट 2026-27 से पूर्व भारत के प्रमुख औद्योगिक संगठन सीआईआई (भारतीय उद्योग परिसंघ) ने एक चार-सूत्रीय रणनीति का प्रस्ताव रखा है, जिसका मुख्य उद्देश्य देश की अर्थव्यवस्था को स्थिर और मजबूत बनाना है। यह रणनीति ऋण स्थिरता, राजकोषीय पारदर्शिता, राजस्व संग्रह और खर्च दक्षता पर आधारित है।

सीआईआई के बयान के अनुसार, वित्त वर्ष 2031 तक सरकार को अपने कर्ज को सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 50 प्रतिशत (1 प्रतिशत अधिक या कम) बनाए रखना चाहिए। इसके अलावा, वित्तीय घाटे (सरकार की कमाई और खर्च के बीच का अंतर) को 4.2 प्रतिशत तक सीमित रखना जरूरी है। इससे भारत की अर्थव्यवस्था स्थिर बनी रहेगी।

दूसरा, सीआईआई का मानना है कि सरकार को 3 से 5 साल की वित्तीय योजना बनानी चाहिए, जिसमें राजस्व, खर्च और कर्ज के बारे में स्पष्ट जानकारी हो। इससे सरकार को अपनी योजनाओं को प्रभावी तरीके से लागू करने में मदद मिलेगी और विश्वसनीयता बढ़ेगी।

तीसरा, राजस्व संग्रह को बेहतर बनाना दीर्घकालिक वित्तीय स्थिरता के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। भारत में टैक्स-से-जीडीपी अनुपात अभी भी कम (17.5 प्रतिशत) है, जिसके लिए सरकार को डिजिटल और एआई (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) का उपयोग करके टैक्स चोरी को रोकने की कोशिश करनी चाहिए। इससे टैक्स का सही तरीके से संग्रह होगा और टैक्सदाता बढ़ेंगे।

सीआईआई ने सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनियों (पीएसई) के लिए 3 साल की निजीकरण पाइपलाइन का ऐलान करने की भी सिफारिश की है।

चौथा, खर्च प्रबंधन, विशेष रूप से सब्सिडी सुधार भी इस रणनीति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। सरकार को सब्सिडी को सही तरीके से लागू करना चाहिए। उदाहरण के लिए, पीडीएस (पब्लिक डिस्ट्रीब्यूशन सिस्टम) में सभी लाभार्थियों की सूची को अद्यतन करना चाहिए और कैश या कूपन के जरिए राशन देना चाहिए, ताकि यह सही लोगों तक पहुंचे।

इसी तरह, कृषि उर्वरक सब्सिडी को डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से किसानों तक पहुंचाना चाहिए। इससे किसानों की समस्याएं हल होंगी और पैसों का दुरुपयोग भी कम होगा।

सीआईआई ने यह भी सुझाव दिया कि राज्यों को दो प्रतिष्ठित रेटिंग एजेंसियों से राज्य विकास ऋण (एसडीएल) की रेटिंग प्राप्त करने के लिए प्रोत्साहित किया जाए और केंद्रीय पूंजी खर्च की सहायता को इन रेटिंग्स और खुलासों से जोड़ा जाए, ताकि वित्तीय सावधानी को बढ़ावा मिल सके।

इसके अलावा, सीआईआई ने एक स्मार्ट यानी सिस्टमेटिक मॉडर्नाइजेशन एंड रिसोर्स ट्रांसफॉर्मेशन (एसएमएआरटी) मिशन का प्रस्ताव किया है, जो राष्ट्रीय डिजिटल शहरी प्लेटफॉर्म पर आधारित होगा। यह नगर निगम वित्त, प्रशासन और डिजिटल सेवाओं को मजबूत करेगा, साथ ही उपकरणों और सेवाओं की बेहतर डिलीवरी को सुनिश्चित करेगा।

संपादकीय दृष्टिकोण

मैं मानता हूँ कि सीआईआई की यह चार सूत्रीय रणनीति भारत की आर्थिक स्थिरता के लिए समय की आवश्यकता है। यह न केवल सरकार के लिए आवश्यक है, बल्कि देश के हर नागरिक के लिए भी फायदेमंद साबित होगा।
RashtraPress
7 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सीआईआई की चार सूत्रीय रणनीति में क्या शामिल है?
इस रणनीति में ऋण स्थिरता, राजकोषीय पारदर्शिता, राजस्व संग्रह और खर्च दक्षता शामिल हैं।
सरकार को कर्ज का अनुपात किस स्तर पर रखना चाहिए?
सरकार को अपने कर्ज को जीडीपी का 50 प्रतिशत के स्तर पर रखना चाहिए।
राजस्व संग्रह को बेहतर बनाने के लिए क्या कदम उठाने चाहिए?
सरकार को डिजिटल और एआई का इस्तेमाल करके टैक्स चोरी को रोकना चाहिए।
पीएसई के लिए क्या सिफारिशें की गई हैं?
पीएसई के लिए 3 साल की निजीकरण पाइपलाइन का ऐलान करने की सिफारिश की गई है।
खर्च प्रबंधन में क्या सुधार किए जाने चाहिए?
सरकार को सब्सिडी को सही तरीके से लागू करना चाहिए, जैसे कि पीडीएस में लाभार्थियों की सूची को अपडेट करना।
राष्ट्र प्रेस
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