जंतर-मंतर पर CJP प्रदर्शन में नेताओं की गिरफ़्तारी पर अरविंद सावंत का हमला — 'यह अघोषित इमरजेंसी है'
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने 10 अक्टूबर 2026 को नई दिल्ली में जंतर-मंतर पर सीजेपी (Citizens for Justice and Peace) के प्रदर्शन के दौरान नेताओं को हिरासत में लिए जाने पर केंद्र सरकार और दिल्ली पुलिस पर कड़ा प्रहार किया। सावंत ने इस कार्रवाई को 'अघोषित इमरजेंसी' करार देते हुए कहा कि शांतिपूर्ण आंदोलन करना संविधान का मूल अधिकार है और इसे दबाना लोकतंत्र पर हमला है। उन्होंने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर भी भ्रष्टाचार के गंभीर आरोप लगाए।
हवाई जहाज़ में डिटेन करने पर सावंत का विरोध
सावंत ने कहा, 'ये कौन-सा कानून है? हवाई जहाज में पकड़कर डिटेन किया — समझ में नहीं आ रहा, कोई आतंकवादी है क्या?' उन्होंने कहा कि इस देश में संविधान के तहत आंदोलन करने का अधिकार सभी नागरिकों को प्राप्त है और जब तक प्रदर्शन शांतिपूर्ण हो, उस पर इस तरह की कार्रवाई अनुचित है। उनका यह बयान विपक्षी दलों के बीच तेज़ी से गूँजा।
मुख्य घटनाक्रम — दो दिन पहले का घटनाक्रम भी कटघरे में
सावंत ने यह भी याद दिलाया कि जब कांग्रेस नेता राहुल गांधी समेत तमाम विपक्षी सांसद चुनाव आयोग के कार्यालय की ओर जा रहे थे, तब पूरी दिल्ली में बैरिकेड लगा दिए गए थे और मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए गए थे। उन्होंने कहा, 'ये इमरजेंसी के अलावा दूसरा कुछ नहीं है — अघोषित इमरजेंसी है।' यह ऐसे समय में आया है जब विपक्ष पहले से ही चुनावी प्रक्रियाओं की निष्पक्षता को लेकर सवाल उठा रहा है।
सर्वोच्च न्यायालय और चुनाव आयुक्त पर निशाना
शिवसेना (यूबीटी) सांसद ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार पर सीधे भ्रष्टाचार का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि सर्वोच्च न्यायालय ने हाल ही में यह स्पष्ट किया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के लिए न्यायालय से अनुमति नहीं ली गई थी। सावंत ने कहा, 'भ्रष्टाचार के कौन-से सबूत चाहिए आपको? इस देश में जनतंत्र नहीं है अभी, सावधान।' गौरतलब है कि ये आरोप विपक्ष के उस व्यापक अभियान का हिस्सा हैं, जिसमें चुनाव आयोग की स्वायत्तता पर सवाल उठाए जा रहे हैं।
पुलिस पर कार्रवाई की चेतावनी
सावंत ने पुलिस बल पर भी सख्त टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि जो बर्बरता पुलिस कर रही है, उसके परिणाम भुगतने पड़ेंगे — और यदि कोई और भरोसा नहीं, तो सर्वोच्च न्यायालय मौजूद है। उन्होंने कहा, 'इस देश की ताकत जनता है और जनता के मन में संविधान है।' यह बयान विपक्ष की उस रणनीति को दर्शाता है जिसमें न्यायपालिका को आख़िरी सहारे के रूप में देखा जा रहा है।
BJP पर तंज — 'रंगा-बिल्ला की भाजपा'
सावंत ने भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा व्यंग्य करते हुए कहा कि 'यह अटल बिहारी वाजपेयी की भाजपा नहीं, न लालकृष्ण आडवाणी की भाजपा है — यह रंगा-बिल्ला की भाजपा है।' उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान भाजपा नेतृत्व के मन में केवल पंजाब-हरियाणा और उत्तर प्रदेश के आगामी चुनाव हैं, और वे उसी के अनुसार राजनीतिक ढोंग रचाते हैं। यह टिप्पणी महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) और BJP के बीच चले आ रहे टकराव की पृष्ठभूमि में आई है।
आगे यह देखना होगा कि CJP प्रदर्शन के दौरान हिरासत में लिए गए नेताओं को कब रिहा किया जाता है और क्या सर्वोच्च न्यायालय इस मामले में कोई स्वतः संज्ञान लेता है।