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CM योगी का विज्ञान भारती अधिवेशन में आह्वान: अनुसंधान को प्रयोगशाला से निकालकर राष्ट्र निर्माण से जोड़ें

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CM योगी का विज्ञान भारती अधिवेशन में आह्वान: अनुसंधान को प्रयोगशाला से निकालकर राष्ट्र निर्माण से जोड़ें

सारांश

वाराणसी में विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन में CM योगी ने युवा वैज्ञानिकों को संदेश दिया — अनुसंधान प्रयोगशाला से बाहर निकले और राष्ट्र निर्माण का औजार बने। ODOP से UP का निर्यात ₹86,000 करोड़ से ₹2 लाख करोड़ पार, 3 करोड़ रोजगार — यही विज्ञान और परंपरा के समन्वय का व्यावहारिक प्रमाण है।

मुख्य बातें

CM योगी आदित्यनाथ ने वाराणसी में विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन का उद्घाटन किया; 1,300 से अधिक प्रतिनिधि पंजीकृत।
उन्होंने कहा कि अनुसंधान केवल प्रयोगशाला तक सीमित न रहे — लक्ष्य आर्थिक उन्नयन, लोककल्याण और राष्ट्र निर्माण होना चाहिए।
ODOP योजना के माध्यम से UP का निर्यात ₹86,000 करोड़ से बढ़कर ₹2 लाख करोड़ से अधिक हुआ; 96 लाख MSME इकाइयों में 3 करोड़ लोग कार्यरत।
बेरोजगारी दर 3 प्रतिशत से नीचे आई; CM ने इसे परंपरागत उद्यमों के पुनरुद्धार का परिणाम बताया।
2,000 वर्ष पूर्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44-45% थी, जो स्वतंत्रता के समय 1.5-2% रह गई थी।
विज्ञान भारती को सुझाव: प्रत्येक अधिवेशन के साथ नवाचार प्रदर्शनी और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं।

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 14 जून 2025 को वाराणसी में विज्ञान भारती के सातवें राष्ट्रीय अधिवेशन के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए देश के युवा वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और तकनीकी विशेषज्ञों से नवाचार एवं अनुसंधान को राष्ट्र निर्माण और जनकल्याण से सीधे जोड़ने का आह्वान किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि कोई भी शोध केवल प्रयोगशाला की चारदीवारी तक सीमित नहीं रहना चाहिए — उसका अंतिम लक्ष्य आर्थिक उन्नयन, लोककल्याण और भारत को एक सशक्त राष्ट्र के रूप में स्थापित करना होना चाहिए। इस अधिवेशन में 1,300 से अधिक प्रतिनिधि पंजीकृत हुए हैं।

काशी और ज्ञान परंपरा का संदर्भ

मुख्यमंत्री ने कहा कि वे प्रसन्न हैं कि विज्ञान भारती का यह अधिवेशन काशी हिंदू विश्वविद्यालय (BHU) की धरती पर आयोजित हो रहा है, जिसे महामना मदन मोहन मालवीय ने प्राचीन ज्ञान-विज्ञान की पहचान को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से स्थापित किया था। उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान की यात्रा लगभग 400-500 वर्षों की है, जबकि भारत हजारों वर्षों से ज्ञान, विज्ञान और नवाचार का वैश्विक केंद्र रहा है।

योगी आदित्यनाथ ने ऐतिहासिक आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि 2,000 वर्ष पूर्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44-45 प्रतिशत थी, जो विदेशी आक्रमणों के कठिन दौर में भी 24-25 प्रतिशत बनी रही। स्वतंत्रता के समय यह घटकर मात्र 1.5 से 2 प्रतिशत रह गई — यह गिरावट केवल आर्थिक नहीं, बल्कि ज्ञान और नवाचार की उपेक्षा का भी परिणाम थी।

भारतीय कृषि और पारंपरिक ज्ञान की वैज्ञानिक दृष्टि

मुख्यमंत्री ने श्रीमद्भागवत गीता का उल्लेख करते हुए कहा कि कृषि, गोरक्षा और वाणिज्य भारतीय अर्थव्यवस्था की परस्पर जुड़ी हुई व्यवस्थाएं थीं। भारतीय किसान केवल खेतिहर नहीं, बल्कि एक इन्वेंटर और नवाचारी भी था। प्राकृतिक खेती, पशुपालन और भूमि की उर्वरता बनाए रखने की परंपरागत विधियाँ उसकी वैज्ञानिक सोच का प्रमाण थीं। उन्होंने कहा कि रासायनिक उर्वरकों और कीटनाशकों पर अत्यधिक निर्भरता ने न केवल कृषि लागत बढ़ाई, बल्कि भूमि की उर्वरता को भी गहरा नुकसान पहुंचाया।

अपने बचपन की स्मृतियाँ साझा करते हुए उन्होंने बताया कि उत्तराखंड के उनके गाँव में उनकी माता छोटी-छोटी क्यारियों में सब्जियाँ उगाने के लिए प्रेरित करती थीं। उन्होंने कहा कि भारतीय जीवन पद्धति का प्रत्येक पक्ष — रसोई में हल्दी और मसालों के उपयोग से लेकर दैनिक परंपराओं तक — विज्ञान की वैज्ञानिक दृष्टि से ओतप्रोत है।

ओडीओपी और उत्तर प्रदेश का औद्योगिक रूपांतरण

मुख्यमंत्री ने बताया कि 2017 में सरकार बनने के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के ज़रिये परंपरागत उद्यमों को पुनर्जीवित किया गया। इस योजना ने कारीगरों को तकनीक, डिजाइन, पैकेजिंग और मार्केटिंग से जोड़ा, जिसके परिणामस्वरूप उत्तर प्रदेश का निर्यात ₹86,000 करोड़ से बढ़कर ₹2 लाख करोड़ से अधिक हो गया।

वर्तमान में प्रदेश में 96 लाख MSME इकाइयाँ संचालित हैं, जिनमें लगभग 3 करोड़ लोग कार्यरत हैं और बेरोजगारी दर 3 प्रतिशत से नीचे आ गई है। यह ऐसे समय में उल्लेखनीय है जब देश के कई बड़े राज्य रोजगार के मोर्चे पर संघर्ष कर रहे हैं।

जगदीश चंद्र बसु और तक्षशिला का संदर्भ

मुख्यमंत्री ने महान वैज्ञानिक जगदीश चंद्र बसु का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके प्रयोगों ने सिद्ध किया था कि पौधों में भी संवेदनशीलता और चेतना होती है। उन्होंने तक्षशिला विश्वविद्यालय के आयुर्वेदाचार्य जीवक की कथा का भी उल्लेख किया — जिन्हें गुरु ने ऐसी वनस्पति खोजने का निर्देश दिया जिसमें औषधीय गुण न हों, और जीवक लंबी खोज के बाद भी ऐसी कोई वनस्पति नहीं खोज सके। योगी ने इसे भारतीय ज्ञान परंपरा की वैज्ञानिक दृष्टि का प्रमाण बताया।

विज्ञान भारती को सुझाव और आगे की राह

युवा वैज्ञानिकों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने विज्ञान भारती को सुझाव दिया कि प्रत्येक अधिवेशन के साथ नवाचार प्रदर्शनी आयोजित की जाए, अधिवेशन से पूर्व नवाचार प्रतियोगिताएं कराई जाएं और उत्कृष्ट शोधकर्ताओं एवं नवाचारकर्ताओं को मंच पर सम्मानित किया जाए। उन्होंने यह भी कहा कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालयों तथा सरकारी विभागों के साथ समन्वय स्थापित कर शोधकर्ताओं को अपने नवाचारों का प्रस्तुतीकरण करने का अवसर दिया जाए। गौरतलब है कि भारत, कृषि, चिकित्सा, आयुर्वेद और पारंपरिक ज्ञान के क्षेत्र में अपार संभावनाओं को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने की दिशा में यह एक महत्वपूर्ण कदम है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन ODOP के ठोस आंकड़े — निर्यात में ₹86,000 करोड़ से ₹2 लाख करोड़ की छलांग — इसे महज वक्तव्य से आगे ले जाते हैं। असली सवाल यह है कि क्या विज्ञान भारती जैसे मंच वास्तव में शोधकर्ताओं को नीति-निर्माण से जोड़ पाते हैं, या ये अधिवेशन प्रेरणादायक भाषणों तक सिमट जाते हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा की पुनर्स्थापना का आह्वान तब अधिक विश्वसनीय होगा जब विश्वविद्यालयों में शोध बजट, पेटेंट दाखिले और उद्योग-अकादमिक साझेदारी के ठोस लक्ष्य सामने रखे जाएं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

विज्ञान भारती का सातवां राष्ट्रीय अधिवेशन कहाँ और कब हुआ?
विज्ञान भारती का सातवां राष्ट्रीय अधिवेशन वाराणसी में काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में आयोजित हुआ, जिसमें 1,300 से अधिक प्रतिनिधियों ने पंजीकरण कराया। CM योगी आदित्यनाथ ने इसका उद्घाटन किया।
CM योगी ने युवा वैज्ञानिकों को क्या संदेश दिया?
CM योगी ने कहा कि अनुसंधान केवल प्रयोगशाला तक सीमित नहीं रहना चाहिए — उसका उद्देश्य आर्थिक उन्नयन, लोककल्याण और भारत को सशक्त राष्ट्र बनाना होना चाहिए। उन्होंने कृषि, चिकित्सा, MSME और आयुर्वेद में नवाचार के अपार अवसरों की ओर भी ध्यान दिलाया।
ODOP योजना से उत्तर प्रदेश के निर्यात पर क्या असर पड़ा?
CM योगी के अनुसार, वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के माध्यम से उत्तर प्रदेश का निर्यात ₹86,000 करोड़ से बढ़कर ₹2 लाख करोड़ से अधिक हो गया है। वर्तमान में प्रदेश में 96 लाख MSME इकाइयाँ हैं जिनमें लगभग 3 करोड़ लोग कार्यरत हैं।
CM योगी ने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के संबंध में क्या कहा?
उन्होंने कहा कि आधुनिक विज्ञान की यात्रा 400-500 वर्षों की है, जबकि भारत हजारों वर्षों से ज्ञान और नवाचार का केंद्र रहा है। 2,000 वर्ष पूर्व वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारत की हिस्सेदारी 44-45 प्रतिशत थी। उन्होंने भारतीय ज्ञान परंपरा और आधुनिक विज्ञान के समन्वय को देश को विकसित राष्ट्र बनाने की कुंजी बताया।
विज्ञान भारती को CM योगी ने क्या सुझाव दिए?
CM योगी ने सुझाव दिया कि प्रत्येक अधिवेशन के साथ नवाचार प्रदर्शनी और प्रतियोगिताएं आयोजित की जाएं, उत्कृष्ट शोधकर्ताओं को मंच पर सम्मानित किया जाए और विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालयों के साथ समन्वय स्थापित कर शोधकर्ताओं को अपने नवाचारों का प्रस्तुतीकरण करने का अवसर दिया जाए।
राष्ट्र प्रेस
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