क्या कांग्रेस केवल नाम में विश्वास करती है, जबकि भाजपा काम में विश्वास करती है?
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस केवल नाम में विश्वास करती है, जबकि भाजपा काम में विश्वास करती है।
- मनरेगा में 125 दिनों का रोजगार सुनिश्चित किया गया है।
- भाजपा ने नए कानून के तहत पारदर्शिता बढ़ाने का वादा किया है।
जींद, 13 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। देश की प्रमुख विपक्षी पार्टी कांग्रेस 'विकसित भारत-जी राम जी' (वीबी-जी राम जी) का विरोध कर रही है और भाजपा सरकार पर मनरेगा को समाप्त करके गरीबों से रोजगार की गारंटी का अधिकार छीनने का गंभीर आरोप लगा रही है, जबकि भाजपा इसे सुधारात्मक प्रक्रिया मानती है। इस बीच मंगलवार को भाजपा सांसद सुभाष बराला ने कांग्रेस पर तीखा हमला किया।
हरियाणा से राज्यसभा सांसद सुभाष बराला ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि कांग्रेस केवल नाम में विश्वास करती है, जबकि भाजपा काम में विश्वास करती है। जब भी देश में अच्छे कार्य प्रारंभ होते हैं, कांग्रेस विरोध करने का प्रयास करती है।
बराला ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि 'वीबी-जी राम जी' अधिनियम, 2025 के तहत मनरेगा योजना में सुधार किया गया है। पुरानी मनरेगा में 100 दिनों का रोजगार था, जबकि नए कानून में 125 दिनों का कार्य उपलब्ध कराने का निर्णय लिया गया है। न्यूनतम मजदूरी 400 रुपए देने का वादा किया गया है, लेकिन कांग्रेस को विकास की बात बर्दाश्त नहीं होती।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 2024 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस ने संविधान में परिवर्तन करने की झूठी बातें फैलाईं और कहा कि मोदी आने पर संविधान खतरे में है। कांग्रेस के नेता मनरेगा समाप्त करने की झूठी अफवाहें फैलाते थे। बराला ने कहा, "कांग्रेस ने जवाहरलाल नेहरू के समय मनरेगा जैसी योजना शुरू की, तब नाम बदलने पर कोई आपत्ति नहीं थी, अब क्यों?"
राज्यसभा सांसद ने बताया कि भाजपा ने आजीविका के संसाधनों को बनाए रखने और नए रोजगार स्थापित करने का संकल्प लिया है। नए अधिनियम के तहत भैंस पालन, डेयरी कार्य, गांवों में तालाबों का सौंदर्यीकरण जैसे कार्य किए जा सकते हैं। यह ग्रामीण क्षेत्रों में स्थायी आजीविका और बुनियादी ढांचे को मजबूत करेगा।
बराला ने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि विपक्ष मनरेगा के नाम पर राजनीति कर रहा है, जबकि मोदी सरकार ने योजना को आधुनिक और प्रभावी बनाया है। पुरानी योजना में भ्रष्टाचार और कमियां थीं, नए कानून से पारदर्शिता बढ़ेगी और ग्रामीण श्रमिकों को अधिक लाभ होगा।