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कांग्रेस का राज्यपाल के अभिभाषण का बहिष्कार: सदन का अपमान, 'आप' सरकार का आरोप

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कांग्रेस का राज्यपाल के अभिभाषण का बहिष्कार: सदन का अपमान, 'आप' सरकार का आरोप

सारांश

पंजाब के मंत्री हरपाल सिंह चीमा और अन्य ने कांग्रेस द्वारा राज्यपाल के भाषण का बहिष्कार करने के फैसले की कड़ी निंदा की। उन्होंने इसे सदन की 75 साल पुरानी परंपराओं का अपमान बताया।

मुख्य बातें

कांग्रेस का राज्यपाल के भाषण का बहिष्कार एक बड़ा राजनीतिक कदम है।
आप सरकार ने इसे सदन का अपमान बताया है।
75 साल पुरानी संसदीय परंपराओं को चुनौती दी जा रही है।

चंडीगढ़, 6 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। पंजाब के कैबिनेट मंत्री हरपाल सिंह चीमा, अमन अरोड़ा और हरभजन सिंह ईटीओ ने शुक्रवार को कांग्रेस पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने राज्यपाल के भाषण का बहिष्कार करने के पार्टी के निर्णय की निंदा करते हुए कहा, "यह सदन और राज्य की 75 साल पुरानी संसदीय परंपराओं का अपमान है।"

मंत्रियों ने कहा कि सदन में विपक्ष का हंगामा करना और नारेबाजी करना राज्य के विकास के माइलस्टोन से लोगों का ध्यान भटकाने की एक हताश कोशिश थी।

चीमा ने एक बयान में कहा कि पंजाब में कांग्रेस सरकार की पहचान 'राज्य के खजाने या लोगों के बजाय शराब, रेत और ट्रांसपोर्ट माफिया की बढ़ोतरी से है।'

उन्होंने कहा, "जबकि पिछली सरकार ने राज्य के संसाधनों को लूटने दिया, मौजूदा 'आप' सरकार ने वित्तीय अनुशासन और असली विकास पर ध्यान केंद्रित किया है। कांग्रेस, जो पहले ही दिल्ली और बिहार जैसे राज्यों में जीरो पर आ चुकी है, अपने जन-विरोधी और दलित-विरोधी रवैये के कारण आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों में भी इस तरह पूरी तरह से समाप्त होने वाली है।"

उन्होंने सदन में विपक्ष के व्यवहार की आलोचना करते हुए कहा, "पंजाब के राज्यपाल ने कांग्रेस से दो बार बैठने, सुनने और चर्चा के दौरान अपना जवाब देने का अनुरोध किया, लेकिन कांग्रेस ने पूरी तरह से लोकतंत्र-विरोधी तरीके से कार्य किया। उनके व्यवहार से यह सिद्ध होता है कि उन्हें संवैधानिक मर्यादा का कोई सम्मान नहीं है।"

उन्होंने दलित समुदाय के प्रति कांग्रेस की सोच की भी आलोचना की, और अपने कैबिनेट साथी के साथ हुए बुरे बर्ताव का जिक्र करते हुए कहा, "लोग अच्छी तरह जानते हैं कि कांग्रेस दलित विरोधी है। कैबिनेट मंत्री हरभजन सिंह ईटीओ का उदाहरण देखिए, जिन्होंने अधिकारी बनने के लिए नागरिक सेवा पास की और बाद में जनता की सेवा करने के लिए 'आप' में शामिल हो गए। फिर भी, कांग्रेस नेतृत्व ने इतने सक्षम व्यक्ति की तुलना 'बैंड बाजा' से करने की हिम्मत की। आज, जब हमारे साथियों ने अपने साथ बैंड लाकर अपना गुस्सा दिखाया, तो कांग्रेस नेता निराश हो गए क्योंकि वे अपने घमंड की सच्चाई का सामना नहीं कर सकते।"

इस मुद्दे पर बात करते हुए, आम आदमी पार्टी (आप) के प्रदेश अध्यक्ष और कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा ने कहा कि आज विधानसभा में कांग्रेस की हरकत 'एक शर्मनाक तमाशा है और लोकतांत्रिक परंपराओं पर सीधा हमला है।'

अरोड़ा ने कहा, "उनका व्यवहार सदन और राज्य की 75 साल पुरानी संसदीय परंपराओं का अपमान है। पिछले 75 वर्षों से, राज्यपाल का भाषण लोगों को राज्य का रिपोर्ट कार्ड और भविष्य का रोडमैप पेश करने का एक गंभीर अवसर रहा है। फिर भी, राज्यपाल, जो एक संवैधानिक प्रमुख हैं, के पहले शब्द से ही कांग्रेस ने बुरे नारों से कार्यवाही का बहिष्कार करने और उसे बाधित करने का निर्णय लिया।"

संपादकीय दृष्टिकोण

यह स्पष्ट है कि कांग्रेस का राज्यपाल के भाषण का बहिष्कार करना एक महत्वपूर्ण राजनीतिक कदम है, जो न केवल पार्टी की स्थिति को प्रभावित करेगा, बल्कि पंजाब की राजनीतिक संस्कृति पर भी सवाल उठाता है।
RashtraPress
26 जून 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

कांग्रेस ने राज्यपाल के अभिभाषण का क्यों बहिष्कार किया?
कांग्रेस का कहना है कि यह उनके अधिकारों का उल्लंघन है और उन्होंने इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया के खिलाफ बताया।
आप सरकार ने इस मुद्दे पर क्या प्रतिक्रिया दी?
आप सरकार ने कांग्रेस के निर्णय को सदन और राज्य की परंपरा का अपमान बताया है।
क्या यह राजनीतिक विवाद आगामी चुनावों पर असर डालेगा?
विश्लेषकों का मानना है कि यह राजनीतिक विवाद आगामी पंजाब विधानसभा चुनावों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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