भोपाल: कांग्रेस ने झुग्गी बस्ती को तोड़ने की कार्रवाई पर रोक लगाने की मांग की
सारांश
Key Takeaways
- गोविंदपुरा की झुग्गी बस्ती के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
- कांग्रेस ने प्रशासन से तुरंत रोक लगाने की मांग की।
- सैकड़ों परिवार इस बस्ती में 1982 से निवास कर रहे हैं।
- स्थानीय लोगों ने विरोध किया, जिससे कार्रवाई टल गई।
- कांग्रेस ने उचित निर्णय की उम्मीद जताई है।
भोपाल, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश की राजधानी भोपाल के गोविंदपुरा क्षेत्र में स्थित लेबर कॉलोनी की झुग्गी बस्ती को तोड़ने की योजना बनाई गई है। इस संदर्भ में, कांग्रेस ने इस कार्रवाई पर तत्काल रोक लगाने का अनुरोध किया है। कांग्रेस पार्टी का एक प्रतिनिधिमंडल गोविंदपुरा विधानसभा क्षेत्र की स्टेट लेबर कॉलोनी की झुग्गी बस्ती को तोड़ने की योजना के खिलाफ जिला कलेक्टर भोपाल को ज्ञापन सौंपा।
प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासन से आग्रह किया कि सैकड़ों गरीब परिवारों को बेघर करने वाले इस प्रस्ताव को तुरंत रोका जाए। ज्ञापन में यह उल्लेख किया गया कि लेबर कॉलोनी में सैकड़ों परिवार 1982 से निवास कर रहे हैं। 29 मार्च को नगर निगम का दल पुलिस बल के साथ बुलडोजर लेकर बस्ती को तोड़ने पहुंचा, जबकि बिना किसी पूर्व सूचना या वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए।
स्थानीय निवासियों के विरोध के कारण उस दिन की कार्रवाई टल गई, लेकिन प्रशासन ने दो दिनों में घर खाली करने की चेतावनी दी। बस्तीवासियों के पास वैध पट्टे हैं और वे नियमित रूप से कर एवं बिजली बिल का भुगतान करते हैं। ऐसे में उन्हें जबरन हटाना न केवल अन्यायपूर्ण है, बल्कि अमानवीय भी है। प्रतिनिधिमंडल ने कलेक्टर से आग्रह किया है कि लेबर कॉलोनी की झुग्गी बस्ती को तोड़ने की योजना को तत्काल रोका जाए।
सड़क निर्माण और विकास कार्य के लिए वैकल्पिक मार्ग (डायवर्जन) का परीक्षण कर बस्ती को सुरक्षित रखा जाए। बिना वैध प्रक्रिया एवं पूर्व सूचना के किसी भी प्रकार की कार्रवाई पर रोक लगाई जाए। संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया जाए कि बस्तीवासियों को किसी भी प्रकार की धमकी या प्रताड़ना न दी जाए।
प्रतिनिधिमंडल ने विश्वास जताया है कि प्रशासन इस गंभीर विषय पर संवेदनशीलता से विचार कर न्यायपूर्ण निर्णय लेगा। कांग्रेस पार्टी ने स्पष्ट किया है कि यह केवल मकानों का मुद्दा नहीं, बल्कि सैकड़ों परिवारों के जीवन, आजीविका और सम्मान से जुड़ा विषय है। यदि प्रशासन ने शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो कांग्रेस पार्टी जनहित में आंदोलन करने के लिए बाध्य होगी।