क्या कांग्रेस ने असम भाजपा अध्यक्ष के खिलाफ 'वोट चोरी' का आरोप लगाया?
सारांश
Key Takeaways
- कांग्रेस ने भाजपा के दिलीप सैकिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं।
- मतदाता सूची में हेरफेर की कोशिश का मामला सामने आया है।
- विपक्षी दलों ने चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग की है।
- लोकतंत्र की सुरक्षा के लिए यह एक महत्वपूर्ण मुद्दा है।
- राज्य में विरोध प्रदर्शन की संभावना है।
गुवाहाटी, 9 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। असम में कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों ने भाजपा की राज्य इकाई के अध्यक्ष दिलीप सैकिया के खिलाफ एक औपचारिक शिकायत दर्ज कराई है। इन दलों ने सत्ताधारी पार्टी पर आगामी चुनावों से पूर्व मतदाता सूची में हेरफेर करने का आरोप लगाया है।
दिसपुर पुलिस थाने में दी गई शिकायत में भाजपा का नाम स्पष्ट रूप से उल्लेखित किया गया है। विपक्षी दलों ने आरोप लगाया है कि चुनाव आयोग के साथ मिलकर जानबूझकर असली मतदाताओं के नाम सूची से हटाने का कार्य किया जा रहा है। विपक्ष के नेताओं ने चेतावनी दी कि इस प्रकार की गतिविधियाँ लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए एक गंभीर खतरा हैं। उन्होंने मतदाता सूची को पारदर्शी बनाने और बिना किसी भेदभाव के समीक्षा करने की मांग की।
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और पूर्व सांसद रिपुन बोरा ने कहा कि सभी विपक्षी दलों ने मिलकर 4 जनवरी को हुई एक लाइव वीडियो कॉन्फ्रेंस का हवाला देते हुए भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष दिलीप सैकिया के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई है।
रिपुन बोरा ने कहा, "बैठक के दौरान सैकिया ने कथित तौर पर भाजपा विधायक और जिला अध्यक्षों को निर्देश दिया कि वे हर चुनाव क्षेत्र में 5000 से 10000 ऐसे मतदाताओं की पहचान करें जो भाजपा के समर्थक नहीं हैं।" कांग्रेस नेता ने दावा किया कि यह कार्य लगभग 60 चुनाव क्षेत्रों में किया जाना था और पार्टी नेताओं को 12 जनवरी तक लिस्ट जमा करने के लिए कहा गया था और एक मंत्री को पूरी प्रक्रिया की देखरेख करने का कार्य सौंपा गया था।
उन्होंने कहा, "इससे हर चुनाव क्षेत्र से 5000 से 10000 मतदाताओं को हटाने की भाजपा की योजना का पता चलता है। यही चिंता राहुल गांधी पूरे देश में उठा रहे हैं और अब यह असम में भी सामने आई है।"
कांग्रेस नेता ने चुनाव आयोग पर आरोपों की गंभीरता के बावजूद चुप्पी साधने का भी आरोप लगाया। उन्होंने कहा, "यह एक गंभीर अपराध है। हमने चुनाव आयोग के नियमों और नियमावली के अनुसार कार्रवाई की मांग करते हुए एफआईआर दर्ज कराई है। यह हमारा लोकतांत्रिक कर्तव्य है।"
विपक्ष के नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर तुरंत सुधार के कदम नहीं उठाए गए, तो वे पूरे राज्य में विरोध प्रदर्शन करके अपना आंदोलन तेज करेंगे और कानूनी व संवैधानिक उपाय भी अपनाएंगे। उन्होंने भाजपा सरकार पर 'लोकतंत्र-विरोधी और संविधान-विरोधी गतिविधियों' में शामिल होने का आरोप लगाया।