चक्रवात 'मुरासु' आंध्र तट के करीब, चेन्नई में 149 मिमी बारिश से जनजीवन ठप
सारांश
मुख्य बातें
चेन्नई में 2 नवंबर 2026, सोमवार सुबह हुई मूसलाधार बारिश ने शहर की रफ्तार थाम दी। सड़कें जलमग्न हो गईं और ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन की टीमें युद्धस्तर पर राहत कार्य में जुट गईं, क्योंकि बंगाल की खाड़ी में उठा गंभीर चक्रवाती तूफान 'मुरासु' तेजी से आंध्र प्रदेश के तट की ओर बढ़ रहा था।
बारिश के आंकड़े
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन के इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर के आंकड़ों के अनुसार, सोमवार सुबह 6 बजे तक के 24 घंटों में शहर के उत्तरी इलाकों में सबसे अधिक वर्षा दर्ज की गई। पैरीज में 149.2 मिमी, न्यू मनाली टाउन में 141.6 मिमी और मनाली में 136.2 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।
कॉर्पोरेशन की रिपोर्ट के मुताबिक, पाँच निगरानी केंद्रों पर बहुत भारी और 28 अन्य स्थानों पर भारी बारिश दर्ज हुई। इनमें माधववरम, पुझल, एन्नोर, बेसिन ब्रिज और टोंडियारपेट के इलाके प्रमुख रहे। कोरात्तुर, अयापक्कम, वलसरवक्कम, अलंदुर, पल्लीकरनई और शोलिंगनल्लुर सहित 25 जगहों पर मध्यम वर्षा दर्ज की गई।
प्रशासनिक प्रतिक्रिया
ग्रेटर चेन्नई कॉर्पोरेशन के कमिश्नर जी.एस. समीरन ने ट्रिपलिकेन के बेसेंट रोड पर जलभराव की स्थिति का व्यक्तिगत निरीक्षण किया और राहत कार्यों का जायजा लिया। उन्होंने रिपन बिल्डिंग स्थित इंटीग्रेटेड कमांड एंड कंट्रोल सेंटर का भी दौरा किया, जहाँ से शहर भर की निगरानी की जा रही थी।
नगर निगम के वरिष्ठ अधिकारी और फील्ड टीमें जलभराव वाली सड़कों से पानी निकालने और आवश्यक सेवाएँ बहाल रखने में जुटी रहीं। कंट्रोल सेंटर निरंतर स्थिति की निगरानी करता रहा।
चक्रवात 'मुरासु' की स्थिति
भारतीय मौसम विभाग (IMD) द्वारा सोमवार सुबह 5 बजे जारी बुलेटिन के अनुसार, 'मुरासु' एक गंभीर चक्रवाती तूफान में तब्दील हो चुका है। रात 2:30 बजे इसका केंद्र चेन्नई से लगभग 260 किमी पूर्व-उत्तर-पूर्व और नेल्लोर से लगभग 290 किमी पूर्व-दक्षिण-पूर्व में था।
मौसम विभाग के अनुसार, इस तूफान के 2 नवंबर की आधी रात से 3 नवंबर की सुबह के बीच ओंगोल के निकट नेल्लोर और नरसपुर के मध्य आंध्र प्रदेश के तट को पार करने की संभावना है। चक्रवाती सिस्टम के तीव्र होते ही चेन्नई के समुद्र तटों पर ऊँची और तेज लहरें उठने लगीं, जिससे तटीय इलाकों में मौसम और बिगड़ गया।
आम जनता पर असर
यह ऐसे समय में आया है जब उत्तर-पूर्व मानसून के सक्रिय होने से तमिलनाडु और आंध्र प्रदेश के तटीय जिले पहले से ही सतर्क थे। गौरतलब है कि चेन्नई के उत्तरी इलाके — जो ऐतिहासिक रूप से जलभराव के लिए संवेदनशील हैं — इस बार भी सबसे अधिक प्रभावित रहे। दक्षिणी और पश्चिमी हिस्सों में भी वर्षा दर्ज हुई, हालाँकि तीव्रता अपेक्षाकृत कम रही।
आगे की स्थिति
तूफान के लैंडफॉल के समय और मार्ग को देखते हुए आंध्र प्रदेश के तटीय जिले सर्वाधिक जोखिम में हैं। मौसम विभाग की चेतावनियों के मद्देनजर स्थानीय प्रशासन को अलर्ट पर रखा गया है और मछुआरों को समुद्र में न जाने की हिदायत दी गई है। अगले कुछ घंटे तटीय क्षेत्रों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताए जा रहे हैं।