क्या दिल्ली की अदालत ने सज्जन कुमार को 1984 के दंगा मामलों में बरी किया?
सारांश
Key Takeaways
- सज्जन कुमार को 1984 के दंगा मामलों में बरी किया गया।
- कोर्ट ने सबूतों की कमी के कारण फैसला सुनाया।
- दंगे इंदिरा गांधी की हत्या के बाद भड़के थे।
- सज्जन कुमार का निर्दोष होना उनके दावों पर निर्भर करता है।
- अगले कदम के लिए सुप्रीम कोर्ट में अपील लंबित है।
नई दिल्ली, 22 जनवरी (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली की एक अदालत ने गुरुवार को 1984 के सिख विरोधी दंगों के दौरान दिल्ली के जनकपुरी में दो सिखों - सोहन सिंह और उनके दामाद अवतार सिंह की हत्या तथा विकासपुरी में गुरचरण सिंह को आग लगाने के मामले में पूर्व कांग्रेस सांसद सज्जन कुमार को बरी कर दिया।
राऊज एवेन्यू कोर्ट के स्पेशल जज दिग्विजय सिंह ने एक आदेश सुनाते हुए 78 साल के सज्जन कुमार को बरी किया।
यह मामला 31 अक्टूबर 1984 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की उनके सिख बॉडीगार्ड्स द्वारा हत्या के बाद भड़के दंगों के दौरान हुई हिंसा के आरोपों से संबंधित था।
दशकों बाद जस्टिस जीपी माथुर कमेटी की सिफारिश पर 114 मामलों को फिर से खोलने के लिए एसआईटी का गठन किया गया था।
अगस्त 2023 में, ट्रायल कोर्ट ने औपचारिक रूप से सज्जन कुमार के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप तय किए, लेकिन एसआईटी द्वारा पहले लगाए गए धारा 302 के तहत हत्या के आरोप को हटा दिया गया।
इस मामले में ट्रायल पिछले साल 23 सितंबर को समाप्त हुआ था, जिसके बाद कोर्ट ने 22 दिसंबर को अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था।
इससे पहले, सज्जन कुमार ने आरोपों से इनकार करते हुए कहा था कि वह निर्दोष हैं और अपने सबसे बुरे सपने में भी इन अपराधों में शामिल नहीं हो सकते।
उन्होंने दावा किया कि उन्हें इन घटनाओं से जोड़ने वाला कोई सबूत नहीं है और कहा कि वह हिंसा वाले स्थानों पर मौजूद नहीं थे।
9 नवंबर, 2023 को कोर्ट ने पीड़ित मनजीत कौर का बयान दर्ज किया था, जिन्होंने कहा था कि उन्होंने भीड़ के सदस्यों से सुना था कि हिंसा के दौरान सज्जन कुमार मौजूद थे, लेकिन यह भी स्पष्ट किया कि उन्होंने उन्हें मौके पर खुद नहीं देखा था।
दिल्ली हाई कोर्ट ने एक दूसरे मामले में उनके खिलाफ कड़ी टिप्पणी करते हुए फैसला सुनाया था, जिसमें कहा गया था कि उन्होंने "राजनीतिक संरक्षण" के कारण दशकों तक न्याय से बचने की कोशिश की थी और उन्हें उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। उस सजा के खिलाफ उनकी अपील सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।