अमेरिकी कांग्रेस में एच-1बी वीजा प्रणाली पर नई बहस का आगाज़
सारांश
Key Takeaways
- एच-1बी वीज़ा अमेरिकी अर्थव्यवस्था में कुशल कामगारों की कमी को भरने में मदद कर रहा है।
- कांग्रेस में इस प्रणाली में सुधार पर गंभीर चर्चा चल रही है।
- कौशल और वेतन आधारित चयन प्रणाली का समर्थन किया जा रहा है।
- कुशल विदेशी श्रमिकों का योगदान अर्थव्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है।
- इमिग्रेशन नीतियों में समय के साथ बदलाव की आवश्यकता है।
वॉशिंगटन, 20 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। अमेरिका का एच-1बी वीज़ा कार्यक्रम, जो बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवरों को वहाँ कार्य करने का अवसर प्रदान करता है, इस सप्ताह फिर से चर्चा का विषय बना। अमेरिकी कांग्रेस में इस पर गहन बहस हुई कि बदलती आर्थिक स्थितियों और श्रमिकों की कमी के संदर्भ में इसमें सुधार किस प्रकार किया जा सकता है।
एक महत्वपूर्ण बैठक में, नेताओं और विशेषज्ञों ने यह सवाल उठाया कि क्या वर्तमान लॉटरी प्रणाली उचित है। कुछ ने सुझाव दिया कि वीज़ा आवंटन वेतन या कौशल के आधार पर होना चाहिए और कर्मचारियों को नौकरी बदलने की अधिक स्वतंत्रता मिलनी चाहिए।
कांग्रेस की संयुक्त आर्थिक समिति के अध्यक्ष डेविड श्वाइकर्ट ने कहा कि अमेरिका जनसंख्या से जुड़ी गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। उन्होंने बताया कि रिटायरमेंट की दर तेजी से बढ़ रही है, जबकि कार्यक्षम आयु के लोगों की संख्या स्थिर बनी हुई है। यह स्थिति दीर्घकाल में अर्थव्यवस्था के लिए हानिकारक हो सकती है।
बैठक में यह भी चर्चा हुई कि देश में जनसंख्या वृद्धि लगभग थम चुकी है, जन्म दर घट रही है और युवा श्रमिकों की संख्या कम हो रही है। इस संदर्भ में, विदेशी कामगारों की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाती है।
श्वाइकर्ट ने चिंता जताई कि मौजूदा एच-1बी प्रणाली में कर्मचारी केवल एक नियोक्ता पर निर्भर रहते हैं, जिससे वेतन पर दबाव बन सकता है। उन्होंने सुझाव दिया कि यदि इस प्रणाली को और अधिक लचीला बनाया जाए और कौशल आधारित मॉडल अपनाया जाए, तो इससे अर्थव्यवस्था को लाभ हो सकता है।
डॉ. ल्यूक पार्ड्यू ने कहा कि यदि कर्मचारियों को आसानी से नौकरी बदलने की अनुमति मिले, तो उनकी उत्पादकता और वेतन दोनों में वृद्धि हो सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि अंक आधारित प्रणाली बनाने में सावधानी बरतना आवश्यक है, ताकि नकारात्मक प्रभाव न पड़े।
डैनियल डी मार्टिनो ने बताया कि मौजूदा सिस्टम में कई खामियां हैं, विशेषकर स्थायी निवास पाने में होने वाली देरी। उन्होंने सुझाव दिया कि लॉटरी प्रणाली की जगह वेतन आधारित चयन होना चाहिए और युवा, कुशल कामगारों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
डॉ. डगलस होल्ट्ज-ईकिन ने कहा कि अमेरिका को एक स्थिर और कानून द्वारा निर्धारित इमिग्रेशन सिस्टम की आवश्यकता है। उन्होंने कौशल आधारित इमिग्रेशन को बढ़ावा देने का समर्थन किया और कहा कि सुधार केवल एच-1बी तक सीमित नहीं रहना चाहिए।
जेरेमी न्युफेल्ड ने बताया कि अन्य देशों के अनुभव यह दर्शाते हैं कि केवल अंक प्रणाली पर्याप्त नहीं है, इसमें नियोक्ताओं की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। उन्होंने सुझाव दिया कि एक मिश्रित प्रणाली होनी चाहिए, जिसमें नौकरी के प्रस्ताव पर अतिरिक्त अंक दिए जाएं।
बैठक में इमिग्रेशन का अर्थव्यवस्था पर प्रभाव भी चर्चा का विषय बना। विशेषज्ञों ने कहा कि कुशल विदेशी कामगारों के आने से उत्पादकता में बढ़ोतरी होती है और लंबे समय में वेतन भी बढ़ सकता है, हालांकि प्रारंभ में सरकारी सेवाओं पर दबाव बढ़ सकता है।
डी मार्टिनो ने कहा कि अधिक कुशल प्रवासी आमतौर पर देश की अर्थव्यवस्था में योगदान देते हैं, जबकि कम कुशल प्रवासियों से चुनौतियाँ बढ़ सकती हैं।
प्रतिनिधि लॉयड स्मकर ने कहा कि कई क्षेत्रों में कंपनियों को श्रमिक नहीं मिल रहे हैं। उन्होंने पूछा कि क्या इमिग्रेशन बढ़ाने से आर्थिक विकास और राष्ट्रीय कर्ज की समस्या को संभालने में मदद मिल सकती है। इस पर होल्ट्ज-ईकिन ने सहमति जताई।
बैठक में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का मुद्दा भी उठाया गया। पार्ड्यू ने कहा कि हाल के वर्षों में आर्थिक विकास उत्पादकता में वृद्धि के कारण हुआ है, भले ही नौकरियों की वृद्धि कम हुई हो। उन्होंने कहा कि एआई नौकरियों को खत्म नहीं करेगा, बल्कि नई तरह के कौशल की मांग को बढ़ाएगा।
कांग्रेस सदस्य विक्टोरिया स्पार्ट्ज ने कहा कि इमिग्रेशन नीति में मेहनती और कुशल व्यक्तियों को प्राथमिकता मिलनी चाहिए। विशेषज्ञों ने भी माना कि सिस्टम को समय के साथ बदलना होगा, ताकि यह बाजार की आवश्यकताओं के अनुसार सही ढंग से कार्य कर सके।
अंत में, श्वाइकर्ट ने कहा कि प्रतिभा आधारित इमिग्रेशन सुधार आर्थिक विकास और कर्ज की समस्या से निपटने के लिए अत्यंत आवश्यक है। उन्होंने इसे देश की उत्पादकता, वेतन और आर्थिक स्थिरता के लिए महत्वपूर्ण बताया।
एच-1बी वीज़ा अभी भी अमेरिका में कार्य करने के लिए विदेशी कुशल कामगारों का प्रमुख मार्ग है, विशेषकर तकनीकी और इंजीनियरिंग क्षेत्रों में। हर वर्ष बड़ी संख्या में भारतीय पेशेवर इस वीजा के माध्यम से अमेरिका जाते हैं, इसलिए इसमें होने वाले किसी भी बदलाव पर भारत की नज़र रहती है।
यह मुद्दा लंबे समय से अमेरिका में चर्चा का विषय बना हुआ है, जहाँ वैश्विक प्रतिभा को आकर्षित करने की आवश्यकता है, वहीं दूसरी ओर वेतन, कामगारों के अधिकार और वीजा देने की प्रक्रिया को लेकर चिंताएँ भी बनी हुई हैं।