दिल्ली के एम्स में हरीश राणा का निधन, इच्छामृत्यु की मिली थी कोर्ट से अनुमति

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
दिल्ली के एम्स में हरीश राणा का निधन, इच्छामृत्यु की मिली थी कोर्ट से अनुमति

सारांश

दिल्ली स्थित एम्स में हरीश राणा का निधन हो गया, जो पहले व्यक्ति थे जिन्हें इच्छामृत्यु की अनुमति मिली थी। यह मामला न्यायालय में एक महत्वपूर्ण निर्णय के रूप में दर्ज हुआ।

मुख्य बातें

हरीश राणा का निधन मेडिकल दृष्टिकोण से एक महत्वपूर्ण केस है।
सुप्रीम कोर्ट ने पहली बार इच्छामृत्यु की अनुमति दी।
लंबे समय से कोमा में रहने वाले रोगियों की चिकित्सा देखभाल पर सवाल उठते हैं।
परिवार का साथ और सहारा महत्वपूर्ण होता है।
इच्छामृत्यु के अधिकार पर समाज में बहस होना आवश्यक है।

नई दिल्ली, 24 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली के अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में भर्ती हरीश राणा का मंगलवार को निधन हो गया। हरीश राणा देश के पहले व्यक्ति थे जिन्हें सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पैसिव यूथेनेशिया यानी इच्छामृत्यु की अनुमति प्राप्त हुई थी।

वास्तव में, हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से अधिक समय से कोमा में थे और उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा था। लंबे समय तक जीवन रक्षक प्रणाली पर निर्भर रहने के कारण उनके परिवार ने अदालत से इच्छामृत्यु की अनुमति मांगी थी। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में एक ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी।

सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च को हरीश राणा की इच्छामृत्यु की मांग पर अपना निर्णय सुनाया। न्यायमूर्ति जेबी परदीवाला और न्यायमूर्ति केवी विश्वनाथन की पीठ ने इस पर निर्णय लिया। कोर्ट ने यह भी कहा कि इस प्रक्रिया को पूरी गरिमा के साथ संपन्न किया जाना चाहिए।

जस्टिस पारदीवाला ने कहा कि यह एक बहुत ही दुखद मामला है। यह हमारे लिए एक कठिन निर्णय है, लेकिन हरीश को इस अपार दुख में नहीं रख सकते। हम उस स्थिति में हैं जहां हमें अंतिम निर्णय लेना होगा। सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा के परिवार की प्रशंसा की, यह कहते हुए कि उनके परिवार ने कभी उनका साथ नहीं छोड़ा। किसी से प्यार करना, सबसे बुरे समय में उनकी देखभाल करना है।

यह जानना महत्वपूर्ण है कि हरीश चंडीगढ़ में पढ़ाई कर रहे थे और 2013 में अपने हॉस्टल की चौथी मंजिल से गिर गए थे। इससे उनके सिर में गंभीर चोटें आईं। तब से वह लगातार बिस्तर पर अचेत अवस्था में हैं। लंबे समय तक बिस्तर पर रहने के कारण उनके शरीर पर घाव हो गए हैं। लकवाग्रस्त हरीश को सांस लेने, भोजन करने और दैनिक देखभाल के लिए चिकित्सा सहायता की आवश्यकता पड़ती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जिसमें इच्छामृत्यु का अधिकार और चिकित्सा नैतिकता का प्रश्न शामिल है। यह समाज के लिए विचारणीय है कि हम ऐसे मामलों में कैसे प्रतिक्रिया करते हैं।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

इच्छामृत्यु क्या है?
इच्छामृत्यु एक प्रक्रिया है जिसमें व्यक्ति अपनी इच्छा से जीवन समाप्त करने की अनुमति मांगता है।
सुप्रीम कोर्ट का निर्णय क्या था?
सुप्रीम कोर्ट ने हरीश राणा को पैसिव यूथेनेशिया की अनुमति दी थी।
हरीश राणा की स्थिति क्या थी?
हरीश राणा पिछले 13 वर्षों से कोमा में थे और उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं हो रहा था।
इस निर्णय का महत्व क्या है?
यह निर्णय चिकित्सा नैतिकता और इच्छामृत्यु के अधिकार पर महत्वपूर्ण चर्चा को जन्म देता है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 2 सप्ताह पहले
  2. 1 महीना पहले
  3. 2 महीने पहले
  4. 2 महीने पहले
  5. 2 महीने पहले
  6. 2 महीने पहले
  7. 3 महीने पहले
  8. 4 महीने पहले