सुप्रीम कोर्ट के इच्छामृत्यु के निर्णय पर सांसदों की प्रतिक्रियाएँ
सारांश
Key Takeaways
- हरीश राणा को इच्छामृत्यु का अधिकार दिया गया है।
- सांसदों ने इस निर्णय की सराहना की है।
- मनुष्य की पीड़ा और परिवार की स्थिति पर गहरा प्रभाव पड़ा है।
नई दिल्ली, ११ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। गाजियाबाद के निवासी हरीश राणा को सुप्रीम कोर्ट द्वारा इच्छामृत्यु प्रदान किए जाने पर पक्ष और विपक्ष के सांसदों ने इस निर्णय की सराहना की है।
सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय पर जेएमएम सांसद महुआ माजी ने कहा, "यह एक प्रशंसनीय पहल है, क्योंकि जब परिवार उस व्यक्ति की पीड़ा नहीं देख सकता है, जो वर्षों से न तो पूरी तरह जी पाया है और न ही मौत को गले लगा सका है, तो यह प्रयास सराहनीय है।"
कांग्रेस की राज्यसभा सांसद रजनी अशोकराव पाटिल ने कहा कि इस स्थिति में पैसिव यूथेनेशिया आवश्यक है। वे वर्षों से बिस्तर पर हैं, और उनका देखभाल करना सभी के लिए कठिन है।
भाजपा सांसद किरण चौधरी ने कहा कि मानवता के दृष्टिकोण से यह एक सराहनीय निर्णय है। जब कोई व्यक्ति ऐसी स्थिति में होता है, तो परिवार पर भी दुख होता है। अगर उचित कानून बनाया जाए, तो यह उचित होगा।
सांसद पप्पू यादव ने सुझाव दिया कि सरकार को हरीश राणा का इलाज विदेश में कराना चाहिए था। जब आर्थिक तंगी आती है, तो परिवार के सदस्य परवरिश की चिंता करते हैं। इच्छामृत्यु अंतिम विकल्प होना चाहिए।
केंद्रीय राज्यमंत्री रामदास आठवले ने कहा कि कोर्ट ने उनके इच्छानुसार निर्णय लिया है। १३ वर्षों से कोमा में होने के बाद, माता-पिता ने इच्छामृत्यु की मांग की थी, जिसे मंजूरी मिली। मानवता की दृष्टि से यह एक सही निर्णय है।