क्या दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े आरोपी जावेद सिद्दीकी पर 2 करोड़ रुपए की ठगी का आरोप है, 24 साल पुराना मामला?
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली ब्लास्ट से जुड़े आरोपियों की गिरफ्तारी
- 2 करोड़ रुपए की ठगी का मामला
- 24 साल पुराना मामला
- पुलिस की कार्रवाई जारी
- जमानत और बरी होने के मामले
भोपाल, 20 नवंबर (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली ब्लास्ट के आतंकियों को आश्रय देने वाली अल फलाह यूनिवर्सिटी के चेयरमैन जावेद सिद्दीकी और उनके भाई हमूद सिद्दीकी के खिलाफ पहले से ही भोपाल में 2 करोड़ रुपए की ठगी का मामला दर्ज है। यह मामला लगभग 24 साल पुराना है। दोनों भाई लंबे समय से पुलिस की पकड़ से बचते हुए फरार थे। हाल ही में दिल्ली ब्लास्ट के संदर्भ में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जावेद सिद्दीकी को गिरफ्तार किया।
जानकारी के अनुसार, जावेद और हमूद सिद्दीकी ने 1997 से 2001 के बीच भोपाल में लोगों को ठगने का कार्य किया। इन्होंने एक चिटफंड कंपनी खोली और लोगों को यह लालच दिया कि उनके पैसे दोगुने कर दिए जाएंगे। इन्होंने मुस्लिम समुदाय से ठगे गए पैसों का उपयोग आतंकी साजिशों में किया। 2001 तक जनता को धोखा देकर ये दोनों भाई फरार हो गए थे।
इस बीच, तलैया और शाहजहानाबाद थाने में इन दोनों के खिलाफ शिकायत पर एफआईआर भी दर्ज कराई गई थी। आरोप है कि गैस पीड़ितों के पैसे भी इस ठगी में शामिल थे। जावेद सिद्दीकी ने इस मामले में अग्रिम जमानत ले रखी थी, जबकि उनके भाई हमूद सिद्दीकी को पहले ही कोर्ट ने बरी कर दिया था। इसके अलावा, इनके खिलाफ देश के विभिन्न हिस्सों में भी धोखाधड़ी और चिटफंड के अनेक मामले दर्ज हैं।
जानकारी के अनुसार, प्रार्थी जुनेद कुरैशी ने 5 दिसंबर 1999 को शाहजहानाबाद थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि कंपनी ने 1998 में उनके और अन्य लोगों के जमा किए गए पैसे हड़प लिए। जुनेद ने बताया कि उसने 15 जून और 15 नवंबर 1998 को कुल 75,000 रुपए जमा किए थे, लेकिन कंपनी के अधिकारी कार्यालय बंद कर फरार हो गए।
शिकायत पर एफआईआर 7 दिसंबर 1999 को दर्ज की गई। जांच में पता चला कि कुल 147 लोग प्रभावित हुए और लगभग 15.32 लाख रुपए की ठगी हुई। इस मामले में कुल 24 आरोपी थे, जिनमें हमूद सिद्दीकी, हुस्ना सिद्दीकी, सूबा सिंह, शाहबुद्दीन चौधरी, मसूद अहमद, जेबा सिद्दीकी, परवीन सुल्तान और अन्य शामिल थे।
जांच और अभियोग पत्र के अनुसार, कुछ आरोपी गिरफ्तार हुए, जबकि अधिकांश फरार हैं। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस निरंतर उनके पते पर छापेमारी कर रही है और सूचना देने वाले को 5,000 से 10,000 रुपए का पुरस्कार घोषित किया गया है। फरार आरोपियों की संपत्ति की जानकारी जुटाई जा रही है, लेकिन कई के पास कोई चल-अचल संपत्ति का रिकॉर्ड नहीं मिला।
इस मामले में न्यायालय में पेशी 29 अगस्त 2019 को निर्धारित थी। उस समय 24 आरोपियों में से एक की मौत हो चुकी थी और एक आरोपी के खिलाफ मामला वापस ले लिया गया था। बाकी आरोपियों में कुछ को न्यायालय में प्रस्तुत किया गया, जबकि 16 आरोपी फरार थे।