दरियागंज हत्याकांड 1998: 27 साल बाद उम्रकैद के दोषी नवाब को दिल्ली पुलिस ने दबोचा, तिहाड़ जेल भेजा

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दरियागंज हत्याकांड 1998: 27 साल बाद उम्रकैद के दोषी नवाब को दिल्ली पुलिस ने दबोचा, तिहाड़ जेल भेजा

सारांश

27 साल पुराने दरियागंज हत्याकांड में उम्रकैद के दोषी मोहम्मद नवाब को दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने आखिरकार दबोच लिया। 2025 में हाईकोर्ट की अपील खारिज होने के बाद वह फरार था और कसाबपुरा में छिपकर कसाई का काम कर रहा था। न्याय को दो दशक से अधिक का इंतज़ार करना पड़ा।

Key Takeaways

दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच ने 30 अप्रैल 2026 को 1998 के दरियागंज हत्याकांड के दोषी मोहम्मद नवाब (52) को गिरफ्तार किया। नवाब ने 29-30 नवंबर 1998 की रात रिक्शा चालक गिआनी की पत्थर से सिर पर वार कर हत्या की थी। अदालत ने आईपीसी धारा 302 के तहत उम्रकैद की सजा सुनाई; 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय ने अपील खारिज की। सजा के बाद सरेंडर न करने पर जेल प्रशासन ने नवाब को पैरोल जंपर घोषित किया था। नवाब आर्म्स एक्ट के तीन अन्य मामलों में भी दोषी करार दिया जा चुका है। गिरफ्तारी के बाद नवाब को तिहाड़ जेल भेज दिया गया।

दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच (सेंट्रल रेंज) ने 30 अप्रैल 2026 को 1998 के दरियागंज हत्याकांड में उम्रकैद की सजा पाए दोषी मोहम्मद नवाब (52) को गिरफ्तार कर तिहाड़ जेल भेज दिया। नवाब 2004 में जमानत पर रिहा हुआ था और 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा अपील खारिज होने के बाद भी सरेंडर करने से बचता रहा, जिसके बाद जेल प्रशासन ने उसे पैरोल जंपर घोषित कर दिया था।

मुख्य घटनाक्रम: कैसे हुई थी हत्या

29-30 नवंबर 1998 की रात करीब 2 बजे, दरियागंज स्थित दिल्ली गेट के पास नवाब ने एक रिक्शा चालक गिआनी पर हमला कर दिया। पुलिस के अनुसार, रिक्शा चालक द्वारा घर तक ले जाने से मना करने पर नवाब ने उसे पकड़कर गाली-गलौज की, जमीन पर गिराया और पत्थर से सिर पर कई बार वार किए। मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शी हरपाल सिंह ने शोर मचाकर पुलिस को सूचना दी।

पीसीआर वैन और पुलिस टीम के पहुँचने पर नवाब भागने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे मौके पर ही दबोच लिया गया। घायल रिक्शा चालक को लोक नायक जय प्रकाश नारायण अस्पताल (LNJP) ले जाया गया, जहाँ उसकी मौत हो गई। इसके बाद थाना दरियागंज में मामला दर्ज किया गया।

अदालती फैसला और फरारी

जाँच और ट्रायल के बाद अदालत ने नवाब को आईपीसी की धारा 302 के तहत दोषी करार देते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई। उसने दिल्ली उच्च न्यायालय में अपील दाखिल की, जो 2025 में खारिज कर दी गई। उच्च न्यायालय ने उसे तिहाड़ जेल में सरेंडर करने के आदेश दिए, लेकिन नवाब ने सरेंडर नहीं किया।

गौरतलब है कि अपील खारिज होने के बाद नवाब फरार हो गया और पुरानी दिल्ली के कसाबपुरा इलाके में किराए पर दुकान लेकर कसाई का काम करने लगा, ताकि पुलिस की नज़रों से बच सके।

विशेष टीम की कार्रवाई और गिरफ्तारी

आरोपी की गिरफ्तारी के लिए इंस्पेक्टर महीपाल सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई, जिसमें एसआई गौरव, एएसआई सत्यवीर, तरुण, राकेश, हेड कांस्टेबल नवीन, सुनील, रामकेश और विनोद शामिल थे। पूरी कार्रवाई की निगरानी एसीपी सतेंद्र मोहन कर रहे थे।

जाँच के दौरान हेड कांस्टेबल विनोद ने कई स्थानों पर छानबीन कर आरोपी के ठिकाने का पता लगाया। तकनीकी निगरानी और ग्राउंड वर्क के ज़रिए पुलिस ने उसकी लोकेशन ट्रैक की। छापेमारी के दौरान उसकी लोकेशन बदलकर रंजीत नगर पहुँच गई, जहाँ पुलिस ने उसे उस वक्त गिरफ्तार कर लिया जब वह अपने परिवार से मिलने जा रहा था।

आरोपी की पृष्ठभूमि

मोहम्मद नवाब दिल्ली के रंजीत नगर का रहने वाला है और उसने वहीं से 8वीं तक पढ़ाई की। बाद में वह अपने पिता के साथ जामा मस्जिद इलाके में चिकन शॉप पर काम करने लगा। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, नवाब पहले भी आर्म्स एक्ट के तीन मामलों में शामिल रह चुका है और उन सभी में उसे सजा हो चुकी है।

आगे क्या होगा

गिरफ्तारी के बाद नवाब को औपचारिक रूप से तिहाड़ जेल भेज दिया गया है, जहाँ उसे उम्रकैद की शेष सजा काटनी होगी। यह मामला दर्शाता है कि भले ही दशकों बीत जाएँ, न्याय की प्रक्रिया अंततः अपना रास्ता खोज लेती है।

Point of View

ऐसे मामले न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाते रहेंगे।
NationPress
30/04/2026

Frequently Asked Questions

दरियागंज हत्याकांड 1998 क्या है?
यह 29-30 नवंबर 1998 की रात दिल्ली के दरियागंज स्थित दिल्ली गेट के पास हुई एक हत्या का मामला है, जिसमें आरोपी मोहम्मद नवाब ने रिक्शा चालक गिआनी की पत्थर से सिर पर वार कर हत्या कर दी थी। अदालत ने नवाब को आईपीसी धारा 302 के तहत दोषी मानते हुए उम्रकैद की सजा सुनाई थी।
मोहम्मद नवाब को 27 साल बाद क्यों गिरफ्तार किया गया?
नवाब 2004 में जमानत पर रिहा हुआ था और 2025 में दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा उसकी अपील खारिज होने के बाद भी तिहाड़ जेल में सरेंडर नहीं किया। जेल प्रशासन ने उसे पैरोल जंपर घोषित कर दिया, जिसके बाद दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने विशेष टीम बनाकर उसे 30 अप्रैल 2026 को गिरफ्तार किया।
नवाब को कहाँ से गिरफ्तार किया गया?
पुलिस की तकनीकी निगरानी और ग्राउंड वर्क से पता चला कि नवाब पुरानी दिल्ली के कसाबपुरा इलाके में छिपा था। छापेमारी के दौरान वह रंजीत नगर पहुँच गया, जहाँ पुलिस ने उसे तब गिरफ्तार किया जब वह अपने परिवार से मिलने जा रहा था।
इस मामले में किस पुलिस टीम ने कार्रवाई की?
इंस्पेक्टर महीपाल सिंह के नेतृत्व में एक विशेष टीम बनाई गई थी, जिसमें एसआई गौरव, एएसआई सत्यवीर, तरुण, राकेश और कई हेड कांस्टेबल शामिल थे। पूरी कार्रवाई की निगरानी एसीपी सतेंद्र मोहन कर रहे थे।
मोहम्मद नवाब के अन्य आपराधिक मामले क्या हैं?
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, मोहम्मद नवाब पहले भी आर्म्स एक्ट के तीन मामलों में शामिल रह चुका है और उन सभी में उसे सजा हो चुकी है। दरियागंज हत्याकांड उसका सबसे गंभीर मामला है।
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