दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे का उद्घाटन: पीएम मोदी ने मां डाट काली मंदिर में की पूजा
सारांश
Key Takeaways
- दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर क्षेत्रीय विकास के लिए महत्वपूर्ण है।
- प्रधानमंत्री मोदी ने जई मां डाट काली मंदिर में पूजा की।
- इस कॉरिडोर से यात्रा समय में कमी आएगी।
- परियोजना में वन्यजीवों की सुरक्षा के लिए विशेष प्रावधान हैं।
- यह परियोजना 12,000 करोड़ रुपये की लागत से विकसित की जा रही है।
देहरादून, 14 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को उत्तराखंड पहुंचने पर देहरादून में स्थित जई मां डाट काली मंदिर में पूजा-अर्चना की। वे यहां दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के उद्घाटन के लिए आए थे।
अपने इस दौरे के दौरान, प्रधानमंत्री मोदी का स्वागत पारंपरिक वेशभूषा में सजे बच्चों ने किया, जिन्होंने दुर्गा देवी स्तोत्रम का पाठ किया। उन्होंने मंदिर में अन्य श्रद्धालुओं से भी संवाद किया।
इससे पहले, प्रधानमंत्री ने सहारनपुर में दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के एलिवेटेड सेक्शन पर वन्यजीव कॉरिडोर का निरीक्षण किया।
इस मौके पर केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी, उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल, मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और ब्रजेश पाठक भी उपस्थित रहे।
प्रधानमंत्री मोदी ने वन्यजीव कॉरिडोर के निर्माण प्रक्रिया को दर्शाने वाली प्रदर्शनी का अवलोकन किया और अधिकारियों से परियोजना की जानकारी ली।
उन्होंने वन्यजीव कॉरिडोर के साथ एक रोड शो भी किया, जिसमें बड़ी संख्या में लोग सड़क किनारे इकट्ठा हुए और प्रधानमंत्री का स्वागत करने के लिए उत्साहित दिखाई दिए।
लोगों ने तिरंगा हाथ में लेकर “मोदी, मोदी”, “भारत माता की जय” और “जय श्री राम” जैसे नारे लगाए और उन पर फूलों की वर्षा की।
कई लोगों ने पारंपरिक परिधान पहनकर लोक नृत्य प्रस्तुत किए। इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी देहरादून में एक सार्वजनिक कार्यक्रम में दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर का उद्घाटन करेंगे और जनसभा को संबोधित करेंगे।
यह कॉरिडोर 213 किमी लंबा है, जिसमें छह लेन हैं और इसे लगभग 12,000 करोड़ रुपये की लागत से विकसित किया गया है।
यह कॉरिडोर दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से होकर गुजरता है और यात्रा समय को छह घंटे से घटाकर लगभग ढाई घंटे कर देगा।
इस परियोजना में 10 इंटरचेंज, तीन रेलवे ओवर ब्रिज, चार बड़े पुल और 12 वे-साइड सुविधाएं शामिल हैं, जो उच्च गति की कनेक्टिविटी सुनिश्चित करेंगी।
कॉरिडोर में एडवांस्ड ट्रैफिक मैनेजमेंट सिस्टम (एटीएमएस) भी स्थापित किया गया है, जो यात्रियों को सुरक्षित और कुशल यात्रा अनुभव प्रदान करेगा।
पर्यावरणीय संवेदनशीलता और जैव विविधता को ध्यान में रखते हुए इस कॉरिडोर का डिज़ाइन इस तरह किया गया है कि मानव-वन्यजीव संघर्ष को काफी हद तक कम किया जा सके।
वन्यजीवों की निर्बाध आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए इस परियोजना में कई विशेष प्रावधान किए गए हैं, जिनमें 12 किमी लंबा वन्यजीव एलिवेटेड कॉरिडोर शामिल है, जो एशिया के सबसे लंबे कॉरिडोर में से एक है।
इसमें आठ एनिमल पास, 200-200 मीटर लंबे दो हाथी अंडरपास और डाट काली मंदिर के पास 370 मीटर लंबी सुरंग भी शामिल है।
दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर क्षेत्रीय आर्थिक विकास को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा, क्योंकि यह प्रमुख पर्यटन और आर्थिक केंद्रों के बीच कनेक्टिविटी बढ़ाएगा और व्यापार व विकास के नए अवसर खोलेगा।
प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, यह परियोजना प्रधानमंत्री मोदी के उस विजन को दर्शाती है, जिसमें उच्च गति कनेक्टिविटी, पर्यावरणीय स्थिरता और नागरिकों के जीवन स्तर में सुधार को एक साथ लाया गया है।